UP SIR News Update: यूपी में 25 दिसंबर तक बढ़ेगी SIR की डेडलाइन, 14 दिनों में ये 12 दस्तावेज बचाएंगे आपका वोट
UP SIR Deadline Extension News Hindi: उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को मिली राहत! मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने भारत निर्वाचन आयोग से 14 दिन का अतिरिक्त समय मांगा है, ताकि 2.91 करोड़ संदिग्ध वोटरों की जांच पूरी हो सके। अगर सब ठीक रहा, तो डेडलाइन 25 दिसंबर तक बढ़ जाएगी। ये एक्सटेंशन मतदाताओं के लिए वरदान साबित होगी, क्योंकि अभी तक 99.14% डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है, लेकिन लाखों फॉर्म जमा नहीं हुए।
SIR का मकसद वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाना है। नए वोटर जुड़ें, पुराने नाम सही हों। आइए, इस अपडेट, संभावित कटौती और 12 जरूरी दस्तावेजों को समझते हैं। ये प्रक्रिया न सिर्फ लोकतंत्र को मजबूत करेगी, बल्कि हर योग्य मतदाता को वोट का हक दिलाएगी।

UP SIR 14-Day Grace Period: 14 दिन का ग्रेस पीरियड, क्यों जरूरी था ये कदम?
उत्तर प्रदेश में SIR अभियान 4 नवंबर 2025 से चल रहा है, जो मूल रूप से 11 दिसंबर तक था। लेकिन CEO नवदीप रिणवा ने 25 दिसंबर तक का समय मांगा है। सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है- आज या कल आदेश जारी हो सकता है। पहले 1 दिसंबर को आयोग ने 7 दिन का एक्सटेंशन दिया था, लेकिन यूपी की विशाल आबादी (15.44 करोड़ वोटर) और जटिलताओं को देखते हुए 14 दिन और बढ़ाना जरूरी था।
UP SIR Form Fill New Guidline: नई टाइमलाइन (संभावित):
- एन्यूमरेशन पीरियड (फॉर्म जमा): मूल 11 दिसंबर से बढ़कर 25 दिसंबर 2025।
- ड्राफ्ट रोल पब्लिकेशन: 16 दिसंबर से 30 दिसंबर तक (शिफ्ट)।
- क्लेम्स एंड ऑब्जेक्शंस: 16 दिसंबर 2025 से 7 फरवरी 2026।
- फाइनल रोल पब्लिकेशन: 14 फरवरी 2026।
रिणवा ने कहा, '99% काम पूरा हो चुका है। बाकी 5 कैटेगरी के फॉर्म (मृत, शिफ्टेड, डुप्लीकेट, अनुपस्थित, सिग्नेचर न मिले) जमा करने का मौका मिलेगा।' ये एक्सटेंशन BLOs (बूथ लेवल ऑफिसर्स) को राहत देगा, जो पहले स्ट्रेस में थे। डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने इसे 'मतदाताओं के लिए आसानी' बताया।
2.91 करोड़ वोटरों पर नजर: नाम कटने का खतरा, कैसे बचेगा आपका वोट?
यूपी की वोटर लिस्ट में 15.44 करोड़ नाम हैं, जिनमें से 12.40 करोड़ (99.14%) डिजिटाइज हो चुके। लेकिन 2.91 करोड़ संदिग्ध नाम कट सकते हैं। ये लिस्ट राजनीतिक दलों के BLA (बूथ लेवल एजेंट्स) को भेजी जाएगी और जिला वेबसाइट्स पर अपलोड होगी। अगर आपका नाम इसमें है, तो फॉर्म भरकर अपील करें- नाम जुड़ जाएगा।
ब्रेकडाउन (2.91 करोड़ में):
- मृत वोटर: 46 लाख- जिनकी मौत हो चुकी, लेकिन नाम लिस्ट में।
- शिफ्टेड: 1.27 करोड़- स्थायी रूप से दूसरे जगह चले गए।
- डुप्लीकेट: 23.70 लाख- एक ही व्यक्ति के दो नाम।
- अनुपस्थित: 84.73 लाख- BLO को घर पर नहीं मिले।
- अन्य (सिग्नेचर न मिले): 9.57 लाख- फॉर्म पर हस्ताक्षर न होने से।
रिणवा ने जोर दिया, 'ये नाम कटना फाइनल नहीं। अपील पर जुड़ सकते हैं।' ड्राफ्ट लिस्ट आने पर चेक करें- NVSP पोर्टल या वोटर हेल्पलाइन ऐप से।
What Is SIR: क्या है एसआईआर? प्रक्रिया और मकसद- लोकतंत्र की मजबूती का सफर
SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) चुनाव आयोग की पहल है, जो वोटर लिस्ट को अपडेट रखती है। 1951 से 2004 तक नियमित होती थी, लेकिन 21 सालों से पेंडिंग। अब 12 राज्यों (यूपी सहित) में चल रही, जहां 51 करोड़ वोटर प्रभावित।
मकसद:
- नए 18+ वोटर जोड़ना।
- मृत/शिफ्टेड नाम हटाना।
- डुप्लीकेट/गलतियां सुधारना।
- विदेशी/अयोग्य नाम साफ करना।
SIR कैसे होता है?: BLO घर-घर जाकर फॉर्म 4 भरवाते। राजनीतिक दलों के BLA वेरिफाई करते। पहले बिहार में हुआ- 7.42 करोड़ फाइनल वोटर बने। यूपी में 5.33 लाख BLO और 7 लाख BLA लगे।
वोटर को क्या करना?: BLO/BLA से फॉर्म लें, डिटेल्स मैच करें। दो जगह नाम हैं, तो एक से कटवाएं। नाम न हो तो, फॉर्म 6 भरें। ऑनलाइन: NVSP.gov.in या वोटर हेल्पलाइन ऐप।
UP SIR Important 12 Documents List: 12 दस्तावेज जो बचाएंगे आपका वोट, पहचान साबित करने के लिए ये काफी
SIR में वोटर वेरिफिकेशन के लिए 12 दस्तावेजों में से कोई एक दिखाना जरूरी। ये सरल हैं, घर में ही मिल जाएंगे।
- पासपोर्ट।
- वन अधिकार प्रमाणपत्र।
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र।
- आधार कार्ड।
- मान्यता प्राप्त बोर्ड/विश्वविद्यालय द्वारा जारी मैट्रिकुलेशन/शैक्षणिक प्रमाणपत्र।
- सक्षम राज्य प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाणपत्र।
- 1 जुलाई 1987 से पहले भारत सरकार/स्थानीय प्राधिकरण/बैंक/डाकघर/LIC/PSU द्वारा जारी कोई भी पहचान पत्र/प्रमाणपत्र/दस्तावेज।
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी OBC/SC/ST या कोई जाति प्रमाणपत्र।
- राष्ट्रीय नागरिक पंजी (जहां लागू हो)।
- केंद्र/राज्य सरकार या PSU के नियमित कर्मचारी/पेंशनभोगी को जारी पहचान पत्र / पेंशन भुगतान आदेश।
- सरकार द्वारा जारी कोई भूमि/घर आवंटन प्रमाण पत्र।
- राज्य/स्थानीय प्राधिकरण द्वारा तैयार परिवार रजिस्टर।
Tips: आधार सबसे आसान है, लेकिन अगर न हो तो अन्य दिखाएं। फॉर्म भरते समय फोटो, सिग्नेचर और डिटेल्स मैच करें।
SIR का फायदा: पारदर्शी वोटिंग, मजबूत लोकतंत्र- हर वोट गिनती में आएगा
SIR से वोटर लिस्ट सटीक बनेगी, जिससे चुनाव निष्पक्ष होंगे। यूपी जैसे बड़े राज्य में ये अभियान 2026 विधानसभा चुनावों के लिए क्रांतिकारी साबित होगा। विपक्ष ने पहले जल्दबाजी का आरोप लगाया, लेकिन एक्सटेंशन से सबको फायदा। CEO रिणवा ने अपील की, 'मतदाता सक्रिय रहें- अपना वोट सुरक्षित रखें।'
ये प्रक्रिया न सिर्फ नाम जोड़-हटाएगी, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत बनाएगी। क्या आपने अपना SIR फॉर्म चेक किया? कमेंट्स में बताएं। अपडेट्स के लिए बने रहें।
ये भी पढ़ें- 'SIR' में कट गया इस दिग्गज BJP सांसद के माता-पिता का नाम, फिर भी लोकसभा में क्यों कहा- 'मुझे खुशी है'?












Click it and Unblock the Notifications