UP:किसान की बेटी को अमेरिकी यूनिवर्सिटी ने दिया स्कॉलरशिप, मां बोलीं- मुझे लगा पागल हो जाएगी, 2-3 घंटे सोती थी

यूपी के मऊ जिले की एक किसान की बेटी को कॉलेज की पढ़ाई के लिए अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में स्कॉलरशिप मिली है। उसने ये स्कॉलरशिप एक प्रतियोगिता को जीतेन के बाद हासिल की है।

farmer daughter

उत्तर प्रदेश के मऊ की रहने वाली एक गरीब किसान की बेटी ने कमाल कर दिखाया। 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली दाक्षायनी पांडे (17) को अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप मिली है। फिलहाल दाक्षायनी पांडे सीतापुर में रहकर 12वीं की पढ़ाई कर रही हैं, उसकी 12वीं की परीक्षा में फिलहाल दो महीने बचे हुए हैं लेकिन दाक्षायनी पांडे ने अपनी आगे की पढ़ाई की पूरी तैयारी खुद ही कर ली है। छात्रा ने एक ऐसा कार सुरक्षा मॉडल (डिवाइस ) बनाया है, जो गाड़ी में कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर के बढ़ते ही सक्रिय हो जाता है और कार की खिड़की को नीचे की ओर घुमाता है ताकि ताजी हवा अंदर आ सके। इस सुरक्षा सेटअप को छात्रा ने 'मिशन प्रोटेक्टर' नाम दिया है।

सितंबर 2023 में अमेरिका जाएगी दक्षिणायनी पांडे

सितंबर 2023 में अमेरिका जाएगी दक्षिणायनी पांडे

दाक्षायनी पांडे सितंबर 2023 में बायोइंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी जाएगी। इस कार सुरक्षा मॉडल (डिवाइस ) को बनाने की प्रेरणा दक्षिणायनी को तब आया जब उसने एक दिल दहला देने वाली घटना देखी, जिसमें एक बच्चे की कार में गलती से बंद होने के बाद दम घुटने से मौत हो गई।

अपने सेटअप के बारे में बात करते हुए दाक्षायनी पांडे ने कहा, "जब मैंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर लॉग इन किया, तो मुझे अपने सेलेक्शन के बारे में जानकारी मिली। यह मेरे साथ अब तक की सबसे अच्छी बात है। अब मैं अपने सपनों के विश्वविद्यालय में पढ़ने जाऊंगी।''

बेटी की खुशी से खुश हैं माता-पिता

बेटी की खुशी से खुश हैं माता-पिता

दाक्षायनी पांडे की कामयाबी से उसके माता-पिता और शिक्षक काफी खुश हैं। दाक्षायनी पांडे की मां ने कहा कि उसकी बेटी ने एक बच्ची को कार में दम घुटने से मरते हुए देख लिया था, जिसके बाद उसने तय किया कि वह इस तरह कि कोई डिवाइस बनाएगी, जो ऐसी परिस्थिति में सुरक्षा दे। इसके बाद ही उसने कार के लिए ऐसा डिवाइस तैयार किया। इस प्रोजेक्ट के लिए दाक्षायनी पांडे को दिल्ली में विजेता घोषित किया गया। इस डिवाइस का नाम "मिशन प्रोटेक्टर" है।

'2-3 घंटे सोती थी, मुझे लगा पागल हो जाएगी...'

'2-3 घंटे सोती थी, मुझे लगा पागल हो जाएगी...'

दाक्षायनी पांडे की मां रीमा पांडे ने आजतक से बात करते हुए कहा, ''हमारी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि हम बेटी को कहीं बाहर पढ़ने के लिए भेजे। बेटी के अमेरिका जाने को लेकर हम बहुत खुश हैं। हम चाहते हैं कि बेटी वहां से पढ़ाई करके पूरे देश का नाम रौशन करे। वो सिर्फ 2-3 घंटे ही सोती थी और खुद से अकेले में बात करती रहती थी। मैं उसे कहती थी तुम पागल हो जाओगी। जिसपर वो मुझे हमेशा कहती थी कि मम्मी मैं कुछ करके दिखाऊंगी।''

पिता बोले- 'मैं तो एक किसान हूं...'

पिता बोले- 'मैं तो एक किसान हूं...'

पिता दिग्विजय नाथ पांडेय ने बताया, "मैं सीमांत किसान हूं। मेरी बेटी ने प्राथमिक विद्यालय बहादुरपुर में कक्षा 5वीं तक पढ़ाई की है। इसके बाद उसका सलेक्शन सीतापुर में हुआ, जहां वो अभी पढ़ाई कर रही है। अब उसे स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी में स्कॉलरशिप मिल गई है, ये उसके लिए बहुत बड़ा मौका है।''

दाक्षायनी की इस सफलता से उसके शिक्षक भी बहुत ज्यादा खुश हैं। ट्यूशन पढ़ाने वाले शिक्षक अजय और प्राथमिक विद्यालय बहादुरपुर के शिक्षक मनीष कुमार ने कहा कि वह शुरुआत से ही पढ़ाई में बहुत अच्छी थी।

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