UP Politics: यूपी से सियासी पारी शुरू करेंगे नीतीश? फूलपुर-प्रतापगढ़ पर क्यों टिकी JDU की निगाहें
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार क्या मोदी की तरह यूपी से अपनी सियासी पारी का आगाज 2024 में करेंगे। हालांकि अभी कुछ तय नहीं है लेकिन अटकलों ने चर्चाओं का बाजार जरूर गरम कर दिया है।
Loksabha Election 2024: देश में अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर बिहार के सीएम नीतीश कुमार के यूपी से लोकसभा चुनाव लड़ने की अटकलों ने सियासी पारे को गरम कर दिया है। ऐसी अटकलें हैं कि नीतीश कुमार इलाहाबाद की फूलपुर सीट से चुनाव लड़ सकते हैं जहां से कभी पूर्व पीएम पंडित जवाहर नेहरू सांसद रह चुके हैं। हालांकि नीतीश कुमार को लेकर लग रही इन अटकलों पर बीजेपी भी चुटकी ले रही है।

यूपी में जेडीयू की हालत काफी पतली
जेडीयू के थिंकटैंक का मानना है कि अगर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फूलपुर से लोकसभा चुनाव लड़ते हैं तो इससे कुर्मी और यादव वोट भाजपा के खिलाफ विपक्षी गठबंधन के पक्ष में एक साथ आ जाएंगे। हालांकि जेडीयू हालांकि अभी खुद यूपी में अपनी पहचान की संकट से जूझ रही है। पिछले लोकसभा चुनावों पर नजर डालें तो 2019 के आम चुनावों में 0.01% वोट मिले थे।
ऐतिहासिक लोकसभा सीट है फूलपुर
फूलपुर को एक ऐतिहासिक लोकसभा सीट मानी जाती है क्योंकि यहां से पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और वीपी सिंह ने प्रतिनिधित्व किया था। यह वह सीट भी है जहां से समाजवादी विचारक राम मनोहर लोहिया ने चुनाव लड़ा था। पार्टी के एक नेता ने कहा कि नीतीश जी राम मनोहर लोहिया की विचारधारा के समर्थक हैं जिन्होंने 1962 में फूलपुर से चुनाव लड़ा था। इसलिए, ओबीसी बहुल फूलपुर उनके लिए आदर्श सीट साबित हो सकती है।
यादव-कुर्मी गठजोड़ बनाना चाहती है जेडीयू
जदयू के एक वरिष्ठ नेता ने कहते हैं कि, यूपी में बड़ी संख्या में गैर-यादव ओबीसी, जो पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ थे, पिछले 10 वर्षों में भाजपा में चले गए हैं। 2022 के विधानसभा चुनावों से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ओबीसी को एक साथ लाने के प्रयास शुरू किए लेकिन विधानसभा चुनावों में उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली। अगर नीतीश कुमार फूलपुर से चुनाव लड़ते हैं तो वह कुर्मी और यादव मतदाताओं को एक साथ ला सकते हैं और भाजपा को हराने में कामयाब हो सकते हैं।
सीट बंटवारें के समय फूलपुर और प्रतापगढ़ सीट मांगेगी जेडीयू
नीतीश कुमार कुर्मी जाति से हैं। इस समुदाय का वोट पूर्वी और मध्य यूपी के कई निर्वाचन क्षेत्रों में निर्णायक है। जेडीयू के नेता कहते हैं कि जेडी (यू) और एसपी के बीच गठबंधन लगभग तय है। जब सीट बंटवारे पर चर्चा शुरू होगी तो जद (यू) फूलपुर और प्रतापगढ़ की दो सीटें उसके लिए छोड़ने के लिए सपा नेतृत्व से बात करेगा। इससे विपक्षी गठबंधन के समर्थन में कुर्मी मतदाता एकजुट होंगे।
जेडीयू के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता के सी त्यागी कहते हैं कि,
नीतीश जी पर पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से लोकसभा चुनाव लड़ने का दबाव है। लेकिन नीतीश जी ने अभी तक किसी खास सीट से चुनाव लड़ने का मन नहीं बनाया है। जहां तक फूलपुर की बात है तो सपा और अखिलेश यादव को शामिल किए बिना कुछ भी तय नहीं होगा। जदयू और सपा यूपी में भाजपा के खिलाफ एक मजबूत गठबंधन बना सकते हैं।
यूपी के इन जिलों में हैं कुर्मी समुदाय के वोटर
दरसअल, कुर्मी समुदाय पूर्वी और मध्य यूपी में कौशांबी, प्रतापगढ़, फ़तेहपुर, बस्ती, गोंडा, बहराईच, मिर्ज़ापुर, वाराणसी, चंदौली, प्रयागराज, भदोही और सोनभद्र में चुनावी रूप से महत्वपूर्ण हैं। जहां प्रतापगढ़ में ब्राह्मणों और ठाकुरों का वर्चस्व है वहीं पटेल (कुर्मी) मतदाताओं का तीसरा सबसे बड़ा समूह है। प्रयागराज में भी कुर्मियों का दबदबा है। फूलपुर की मौजूदा सांसद बीजेपी की केशरी देवी पटेल भी कुर्मी हैं।
यूपी में जद (यू) के एक नेता ने कहा कि,
यूपी इकाई ने सुझाव दिया कि नीतीश जी को मिर्ज़ापुर, फूलपुर या अंबेडकर नगर की तीन सीटों में से किसी एक पर चुनाव लड़ना चाहिए। हमें केंद्रीय नेतृत्व से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है, लेकिन हमने यूपी से नीतीश कुमार की उम्मीदवारी की वकालत की है।
अनुप्रिया पटेल और स्वतंत्रदेव सिंह हैं इस समुदाय के बड़े नेता
अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल ने भी 2004 में यहां चुनाव लड़ा था लेकिन तब अतीक अहमद ने सपा उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। फूलपुर में मुस्लिम, यादव और अन्य ओबीसी जैसे मौर्य, निषाद और राजभर भी महत्वपूर्ण संख्या में हैं। वहीं सोनेलाल के जाने के बाद अब यूपी में अनुप्रिया पटेल, स्वतंत्रदेव सिंह के रूप में बीजेपी के पास बड़े कुर्मी नेता मौजूद हैं। हालांकि परिवार में विवाद होने के बाद अनुप्रिया पटेल की बहन पल्लवी पटेल ने यूपी के कद्दावर ओबीसी नेता और वर्तमान में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को चुनाव हरा दिया था।
यूपी के जेडीयू प्रभारी ने दी थी अटकलों को हवा
अटकलें तब शुरू हुईं जब बिहार के मंत्री और जेडीयू के यूपी प्रभारी श्रवण कुमार ने कहा कि, ''ऐसी "मांगें" थीं कि पार्टी प्रमुख पड़ोसी राज्य से चुनाव मैदान में उतरें। मैं हाल ही में जौनपुर में था और वहां बहुत मजबूत मांग थी कि माननीय मुख्यमंत्री यूपी से लोकसभा चुनाव लड़ने पर विचार करें। सिर्फ फूलपुर नहीं है। मेरी हाल की यूपी यात्रा के दौरान एहसास हुआ कि फ़तेहपुर और प्रतापगढ़ समेत कई अन्य सीटें हैं जहां हमारी पार्टी चाहती है कि सीएम नीतीश कुमार चुनाव लड़ें।"
इधर,सपा के मुख्य प्रवक्ता राजीव राय ने कहा,
अब तक तो जद (यू) और सपा सहित विपक्षी दलों ने भाजपा को हराने के लिए एक साथ आने का सैद्धांतिक निर्णय लिया है। लेकिन यूपी में गठबंधन को लेकर अभी कुछ तय नहीं हुआ है।












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