समाजवादी पार्टी की रार से आगरा में बसपा की बल्ले-बल्ले

समाजवादी पार्टी में चाचा शिवपाल और भतीजे अखिलेश की रार का लाभ, विपक्षी दल बहुजन समाज पार्टी को मिलने वाला है।

आगरा। समाजवादी पार्टी में फैली रार से सबसे बड़ा फायदा होने वाला है, बहुजन समाज पार्टी को। अगर बात उत्तर प्रदेश के आगरा की करें, तो यहां पर बसपा की राह काफी आसान हो जाएगी। जिन सीटों पर बसपा दूसरे स्थान पर रहती हैं, वहां जीत के पूरे समीकरण बसपाइयों के बन जाएंगे। आगरा की नौ में से छह विधानसभाओं पर बसपा का कब्जा है। कयास यह लगाए जा रहे हैं, सपा की इस रार से तीन और सीटों पर बसपा नीला झंडा फहरा सकती है। आगरा की नौ विधानसभा सीटों में से तीन सीट ऐसी हैं, जहां बसपा दूसरे नंबर पर रहती है। इसमें आगरा उत्तर, आगरा दक्षिण और बाह विधानसभा है।

समाजवादी पार्टी की रार से आगरा में बसपा की बल्ले-बल्ले

आगरा उत्तर और दक्षिण पर भाजपा का कब्जा है, जबकि बाह विधानसभा सीट सपा के खाते में हैं। इन तीनों ही सीटों पर यूपी विधानसभा 2012 में बसपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे। राजनीति के जानकार बताते हैं कि यदि सपा का थोड़ा भी वोट बैंक बसपा की ओर चला गया तो बसपा को इन तीनों सीटों पर नीला झंडा फहराने से कोई नहीं रोक सकता है। आगरा दक्षिण से बसपा ने जुल्फिकार अहमद भुट्टो को प्रत्याशी घोषित किया है, इसका मुख्य कारण है कि इस सीट पर मुस्लिम वोटर तकरीबन 80 हजार है। पिछले चुनाव में बसपा प्रत्याशी जुल्फिकार अहमद भुट्टो ने इस सीट से 51 हजार वोट प्राप्त किए थे, वहीं भाजपा के योगेन्द्र उपाध्याय ने 74 हजार 324 वोट प्राप्त कर विजय हासिल की। इस हार का कारण बसपाई मानते हैं, मुस्लिम वोट का दो भागों में बंटना। यहां से मुस्लिमों के वोट सपा को भी जाते हैं।
बाह विधानसभा की बात करें, तो 2012 के विधानसभा में सपा के राजा महेन्द्र अरिदमन सिंह को बसपा प्रत्याशी मधुसूदन शर्मा ने अच्छी टक्कर दी थी। सपा को इस सीट पर 99 हजार 379 वोट मिले, तो वहीं बसपा प्रत्याशी ने इस सीट पर 72 हजार 908 वोट प्राप्त किये। जीत का अंतर बहुत अधिक नहीं था, लेकिन सपा यदि दो खेमों में बंटती है, तो इस सीट पर बसपा अपना कब्जा कर सकती है। आगरा उत्तर सीट की बात करें, तो बसपा का सपना है इस सीट पर जीतने का। यहां लगातार चार बार से भाजपा प्रत्याशी जगन प्रसाद गर्ग कमल खिलाते आ रहे हैं। बसपा प्रत्याशी कांटे की टक्कर देते हैं, लेकिन कुछ अंतर से हार जाते हैं। इसका कारण यह भी है, कि इस सीट पर मुस्लिम वोट सपा और बसपा में बंट जाता है, यदि मुस्लिम वोट पूरी तरह बसपा को मिल गया, तो इस सीट पर बसपा अपनी जीत पक्की कर लेगी। ये भी पढ़ें: मुलायम ने सपा के उम्मीदवारों को 31 दिसंबर को बुलाया बैठक के लिए

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