UP Mafiya Mukhtar Ansari: संजीव माहेश्वरी जीवा ही नहीं 5 साल में मुख्तार गैंग के कई बड़े शूटर हुए धराशायी

Sanjeev Maheshwari Jeeva: बाहुलबली माफिया मुख्तार अंसारी के करीबी और खास शूटर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की अदालत परिसर में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई। संजीव से पहले मुख्तार को कई बड़े झटके लग चुके हैं।

योगी आदित्यनाथ

Sanjeev Maheshwari Jeeva: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को कोर्ट परिसर में ही संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस हत्या के बाद कई सवाल खड़े हुए हैं। दरअसल, माफिया से नेता बने मुख्तार अंसारी के गिरोह के चार सदस्य और करीबी सहयोगी पिछले पांच वर्षों में न्यायिक हिरासत में मारे गए हैं। सभी हत्याएं अजीब परिस्थितियों में हुईं हैं।

यूपी में पुलिस हिरासत में लगातार हो रही घटनाएं

लखनऊ की एक अदालत में बुधवार को गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की हत्या कर दी गई। इससे पहले 15 अप्रैल को प्रयागराज के एक अस्पताल में रूटीन मेडिकल चेकअप के लिए ले जाते समय माफियाओं भाइयों अतीक अहमद और खालिद अज़ीम उर्फ अशरफ की हत्या भी पुलिस हिरासत में हुई थी। सवाल उठ रहे हैं कि क्या इन घटनाओं में पुलिस और जेल प्रशासन की ओर से सुरक्षा में चूक हुई या इन हत्याओं के पीछे कोई बड़ी साजिश है।

इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच की मांग

हालांकि राजनीतिक दलों ने भी इन घटनाओं पर सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के वरिष्ठ वकील एस प्रेमचंद ने कहा कि हत्याओं के पीछे की मंशा की पुष्टि के लिए ऐसी घटनाओं की विस्तृत और निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की हर हत्या के बाद जांच समितियां बनाई जाती हैं, लेकिन अज्ञात कारणों से कुछ भी ठोस नहीं निकला।

संजीव जीवा के अलावा लगे कई झटके

लखनऊ की एक अदालत के अंदर संजीव माहेश्वरी की हत्या के अलावा, एक अन्य गैंगस्टर प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ ​​मुन्ना बजरंगी की गैंगस्टर सुनील राठी ने अंदर गोली मार दी थी। बागपत जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे राठी ने बाद में बजरंगी की हत्या करने की बात कबूल की थी। लेकिन पुलिस हत्या के पीछे उसके सटीक मकसद का पता लगाने में विफल रही थी।

बागपत में हुई थी बजरंगी की हत्या

बजरंगी को 8 जुलाई 2018 को घटना के कुछ घंटे पहले ही झांसी जेल से बागपत जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था। इसके अलावा, जेल प्रशासन की भूमिका भी जांच के दायरे में थी कि बंदूक जेल के अंदर कैसे पहुंची।

चित्रकूट गैंगवार में मारे गए मेराजुद्दीन व मुकीम काला

इसके अलावा 15 मई, 2021 को चित्रकूट जेल के अंदर मुख़्तार अंसारी के दो अन्य सहयोगियों मेराजुद्दन और मुकीम काला को एक अन्य गैंगस्टर अंशु दीक्षित ने गोली मार दी थी। दीक्षित ने जेल के अंदर पिस्टल कैसे हासिल की। हत्या के पीछे उसका मकसद कभी पता नहीं चला क्योंकि वह खुद इस घटना में मारा गया था।

प्रयागराज में अतीक-अशरफ की हुई थी सरेआम हत्या

भारी हथियारों से लैस पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में अतीक अहमद और खालिद अजीम उर्फ अशरफ को भी गोली मार दी गई। तीन हमलावरों लवकेश तिवारी, सनी सिंह और अरुण मौर्य को मौके से गिरफ्तार किया गया और उन्होंने अपराध की दुनिया में खुद को स्थापित करने के इरादे से अपराध करने की बात कबूल की। इन घटनाओं ने यूपी ही नहीं देशभर में काफी सुर्खियां बटोरीं।

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