Sambhal: क्या झूठा है सपा सांसद रामगोपाल यादव का बयान? खग़्गू सराय के रहने वाले ने किया चौंकाने वाला खुलासा
Sambhal Latest News In Hindi Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश का संभल जिला इन दिनों चर्चा में है। खग़्गू सराय में आए दिन मंदिरों के मिलने का क्रम जारी है। मंगलवार को भी कई दशकों से बंद राधा कृष्ण मंदिर का ताला खोला गया। खग़्गू सराय के रहे वाले एक व्यक्ति जो 1978 के दंगों के बाद से ही मुरादाबाद चले गए उन्होंने कई बड़े खुलासे किए हैं। इनके दावे सपा सांसद रामगोपाल यादव के बयान को झूठा साबित करते है।
सपा सांसद रामगोपाल ने क्या दिया था बयान
आइए सबसे पहले जानते हैं कि सपा सांसद राम गोपाल यादव ने क्या बयान दिया था। सपा सांसद रामगोपाल ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि "ये असत्य है कि संभल का मंदिर हमने बंद करवाया था। जिसकी जमीन थी वो लोग खुद ही बंद करके चले गए थे। अगर कोई गेरुआ कपड़े पहनकर झूठ बोलता है तो उसका इलाज नहीं है।"

खग़्गू सराय के रहने वाले ने किया यह खुलासा
खग़्गू सराय के रहने वाले अनिल जो अब मुरादाबाद में रहते हैं उन्होंने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने संभल से पलायन होने की पूरी कहानी बताई।
मंदिर के पास ही रहते थे
अनिल कुमार रस्तोगी ने बताया कि जहां आज मंदिर का ताला खुल रहा है वहीं पास ही हम लोग रहते थे। हमने 1979 मैं यह घर छोड़ दिया था। उस समय 30-32 परिवार यहां रहते थे। मंदिर के पीछे भी बहुत लोग रहते थे।
इसलिए यहां से भागना पड़ा
अनिल कहते हैं कि 1978 मैं जब बवाल हुआ उसके बाद एक एक करके सब लोग यहां से चले गए। उस समय मेरी उम्र 28 साल की होगी। हमारी आढ़त की दुकान थी नखासा में। उसमें आग लगा दी थी करीब एक लाख का नुकसान हुआ होगा उस समय डर के चलते यहां से सब लोग चले गए। अनिल ने कहा कि हम रामगोपाल जी के बयान से पूरी तरह असहमत हैं। दंगे की वजह से ही हम यहां से भाग खड़े हुए थे।
राधा कृष्ण मंदिर का खुला ताला
जनपद संभल के हयातनगर थाना क्षेत्र के सरायतरीन का है, जहां पर 1982 में निर्मित राधा कृष्ण का एक मंदिर मिला है जिसके विषय में जानकारी देते हुए ऋषिपाल सिंह ने बताया कि मंदिर की चाबी मेरे पास रहती है। समय-समय पर हम यहां पर पूजा करते हैं। सुरक्षित महसूस न करने के कारण संख्या कम होने के कारण और सुरक्षित महसूस किया और हम स्वयं ही यहां से चले गए साथ ही उन्होंने कहा कि सपा और कांग्रेस की सरकारों में उनकी बात प्रशासन नहीं सुनता था। जिसकी वजह से उन लोगों ने यहां से अपने मकान बेचा और चले गए।
वही इस विषय में जानकारी देते हुए बुद्ध सेन सैनी ने बताया कि मुस्लिम आबादी होने के कारण हम लोग अपने मकान बेचकर यहां से चले गए और बीच-बीच में आकर यहां पर पूजा करते हैं।
वही इस विषय में जानकारी देते हुए स्थानीय निवासी शाहीन ने बताया कि यह मंदिर 1982 में बना था और यहां पर सैनियों के 200-250 यहां परिवार रहा करते थे और वह लोग यहां पर आकर बीच-बीच में पूजा करते हैं।












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