वाराणसी: बिजली आपूर्ति ठप, मच्छरों ने जीना किया दूभर, लोग बोले- आदिमानव युग में आ गए
यूपी में विद्युत कर्मियों की 72 घंटे की हड़ताल जारी है। ऐसे में लोगों का हाल बेहाल हो रहा है। पेयजल की समस्या से लेकर लोगों के रातों की नींद हराम हो गई है।

UP Electricity Workers Strike: विद्युत कर्मियों के प्रदेश व्यापी हड़ताल का असर वाराणसी में भी देखने को मिल रहा है। वाराणसी के शहरी और ग्रामीण इलाकों में पिछले तीन दिनों से बिजली कटौती जारी है, वहीं शुक्रवार को कई इलाकों में सुबह से विद्युत आपूर्ति नहीं हुई। आलम यह है कि कई इलाकों में पेयजल संकट गहरा गया है तो रात्रि में मच्छरों ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। वाराणसी के कई कॉलोनियों में 20 रुपए में मिलने वाले पानी के जार के लिए 50 रुपए लिए जा रहे हैं।
जनरेटर से पानी निकालने के चलते बढ़ा दिए चार्ज
वाराणसी के शिवपुर बीडीए कॉलोनी में रहने वाले लोगों ने बताया कि शुक्रवार को सायं काल पेयजल संकट होने के चलते हैं लोग जार का पानी खरीदने लगे। सामान्य दिनों में एक जार पानी की कीमत 15 से 20 रुपए लिया जाता था लेकिन शुक्रवार को सायं काल पीने वाले पानी की डिमांड बढ़ने के चलते 50 रुपए तक लिए जाने लगे। कॉलोनी वासियों ने बताया कि इस बारे में पानी सप्लाई करने वाले से बात किया गया तो उसका कहना था कि बिजली आपूर्ति ना होने के चलते जनरेटर चलाकर पानी निकाल रहे हैं ऐसे में पानी का दाम अधिक लिया जा रहा है। ऐसी ही स्थिति वाराणसी शहर के अन्य कालोनियों में भी देखने को मिली।
ऐसा लग रहा है जैसे आदिमानव युग में आ गए
वाराणसी जिले के पिंडरा और राजातालाब तहसील के अधिकतर गांव में शुक्रवार सुबह से ही बिजली आपूर्ति बाधित है। ग्रामीणों ने बताया कि दिन किसी तरह बिता लिया गया लेकिन रात गुजारना मुश्किल है। हरहुआ के रहने वाले मनजीत पटेल ने बताया कि बिजली आपूर्ति न होने के चलते ऐसा प्रतीत हो रहा है कि हम आदिमानव युग में आ गए हैं। अधिकतर इलाकों में लोग बिजली पर ही आश्रित रहते हैं। बिजली आपूर्ति ठप हो जाने के चलते मोबाइल भी बंद हो चुकी है और अन्य इलेक्ट्रिक संसाधन भी डिब्बा बनकर रह गए हैं। यही स्थिति एक-दो दिन और रही तो हालात काबू से बाहर हो सकता है।
पुलिसकर्मियों के समझ से बाहर है उपकेंद्र
भले ही जिला प्रशासन द्वारा सभी विद्युत उपकेंद्रों पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई है, लेकिन उपकेंद्र के बारे में जानकारी न होने के चलते विद्युत सप्लाई मुश्किल है। कहीं भी फाल्ट हो जाने के बाद सट डाउन होने पर पुनः फीडर को चालू करना भी मुश्किल हो जा रहा है। उपकेंद्र पर तैनात पुलिसकर्मियों का कहना है कि इसके बारे में यदि पहले से कोई ट्रेनिंग दी गई होती तो शायद ऐसी समस्या न होती। कई जगह चकबंदी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भी तैनाती की गई है। उनका भी यही कहना है कि जानकारी के अभाव में विद्युत उपकरण छूने में भी डर लग रहा है।
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