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यूपी में उपचुनाव से पहले एनडीए में घमासान, BJP के सहयोगी दल मांग रहे हैं 4 सीटें

हाल ही हुए लोकसभा चुनावों के बाद यूपी की राजनीति में काफी कुछ बदल गया है। राज्य में जहां एनडीए गठबंधन को नए साथी मिले हैं, तो वहीं बीजेपी को सीटों का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। लोकसभा चुनाव को बाद राज्य में अब 10 सीटों पर विधानसभा का उप चुनाव होना है।

राज्य में करीब नौ विधायक संसद के लिए चुने गए हैं। जबकि एक मामले में सजा सुनाए जाने के बाद सपा विधायक इरफान सोलंकी की विधायकी को रद्द कर दिया गया है। लोकसभा चुनावों में हुए भारी नुकसान के बाद बीजेपी अब उपचुनावों की तैयारी में जुट गई है।

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बीजेपी यूपी की सभी 10 सीटों पर क्लीन स्वीप करने का टार्गेट लेकर चुनाव मैदान में उतर चुकी है। बीजेपी सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसके सहयोगी दलों की मांग के चलते उसकी टेंशन भी बढ़ गई है। दरअसल एनडीए के सहयोगी दल संजय निषाद की अगुवाई वाली निषाद पार्टी और जयंत चौधरी की अगुवाई वाली राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) दो-दो सीटों मांग रहे हैं।

क्यों ये दल मांग रहे हैं 2-2 सीटें

निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद मिर्जापुर जिले की मझवां और कटेहरी विधानसभा सीट के लिए दावेदारी ठोंक रहे हैं। उनका कहना है कि, 2022 के यूपी चुनाव में मझवां और कटेहरी, ये दोनों सीटें निषाद पार्टी के हिस्से आई थीं। इस आधार पर ये सीटें हमारी हुईं।

दरअसल मझवां सीट से निषाद पार्टी के विनोद बिंद जीते थे। विनोद बिंद अब भदोही सीट से सांसद निर्वाचित हुए हैं। जिसके बाद ये सीट खाली हो गई है। वहीं कटेहरी सीट पर पार्टी के हार का सामना करना पड़ा था। कटेहरी सीट से सपा के लालजी वर्मा जीते थे। जो अब अंबेडकरनगर से सांसद हैं। जिसके चलते ये सीट भी खाली हो गई है। पिछली सीट शेयरिंग के आधार पर अब निषाद पार्टी इन दोनों सीटों पर दावा ठोंक रही है।

वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) दो सीटों मुजफ्फरनगर जिले की मीरापुर सीट और अलीगढ़ की खैर (सुरक्षित) सीट पर दावा ठोंक रही है। मीरापुर सीट से 2022 में आरएलडी के चंदन चौहान जीते थे। चंदन चौहान अब बिजनौर सीट से सांसद हैं। वहीं 2022 में खैर सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे अनूप प्रधान वाल्मीकि अब हाथरस से सांसद हैं।

आरएलडी जहां मीरापुर सीट मौजूदा विधायक के आधार पर मांग रही है। तो वहीं 2022 में खैर सीट सपा-आरएलडी गठबंधन में जयंत के खाते में आई थी। जाट बाहुल्य इस सीट पर तीन बार आएलडी का विधायक पहले चुना जा चुका है, लेकिन यह सीट 2017 से बीजेपी के पास है। लेकिन अब जयंत एनडीए का हिस्सा तो वह इस सीट को वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं।

बीजेपी क्यों नहीं देना चाहती है ये सीटें?

लोकसभा चुनाव में बीजेपी के प्रदर्शन में आई गिरावट के चलते पार्टी इसे एक मौके के तौर पर देख रही है। वह इन सीटों पर चुनाव जीतकर ये मैसेज देने की कोशिश करना चाह रही है कि, उसकी यूपी में अभी भी मजबूत पकड़ है। यूपी में इस चुनाव को योगी आदित्यनाथ के लिए एक टेस्ट के तौर पर देखा जा रहा है। इस उपचुनाव को योगी बनाम अखिलेश के तौर पर देखा जा रहा है। इस उपचुनाव को लेकर बीजेपी संगठन और सरकार दोनों जुटे हुए हैं।

लोकसभा चुनाव में संख्याबल कम होने के बाद से पार्टी पर उसके सहयोगी दल लगातार दवाब बना रहे हैं। जहां निषाद पार्टी के संजय निषाद ने अपने बेटे की हार के पीछे की वजह बीजेपी को बता दिया तो वहीं मोदी कैबिनेट में मंत्री अनुप्रिया पटेल भी भर्तियों में आरक्षण को लेकर चिट्ठी लिखी है। वह भी सरकार पर लगातार दवाब बना रही हैं। ऐसे पार्टी के लिए ये उपचुनाव बेहद ही मुश्किल हो गया है।

इन सीटों पर होना है उप चुनाव

  1. मझवां, - विनोद बिंद -निषाद पार्टी
  2. कटेहरी- लालजी वर्मा- सपा
  3. मीरापुर- चंदन चौहान- आरएलडी
  4. खैर- अनूप प्रधान वाल्मीकि- बीजेपी
  5. करहल- अखिलेश यादव- सपा
  6. मिल्कीपुर- अवधेश प्रसाद-सपा
  7. कुंदरकी- जियाउर्रहमान-सपा
  8. गाजियाबाद- अतुल गर्ग-भाजपा
  9. फूलपुर- प्रवीण कुमार पटेल- बीजेपी
  10. सीसामऊ- इरफान सोलंकी- सपा (केस में सजा सुनाए जाने के बाद विधायकी गई)

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