UP News: जानिए क्या है Sambhav Abhiyan जिसके जरिए कुपोषण खत्म करने में जुटी योगी सरकार
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने यूपी से कुपोषण को समाप्त करने के लिए एक अभियान छेड़ा है। इसको संभव अभियान का नाम दिया गया हे। इसको संभव अभियान नाम दिया गया है।
Chief Minister Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश से कुपोषण को खत्म करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने इस साल जून में राज्य भर में संभव अभियान (Sambhav Abhiyan) चलाया जा रहा है। अभियान के तहत करीब 2.5 लाख कुपोषित बच्चों को इलाज मुहैया कराया जा रहा है ताकि वे सामान्य बच्चों की तरह विकसित हो सकें।

यूपी से कुपोषण खत्म करने की कवायद में सरकार
अधिकारियों की माने तो हालांकि इन सभी बच्चों की प्रगति रिपोर्ट का आकलन अगले माह किया जाएगा। 2021 से सरकार हर साल कुपोषित बच्चों की पहचान के लिए 'संभव अभियान' चला रही है। इस अभियान के सकारात्मक परिणाम मिले हैं। आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष शून्य से पांच वर्ष तक के 2,48,728 लाख गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान की गई है।
योगी सरकार लगातार करवा रही बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण
इन बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आयरन, फोलिक एसिड, मल्टीविटामिन और कैल्शियम की खुराक उनकी स्वास्थ्य स्थितियों के आधार पर इनका टीकाकरण कराया जा रहा है। विशेष रूप से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हर 15 दिनों में इन चिन्हित बच्चों के घरों का दौरा कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जांच कर रही हैं।
एक सितंबर से शुरू हुआ है राष्ट्रीय पोषण माह
शासन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि,
अब तक 16,645 बच्चों को उनकी जरूरतों के आधार पर पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) में भेजा गया है, जबकि लगभग 63,148 और बच्चों को एनआरसी में भेजा जाना बाकी है। राष्ट्रीय पोषण माह एक सितंबर से शुरू हुआ है। इस माह के दौरान यह आकलन किया जाएगा कि इनमें से कितने चिन्हित बच्चे स्वस्थ हो गए हैं।
अधिकारियों की माने तो अक्टूबर में पूरे अभियान का मूल्यांकन किया जाएगा। दिसंबर में बच्चों का वजन फिर से मापा जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनके पोषण स्तर में कोई बदलाव आया है या नहीं। प्रदर्शन करने वाले जिलों में, बिजनौर पहले स्थान पर है जबकि उन्नाव, मुरादाबाद, वाराणसी और जौनपुर क्रमशः दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें स्थान पर रहे।
डायटिशिएन विशेषज्ञ प्रीति यादव कहती हैं,
अगर बच्चों का वजन और लंबाई एक निश्चित अनुपात में नहीं है तो उन्हें कुपोषित माना जाता है। इसके अतिरिक्त, यदि किसी बच्चे के छह माह तक के दोनों पैरों में सूजन है, तो उन्हें भी कुपोषित की श्रेणी में रखा जाएगा। बच्चे को कुपोषण से बचाने के लिए गर्भावस्था के दौरान मां के पोषण पर ध्यान देना होगा और जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू कराना सुनिश्चित करना होगा।
यादव बताती हैं कि इसके अतिरिक्त, बच्चे को पहले छह महीनों तक केवल मां का दूध ही पिलाना चाहिए और किसी भी अन्य भोजन या पेय से परहेज करना चाहिए। इसके अलावा, छह महीने के बाद मां के दूध के साथ पौष्टिक पूरक आहार भी शामिल करना चाहिए।












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