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यूपी राज्यसभा चुनाव: अखिलेश यादव को उल्टा पड़ गया धोबीपाट दांव

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यूपी राज्यसभा चुनाव: अखिलेश यादव को उल्टा पड़ गया धोबीपाट दांव

लखनऊ। यूपी में राज्य सभा की दसवीं सीट पर छाए बदल छट गये। मौसम साफ़ होने के साथ यह सीट बसपा के रामजी गौतम के नाम दर्ज हो गई। मतलब यूपी में अब राज्यसभा के लिए मतदान नहीं होगा। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अंतिम क्षणों में एक और उम्मीदवार उतार और बसपा में बगावत करा धोबीपाट दांव लगाने की कोशिश की। लेकिन चाणक्य नीति के आगे दांव फेल हो गया। जैसे ही सपा को लगा कि बसपा और बीजेपी में दसवीं सीट को लेकर कुछ खिचड़ी पक गई है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने देर किये बिना अपने पिता मुलायम सिंह यादव का पसंदीदा दांव धोबीपाट चला। उनके दांव का अंदाज तभी लग गया था जब नामांकन के अंतिम दिन सपा समर्थित उम्मीदवार प्रकाश बजाज ने भी पर्चा भर दिया। अखिलेश यादव के दांव से बसपा में बेचैनी बढ़ गई। सोलह में से सात विधायकों ने बहन मायावती के खिलाफ बगावत कर दी। इनमें पांच बसपा प्रत्याशी रामजी गौतम के प्रस्तावक भी थे। लेकिन इसके बाद पासा पलट गया। बसपा प्रत्याशी का नामांकन वैध घोषित कर दिया गया। सपा समर्थित प्रकाश बजाज के प्रस्तावकों में एक नाम नवाब शाह का था। इस नाम के कोई विधायक नहीं हैं। इस आधार पर प्रकाश बजाज का परचा ख़ारिज हो गया। सपा का कहना है कि बेईमानी हुई है। विधायक के दस्तखत शीन हैं लेकिन नाम गलत लिख दिया गया।

विधान सभा उपचुनावों के पहले बगावत और उठापटक का असर सपा और बसपा, दोनों पर पड़ेगा। जबकि बीजेपी के दोनों हाथों में लड्डू है।

प्रकाश बजाज का पर्चा ख़ारिज न होता तो चुनाव होता

प्रकाश बजाज का पर्चा ख़ारिज न होता तो चुनाव होता

इसके पहले प्रदेश से राज्यसभा की दस सीटों के लिए 11 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन दाखिल किए। इनमें भाजपा के आठ और सपा के एक प्रत्यशी को लेकर कोई असमंजस नही था। लेकिन जैसे ही दसवीं सीट के लिए बसपा के प्रत्याशी ने पर्चा भरा, उसके मुकाबले में सपा समर्थित निर्दलीय प्रकाश बजाज के भी नामांकन कर दिया। इससे दसवीं सीट फंस गई थी। अगर सपा समर्थित प्रकाश बजाज का पर्चा ख़ारिज न होता तो चुनाव होता। बसपा में बगावत की स्थिति में फायदा सपा को मिलता।

सूत्र के अनुसार बसपा के बागी विधायकों ने 26 अक्टूबर को ही अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। बसपा उम्मीदवार रामजी गौतम के नामांकन दाखिल किए जाने के बाद विधायकों ने अखिलेश से संपर्क साधा था। मुलाकात की जानकारी गोपनीय रखी गई। अखिलेश यादव ने नामांकन के आखिरी डेट तक पूरी प्रक्रिया का इंतजार किया और सपा के 10 विधायकों के प्रस्तावों के साथ वाराणसी के रहने वाले प्रकाश बजाज का निर्दलीय नामांकन करवा दिया। वहीं, बसपा के बागी विधायकों ने मंगलवार को ही अपना एफिडेविट बनवा लिया था।

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बीच में अटकलें लगी कि सपा और बसपा दोनों का पर्चा ख़ारिज हो सकता है। इस स्थिति में बीजेपी के दोनों हाथों में लड्डू होता। लड्डू तो अभी भी है। कहा जा रहा है की दसवीं सीट के लिए पहले ही बीजेपी और बसपा में अन्डरस्टैंडिंग बन गई थी। बीजेपी नहीं चाहती थी कि राज्यसभा में सपा को एक सीट ज्यादा मिले।

मंगलवार को नामांकन दाखिल करने के अंतिम समय दोपहर तीन बजे से ठीक पांच मिनट पहले सपा समर्थित वाराणसी के एडवोकेट प्रकाश बजाज ने अपना पर्चा दाखिल कर राज्यसभा चुनाव में गर्मी पैदा कर दी थी। मंगलवार दोपहर 2.50 बजे तक दस सीटों पर दस ही उम्मीदवार थे, लेकिन 2.55 बजे सपा के दो विधायक वाराणसी के प्रकाश बजाज को लेकर नामांकन दाखिल करने सेंट्रल हॉल पहुंचे तो भाजपा पदाधिकारियों और अधिकारियों में हलचल शुरू हो गई।

काम न आई बसपा विधायकों की बगावत

काम न आई बसपा विधायकों की बगावत

बुधवार को नामांकन प्रपत्रों की जांच से पहले बसपा के सात विधायकों ने बगावत कर दी। इनमें पांच विधायकों ने बसपा उम्मीदवार रामजी गौतम ने अपना प्रस्ताव वापस ले लिया। बागी विधायकों में श्रावस्ती से विधायक असलम राइनी भी शामिल हैं। उन्होंने बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा पर देख लेने व जान से मरवाने की धमकी देने का आरोप लगाया है। प्रस्ताव वापस लेने के बाद विधायकों ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। विधायक असलम राइनी ने कहा कि हम 5 विधायकों ने एफिडेविट दिया है कि बसपा प्रत्याशी के नामांकन में हमारे हस्ताक्षर और प्रमाणपत्र नहीं थे। रामजी गौतम ने जो नामांकन दाखिल किया गया, वह पूर्णतया गलत है। विधायक असलम अली ने कहा कि हमारा नाम प्रस्तावकों में शामिल किया गया था। लेकिन, जब हमें पता चला कि बसपा कैंडिडेट को भाजपा के सपोर्ट से राज्यसभा भेजने की जुगत मायावती लगा रही हैं, तो हमने विद्रोह किया। हम भाजपा के विरोधी हैं। हमें इसलिए वोट मिला। अगर यह कैंडिडेट भाजपा के सपोर्ट से राज्यसभा जाता है तो हम क्षेत्र में जनता को क्या मुंह दिखाते।

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सारे प्रस्तावक विधायक विधानसभा में मौजूद थे

सारे प्रस्तावक विधायक विधानसभा में मौजूद थे

दूसरी तरफ बसपा विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा का कहना था कि इन विधायकों के हस्ताक्षर न करने की बात झूठी है। सारे प्रस्तावक विधायक विधानसभा में मौजूद थे। विधानसभा के सीसीटीवी के जरिए चेक किया जाए, सूचना विभाग के फोटोग्राफर की तस्वीरें देखी जाएँ। इन विधायकों की मौजूदगी में किया गया था नामांकन। अंततः नामांकन वैध पाया गया। दूसरी तरफ सपा समर्थित प्रकाश बजाज के एक प्रस्तावक का नाम गलत पाया गया और परचा ख़ारिज हो गया।

प्रदेश के दस राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। घोषित कार्यक्रम के अनुसार नामांकन 27 अक्टूबर तक भरे गए। 28 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच की गई। नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 2 नवंबर है। इस लिए अब 2 नवम्बर के बाद प्रत्याशियों के चुने जाने की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

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English summary
UP Rajya Sabha elections 2020: Akhilesh Yadav missed before Mayawati
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