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बड़ी खबर: यूपी के इस जिले में कच्चे तेल का भंडार होने का दावा, ONGC कर रहा सर्वे, JIO को मिला ठेका

लगभग 150 साल पहले अमेरिका के पूर्वी पेन्सिल्वेनिया क्षेत्र में तेल भंडारों की खोज होने के बाद पहली बार इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू हुआ था।
जिसके बाद से दुनियाभर के कई देशों की इकोनॉमी तेल पर निर्भर हो गई। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि दुनिया में फ़िलहाल प्रतिदिन 10 करोड़ बैरल तेल की खपत हो रही है। पिछले 75 सालों में तेल की खपत दस गुना बढ़ गई है।

हैरानी की बात ये है कि लगभग 200 देशों में ईरान, इराक़, सऊदी अरब, वेनेज़ुएला और रूस के एलावा कुछ ही देश ऐसे हैं जहां तेल का भंडार मौजूद है। लेकिन हाल ही में भारत के भी कुछ हिस्सों में तेल के भंडार होने का दावा किया गया है। क्या इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में भारत भी तेल का उत्पादन शुरू कर सकता है?

UP news ONGC claims to have reserves of crude oil in ballia district of uttar pradesh

दरअसल, बीते कुछ वर्षों से ओएनजीसी (तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड) की विशेष सर्वे टीमें पूरे देश में सैसमिक सर्वेक्षण कार्य में जुटी हुई हैं। 2021 में एक टीम ने उत्तर प्रदेश के बलिया और बिहार के समस्तीपुर में कच्चा तेल मौजूद होने की संभावना बताई भी थी। टीम के अधिकारियों ने भूखंड की मार्किंग भी की थी।

ऐसे खोजा जाता है तेल का भंडार
आपको बताते हैं कि आखिर कैसे पता लगा कि बलिया में जमीन के नीचे तेल है या नहीं ? सबसे पहले चिह्नित एरिया पर तार बिछाया गया, जिसका कनेक्शन कंप्यूटर से लैस विशेष वाहन से किया गया। फिर तार को उस ट्रक से जोड़ा गया। फिर एक चिह्नित स्थान पर 10 फीट का गहरा गड्ढा खोदा गया, गड्ढे में तार को कनेक्ट किया गया। फिर गड्ढे में विस्फोटक से धमाका किया गया।

विस्फोट से धरती में कंपन हुआ तो रेज (तरंग) जमीन के नीचे तक गई। फिर रेज (तरंग) नीचे से टकराकर वापस तार के जरिये कंप्यूटर से कनेक्ट हुईं। रेज (तरंग) ग्राफ तैयार हुआ, इसके बाद देहरादून में उसका विश्लेषण किया गया तो सामने आया कि कच्चे तेल की मौजूदगी कहां पर है।

वहीं इस पूरी प्रक्रिया के बाद अब फिर 2023 में ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन लिमिटेड (ओएनजीसी) आगे की प्रक्रिया को पूरा करने जा रहा है। यूपी के बलिया जिले में नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में जमीन के नीचे कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) मौजूद होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। ओएनजीसी इसकी पुष्टि के लिए सेस्मिक सर्वे व थ्रीडी मैपिंग कराएगी। उसके बाद आगे की जांच होगी।

सेस्मिक सर्वे करने वाली कंपनी के प्रभारी राहुल चावला ने बताया कि सेस्मिक सर्वे से जमीन के अंदर तेल मिलने की पुष्टि नहीं होती। हमारी कंपनी ओएनजीसी द्वारा बताए गए डाटा को इकट्ठा कर सौंप देती हैं। भूगर्भ वैज्ञानिक उसकी जांच करते हैं। हमारी टीम अभी आ रही है। आगे जो आदेश होगा, उस पर काम किया जाएगा।

जिओ कम्पनी को ठेका मिला
आपको बता दें कि शहर से सटे दरामपुर, मुबारकपुर गांव के समीप सर्वे करने वाली टीम व मजदूर डेरा डाल चुके हैं। कंपनी आधुनिक मशीनों का पूरा सिस्टम लगा रही है। इस काम के लिए अल्फा जिओ कम्पनी को ठेका दिया गया है।

एक साथ कम्पनी सैकड़ों स्थान पर खुदाई करेंगी। इनकी मॉनिटरिंग ओएनजीसी के आला अधिकारी करेंगे। गौरतलब है कि पूर्व में करीब 2020 के आसपास ओएनजीसी ने गंगा, तमसा के तटवर्ती क्षेत्र में सर्वे किया था। जमीन के अंदर विस्फोट कर उठने वाली तरंगों की इकट्ठ किया था। अब उसके आगे का सर्वे होने की बात कही जा रही है।

वहीं फेफना थाना क्षेत्र के दरामपुर, मुबारकपुर व सागरपाली में ट्रकों से मजदूरों व भूमि ड्रि्ल में प्रयोग होने वाले मशीनों के साथ कैंप किया है। इंजन व बल्ली व पाइप को दुरुस्त कर रहे हैं। मजदूर कुछ पूछने पर तेल खोजने के लिए जमीन खुदाई की बात कह रहे हैं।

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