लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा- अफगानी छात्रों की हर जरूरतों का ख्याल रखा जाएगा

लखनऊ, 8 सितम्बर: अफगानिस्तान में चल रहे गतिरोध के बीच यूपी के लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों को आश्वस्त करते हुए कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार राय ने कहा है कि छात्रों के साथ विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार संपर्क बनाए हुए है और उनकी हर जरूरतों का ख्याल रखा जाएगा। उनकी जो भी चिंताएं हैं उन्हें दूर की जाएंगी और हर स्तर पर मदद दी जाएगी जैसा उनकी डिमांड होगी। विश्वविद्यालय की बेहतरी के लिए उठाए जा रहे कदम को लेकर कुलपति ने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय देश का ऐसा पहला विश्वविद्यालय है जहां नई शिक्षा नीति को लागू करने का काम किया गया है।

लखनऊ

लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति आलोक कुमार राय ने वन इंडिया डॉट कॉम से एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान यह बातें कहीं। प्रो राय ने कहा कि इस विश्विविद्यालय में काम करते हुए लगभग 20 महीने हो गए हैं और जहां तक हमारी कोशिश रही है कि विश्वविद्यालय को आधुनिक टेक्नॉलजी से लैस किया जाए औरयहां आने वाले छात्रों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं दी जाएं।

सवाल- आपने जब विश्वविद्यालय में ज्वाइन किया था तो स्थितियां बहुत खराब थीं। महामारी अपने चरम पर थी। आने के बाद आपने छात्रों की बेहतरी के लिए क्या क्या कदम उठाए।

जवाब- विश्वविद्यालय का पूरा परिवार एक साथ मिलकर शिक्षा, समाज और संस्थान के सर्वांगीण विकास का कार्य किया। मुझे लगभग 20 महीने हो गए कुलपति बने हुए। इस दौरान हमने कई कदम उठाए। पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षा में नई शिक्षा नीति को लागू करने वाला यूपी देश का पहला विश्वविद्यालय बन गया है। हम लोगों ने अपने प्रोग्राम में नई शिक्षा नीति में जो भी इशू आए थे, सभी को समाहित किया है। ऑनलाइन एजुकेशन को लगातार बढ़ावा देने का काम किया। विश्वविद्यालय में कई कदम उठाए गए जिसका फायदा बच्चों को मिल रहा है। बहुत सारे कार्यक किए गए। टीचर्स को मोटिवेशन के लिए कई कार्यक्रम कराए गए। विश्वविद्यालय की रैंकिंग में काफी इजाफा हुआ है।

कुलपति आलोक कुमार राय

सवाल- डेढ़ साल पहले जब कोरोना अपने चरम पर था उस समय आपने छात्रों के लिए काफी कदम उठाए। आपके पास भी चुनौतियां थीं कि छात्रों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। इस दौरान आपने क्या क्या कदम उठाए।

जवाब- महामारी के दौरान एक शैक्षणिक संस्थान का दायित्व था कि वह अपनी उपादेयता स्थापति करे। जब कोरोना का पहला फेज शुरू हुआ था उस समय बच्चों की परीक्षाएं शुरू होने वाली थीं। पढ़ाई अपने पीक पर थी। छात्रों की पढाई में व्यवधान न पड़े इसके लिए संस्थान ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाने का फैसला किया था। विश्वविद्यालय ने अपना सैनिटाइजर बनाया। आयुर्वेद के विभाग की तरफ से काढ़ा तैयार किया गया। विश्वविद्यालय में एक मास्क बैंक बनाया गया। इसके साथ ही एक कम्युनिटी किचेन का भी इंतजाम किया गया था। यह दो महीने से ज्यादा चला। यह किचेन सभी के सहयोग से चला सभी का योगदान रहा और सबने मिलकर समाज के उस तबके की मदद की जिसको सबसे ज्यादा जरूरत थी। सांसद और विधायक निधि से बहुत लोगों ने मदद की जिसकी वजह से यह संभव हो पाया।

सवाल- विश्वविद्यालय का कुलपति बने हुए आपको 20 महीने हो गया। यदि आपसे यह पूछा जाए कि इस दौरान वह कौन सी पांच चुनौतियां थीं जिसका आपने सामना करते हुए विश्वविद्यालय को आगे ले जाने के लिए कदम उठाए।

जवाब- सबसे बड़ी चुनौती तो कोरोना महामारी की ही थी। इस दौरान छात्र कल्याण के लिए भी कदम उठाए गए। सबसे बड़ी बात यह रही कि इस महामारी में जिस भी छात्र या छात्रा ने माता-पिता में से किसी एक को भी खोया उसको कॉलेज के शिक्षकों, कॉलेज के अधिकारियों की ओर से गोद लिए जाने की परम्परा की शुरुआत की गई। इस दौरान मैंने भी एक छात्र को गोद लेने का काम किया है। अलग- अलग संस्थान का वर्क कल्चर अलग अलग होती है। उसी के अनुरूप छात्रों को भी बदलाव किया जाना जरूरी थी। यहां आने के बाद हमने वर्क कल्चर बदलने का प्रयास किया।

सवाल- संकट के इस समय में अफगानी छात्रों की मदद के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन क्या कर रहा है

जवाब- अफगानी दूतावास के सम्पर्क में विश्वविद्यालय प्रशासन अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से ही विश्वविद्यालय में पढ़ने आए छात्रों के बीच अपने परिजनों से मिलने और बात करने को लेकर उत्सुक हैं लेकिन अभी उनको किसी तरह से शांत रहने की और तनाव में न रहने का अनुरोध किया जा रहा है। छात्रों बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार अफगानी दूतावास के सम्पर्क में है और वहां के हालात के पल पल का अपडेट ले रहे हैं। उन्हें पूरी तरह से आश्वस्त किया कि हर संभव उनकी मदद की जाएगी।

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