'बेटा, मुझे 10 दिनों से..' मुख्तार ने मरने से पहले बेटे से की थी क्या बात? उमर ने डीएम को खत लिख लगाई ये गुहार
Mukhtar Ansar Death: पूर्वांचल का चर्चित नाम, गैंगेस्टर से राजनेता बने मुख्तार अंसारी की जेल में मौत हो गई है। मौत के बाद मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी ने बांदा के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर मांग की है कि उनके पिता का पोस्टमॉर्टम दिल्ली एम्स के डॉक्टरों से कराया जाए। अपने पत्र में अंसारी ने लिखा है कि उनके परिवार को बांदा की चिकित्सा व्यवस्था पर भरोसा नहीं है।
उत्तर प्रदेश के शीर्ष विपक्षी नेताओं ने भी शुक्रवार, 29 मार्च को मुख्तार अंसारी की मौत की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट के जज की देखरेख में जांच की मांग की और आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश 'सरकारी अराजकता' के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है।
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सुनियोजित साजिश के तहत हुई मुख्तार अंसारी की हत्या!
मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी ने 2 पन्नों के खत में आरोप लगाया कि 63 वर्षीय पांच बार के पूर्व विधायक, मुख्तार अंसारी को बांदा जेल में भोजन में मिलाकर "धीमा जहर" दिया जा रहा था। अंसारी के बेटे ने कहा, "मेरे पिता ने अदालतों को पत्र लिखकर बताया कि उन्हें 'धीमा जहर' दिया जा रहा है, अब पूरा देश इस बारे में जानता है।"
उमर ने ये भी आरोप लगाया कि जब वो अपने पिता से मिलने अस्पताल पहुंचा था तब उसे उसके पिता से मिलने नहीं दिया गया। उसने खत में लिखा, "28 मार्च को मेरे पिता ने पीसीओ से मुझे कॉल कर के बताया था कि उन्हें जहर दे दिया गया है और उन्हें 10 दिनों से "नित्य क्रिया" नहीं हुई है।" उमर के अनुसार उसके पिता ने फोन पर उससे कहा, "बेटा, मैं अब बचूंगा नहीं।"
मुख्तार अंसारी के बेटे ने खत में उत्तर प्रदेश सरकार पर भरोसा ना होने की बात कहते हुए अपने पिता का पोस्टमार्टम दिल्ली एम्स के डॉक्टरों से कराने की बात की है। साथ ही उसने आरोप लगाया है कि उसके पिता की मौत एक 'सुनियोजित साजिश' के तहत की गई है, इसलिए इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
अस्पताल के मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, अंसारी को बांदा जिले के रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज ले जाने के कुछ ही घंटों के भीतर गुरुवार, 28 मार्च को हृदय गति रुकने से मृत्यु हो गई।
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विपक्षी दलों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
अंसारी की मौत के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा, "हर स्थिति और हर स्थान पर किसी के जीवन की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी और कर्तव्य है। एक कैदी की मौत से न्यायिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास कम हो जाएगा।"
यादव ने आगे कहा, ''ऐसी सभी बातें संदिग्ध मामलों की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में होनी चाहिए। जिस तरह से सरकार न्यायिक प्रक्रिया को दरकिनार कर दूसरे तरीके अपनाती है वह पूरी तरह से गैरकानूनी है। जो सरकार जीवन की रक्षा नहीं कर सकती, उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। उत्तर प्रदेश 'सरकारी अराजकता' के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। यह यूपी में कानून-व्यवस्था का 'शून्यकाल' है।''
यूपी की पूर्व सीएम और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने मृतक के परिवार के गंभीर आरोप को देखते हुए मौत की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
उन्होंने कहा, "मुख्तार अंसारी की जेल में मौत को लेकर उनके परिवार द्वारा लगातार जताई जा रही आशंकाओं और गंभीर आरोपों की उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है ताकि उनकी मौत के सही तथ्य सामने आ सकें। ऐसे में उनके परिवार का दुखी होना स्वाभाविक है। प्रकृति उन्हें यह दुख सहने की शक्ति दे।"
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