Gyanvapi Mosque पर अदालत का फैसला हिंदू पक्ष की जीत, याचिकाकर्ता ने कहा- दीया जलाने का दिन
ज्ञानवापी मस्जिद मामले में याचिकाकर्ता सोहन लाल आर्य ने अदालत के फैसले के बाद कहा, 'यह हिंदू समुदाय की जीत है। varanasi Gyanvapi Mosque case reactions after verdict
वाराणसी, 12 सितंबर : ज्ञानवापी मस्जिद मामले में याचिकाकर्ता सोहन लाल आर्य ने अदालत के फैसले के बाद कहा, 'यह हिंदू समुदाय की जीत है। अगली सुनवाई 22 सितंबर को है।' उन्होंने कहा कोर्ट का फैसला ज्ञानवापी मंदिर की आधारशिला है। याचिकाकर्ता सोहन लाल आर्य ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील भी की। गौरतलब है कि ज्ञानवापी मस्जिद मामले में जिला अदालत के आदेश से एक दिन पहले वाराणसी में सुरक्षा कड़ी कर दी गई। प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए निषेधाज्ञा (धारा 144) लागू कर दी।
हिंदू समुदाय की जीत
याचिकाकर्ता सोहन लाल आर्य ने अदालत के फैसले के बाद कहा, 'यह हिंदू समुदाय की जीत है। उन्होंने कहा, कोर्ट का फैसला मंदिर निर्माण की आधारशिला है। सोहन लाल आर्य ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील भी की।
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जश्न मनाने के लिए दीया जलाएं
हिंदू पक्ष की याचिकाकर्ता मंजू व्यास ने कहा, भारत आज खुश है, मेरे हिंदू भाइयों और बहनों को जश्न मनाने के लिए दीया जलाना चाहिए।" मंजू व्यास को ज्ञानवापी मस्जिद श्रृंगार गौरी मंदिर विवाद में कोर्ट के फैसले के बाद जश्न मनाते और डांस करते देखा गया।

क्या है ज्ञानवापी मामला
गौरतलब है कि श्रृंगार गौरी-ज्ञानवापी मामले में वाराणसी जिला अदालत ने फैसला सुनाया। जिला न्यायाधीश एके विश्वेश ने पिछले महीने मामले में 12 सितंबर तक आदेश सुरक्षित रखा था। यह निर्णय ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में हिंदू देवी-देवताओं की पूजा करने की अनुमति मांगने वाली हिंदू महिलाओं की याचिका की सुनवाई से संबंधित है। पांच हिंदू महिलाओं ने याचिका दायर कर अदालत से काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के भीतर श्रृंगार गौरी स्थल की पूजा करने की अनुमति मांगी थी।

निचली अदालत में सुनवाई, शिवलिंग पर सस्पेंस !
महिलाओं की याचिका पर वाराणसी की स्थानीय अदालत ने विगत मई में ज्ञानवापी परिसर के वीडियोग्राफी सर्वेक्षण का आदेश दिया था। 16 मई को सर्वे पूरा हुआ। 19 मई को कोर्ट में रिपोर्ट पेश की गई। वीडियोग्राफी सर्वेक्षण के बाद हिंदू पक्ष ने दावा किया गया कि मस्जिद परिसर में शिवलिंग जैसा ढांचा मिला है। मस्जिद समिति ने विरोध किया कि यह शिवलिंग नहीं फव्वारा था।

सुप्रीम कोर्ट ने लौटाया- कहा अनुभवी अधिकारी फैसला करें
मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा, जहां 20 मई को देश की सबसे बड़ी अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद केस सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पास से जिला जज के पास ट्रांसफर कर कहा, मुद्दे की "जटिलताओं और संवेदनशीलता" को देखते हुए, बेहतर है कि मामले में वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी फैसला करें, जिनके पास 25-30 साल से अधिक का अनुभव हो।

अब आगे क्या ? सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही बता दिया
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक निचली अदालत में सिविल सूट पर फैसला होने तक और फैसले की तारीख से आठ सप्ताह बाद तक मुस्लिम पक्ष को नमाज के लिए प्रवेश से नहीं रोका जाएगा। इस टाइम पीरियड में शिवलिंग मिलने के दावे वाला क्षेत्र भी सुरक्षित रखा जाएगा।

जल्दी फैसले की अपील, सुरक्षा के लिए CRPF
अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद प्रबंधन समिति वाराणसी की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने जिला जज को ज्ञानवापी-काशी विश्वनाथ दीवानी मुकदमे की सुनवाई प्राथमिकता पर तय करने को कहा था। शिवलिंग की सुरक्षा के लिए अदालत में दायर आवेदन पर सिविल जज ने जिला मजिस्ट्रेट, वाराणसी को उस क्षेत्र को सील करने का निर्देश दिया जहां शिवलिंग देखा गया था। क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ जवानों की तैनाती और आम लोगों के प्रवेश पर का निर्देश भी दिया गया।

पहले भी हुआ मंदिर मस्जिद विवाद
गौरलतब है कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के पास बनी Gyanvapi Mosque को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी गई। पक्षकारों ने निचली अदालत के फैसले को हिंदू समुदाय की जीत करार दिया। इससे पहले अयोध्या में राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद भूमि विवाद को लेकर भी दशकों तक कानूनी लड़ाई लड़ी गई। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर, 2019 में विवाद का निपटारा किया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया था।












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