UP Nikay Chunav: यूपी में कभी भी बज सकता है निकाय चुनाव का बिगुल, SC ने दी हरी झंडी
उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव का बिगुल कभी भी बज सकता है। यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी रिजर्वेशन को लेकर अपनी रिपोर्ट सबमिट की थी। इसके बाद अदालत ने यूपी सरकार को जल्द से जल्द चुनाव कराने का निर्देश दिया है।

UP Nagar Nikay Chunav 2023: उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव का बिगुल अब कभी भी बज सकता है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने सोमवारको उत्तर प्रदेश में आगामी शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण की अनुमति दे दी और राज्य चुनाव आयोग को दो दिनों के भीतर इसको लेकर अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया है।
यूपी में शुरू होगा निकाय चुनाव का शोर
सर्वोच्च अदालत के इस फैसले के साथ ही अब यूपी में निकाय चुनाव का शोर शुरू हो जाएगा और सभी राजनीतिक दल पूरे दम खम के साथ इमसें जुट जाएंगे। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने यूपी नगर निकाय चुनाव में ओबीसी को आरक्षण के मुद्दे के संबंध में एक रिपोर्ट शीर्ष अदालत को सौंपी थी, जिसके बाद इस मामले को देखने के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की गई थी।
हाईकोर्ट ने निकाय चुनाव की अधिसूचना को रद्द कर दिया था
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पिछले साल दिसंबर में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों पर राज्य सरकार की मसौदा अधिसूचना को रद्द कर दिया था और ओबीसी के लिए आरक्षण के बिना चुनाव कराने का आदेश दिया था, जिसके बाद पैनल का गठन किया गया था। अदालत ने कहा था कि राज्य सरकार स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित "ट्रिपल टेस्ट" औपचारिकता को पूरा करने में विफल रही है।
योगी सरकार ने किया था आयोग का गठन
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के बाद, सीएम आदित्यनाथ ने जोर देकर कहा था कि राज्य के शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव ओबीसी के लिए आरक्षण के बिना नहीं होंगे और आयोग की स्थापना की थी। यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया था। यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मुताबिक, राज्य सरकार आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।












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