UP News: बुंदेलखंड के लिए गेम चेंजर साबित होगा योगी सरकार का ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार यूपी में बिजली व्यवस्था और बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है। सरकार का मानना है कि इससे लोगों को को आने वाले समय में काफी फायदा होगा।

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश सरकार ने अब यूपी में ग्रीन ऊर्जा कारिडोर विकसित करने पर फोकस किया है। राज्य सरकार का दावा है कि इस योजना से बुंदेलखंड को काफी फायदा होगा। दावा किया जा रहा है कि सरकार का ये प्रोजेक्ट बुंदलेखंड के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। सरकार का दावा है कि इस योजना पर चार हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जाएंगे।
योगी सरकार का सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर फोकस
कैबिनेट ने बुधवार को राज्य के बुंदेलखंड क्षेत्र में विभिन्न सौर ऊर्जा परियोजनाओं से उत्पन्न होने वाली 4,000 मेगावाट बिजली से बिजली निकालने के लिए ग्रीन ऊर्जा कॉरिडोर परियोजना को मंजूरी दी थी। अधिकारियों की माने तो विभिन्न सौर ऊर्जा परियोजनाओं से बिजली निकालने के लिए 4,786 करोड़ रुपये की लागत से 2,172 किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन स्थापित करने को हरी झंडी दी गई।
बुंदेलखंड के तीन जिलों में बनेगी बिजली
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार परियोजना लागत का 20% योगदान देगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लागत का 33% वहन करेगी जबकि एक जर्मन कंपनी शेष 47% धनराशि अपनी ओर से लगाएगी। बुंदेलखंड क्षेत्र में झांसी, ललितपुर और जालौन में बनने वाले सौर पार्कों से बिजली का उत्पादन हो सकेगा। इस योजना में 765 केवी का बिजली सबस्टेशन, 400 केवी के तीन सबस्टेशन, 220 केवी के 10 सबस्टेशन और 132 केवी के छह सबस्टेशन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इसे दो से तीन साल में लागू किया जाएगा।
आप्टिकल फाइबर लाइनें बिछाने पर जोर
कैबिनेट ने ऑप्टिकल फाइबर लाइन के माध्यम से राज्य स्तरीय डेटा सेंटर के साथ और अधिक बिजली उप-स्टेशनों को जोड़ने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। शर्मा ने कहा कि 10,000 किमी ऑप्टिकल फाइबर लाइन के माध्यम से 125 केवी सबस्टेशन को डेटा सेंटर से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि 132 केवी उप-स्टेशनों को डेटा सेंटर से जोड़ने के लिए 6,636 किलोमीटर लंबी और ऑप्टिकल फाइबर लाइनें बिछाई जाएंगी।
ग्रीन कॉरिडोर योजना में तीन प्रतिशत योगदान देगी सरकार
केंद्र सरकार 359 करोड़ की परियोजना में 151 करोड़ की सब्सिडी प्रदान करेगी जबकि राज्य सरकार परियोजना लागत का 3% योगदान देगी। शेष राशि की व्यवस्था ऋण के माध्यम से की जाएगी। इससे डेटा के आसान प्रवाह में मदद मिलेगी और डेटा के प्रवाह के बारे में रिकॉर्ड होगा। राज्य सरकार ने पिछले एक साल में 260 करोड़ रुपये कमाने के लिए उपलब्ध क्षमता का उपयोग करने के लिए दूरसंचार कंपनियों के साथ अनुबंध पर काम किया है। उन्होंने कहा कि इसे पहले ही 69 करोड़ की राशि मिल चुकी है।
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