कौन हैं वो UP के मंत्री, जिनके भतीजे की चीनी मांझे से गर्दन कटते ही सोया सिस्टम जागा? 4 जिलों में सख्ती

Bareilly Chinese Manjha: उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास राज्य मंत्री संजय गंगवार के 15 वर्षीय भतीजे के गर्दन कटने की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि गर्दन चीनी मांझे (सिंथेटिक पतंग की डोर) से गर्दन कटने की घटना के कुछ दिनों बाद प्रशासन और पुलिस ने सख्ती दिखाई है। बरेली रेंज के DIG अजय कुमार साहनी ने बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर में प्रतिबंधित चीनी मांझे के खिलाफ संयुक्त अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

यह कार्रवाई सिर्फ एक हादसे की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की बड़ी मुहिम का हिस्सा है। आइए विस्तार से जानें क्या कैसे हुआ?

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15 जून सुबह करीब 7:30 बजे बरेली के श्यामगंज फ्लाईओवर पर 15 वर्षीय आदित्य वीर सिंह गंगवार स्कूटर चला रहे थे। अचानक ऊपर से लटक रही चीनी मांझा उनकी गर्दन में फंस गई। नायलॉन की इस तेज धार वाली डोर ने उनके गले, चेहरे, कान और एक उंगली को बुरी तरह काट दिया। घायल अवस्था में उन्हें तुरंत ईशान अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज ICU में चल रहा है। घटना इतनी गंभीर थी कि पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) का मुकदमा दर्ज किया है।

मंत्री संजय गंगवार अस्पताल पहुंचे और सवाल किया कि प्रतिबंध के बावजूद यह खतरनाक मांझा बाजार में कैसे बिक रहा है? इस हादसे ने एक बार फिर चीनी मांझे की समस्या को सुर्खियों में ला दिया है।

Who Is Sanjay Singh Gangwar कौन हैं संजय सिंह गंगवार?

संजय सिंह गंगवार उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से आने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता हैं। वह वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में गन्ना विकास एवं चीनी मिलें राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार नहीं) के रूप में कार्यरत हैं। उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उन्हें गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग के राज्य मंत्री के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

चीनी मांझा है क्या और इतना खतरनाक क्यों?

पारंपरिक भारतीय पतंग की डोर सूती धागे की होती है, जो आसानी से टूट जाती है। लेकिन चीनी मांझा नायलॉन का बना होता है, जिसमें कांच पाउडर, धातु (आयरन) और अन्य तेज कण मिलाए जाते हैं। इससे यह बेहद मजबूत और धारदार बन जाता है।

खतरे क्या हैं?

  • वाहन चालकों की गर्दन काट सकता है।
  • पक्षियों और जानवरों को फंसाकर मार सकता है।
  • पर्यावरण में लंबे समय तक रहकर प्रदूषण फैलाता है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और कई राज्यों ने इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर रखा है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ निर्देश दिए हैं कि चीनी मांझे से होने वाली मौतों को हत्या माना जाएगा।

DIG साहनी के सख्त निर्देश

DIG अजय कुमार साहनी ने चार जिलों के पुलिस अधिकारियों को लिखित निर्देश जारी किए:

  • चीनी/सिंथेटिक मांझे की बिक्री, भंडारण, परिवहन और इस्तेमाल पर पूरी रोक।
  • दोषी दुकानदारों पर भारी जुर्माना, लाइसेंस रद्द।
  • ऑनलाइन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर नजर रखने के लिए साइबर सेल को सक्रिय किया जाए।
  • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के तहत FIR दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई।
  • पुराने मामलों की प्रभावी जांच और दोषियों को सजा दिलाना।
  • बड़े स्तर पर जन जागरूकता अभियान - सुरक्षित सूती धागे का इस्तेमाल करें।

पुलिस को फ्लाईओवरों पर निगरानी बढ़ाने और छापेमारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

समस्या कितनी बड़ी है? आंकड़े और पिछली घटनाएं

  • प्रतिबंध के बावजूद चीनी मांझा चोरी-छिपे बिकता रहा है। पिछले कुछ वर्षों में UP, दिल्ली, गुजरात आदि राज्यों में दर्जनों हादसे हो चुके हैं।
  • मोटरसाइकिल/स्कूटर सवारों की गर्दन कटने की घटनाएं आम।
  • बच्चों, पैदल राहगीरों और पक्षियों की मौतें।
  • फरवरी 2026 में CM योगी ने राज्यव्यापी अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। कई जिलों में सैकड़ों किलो मांझा जब्त हुआ, लेकिन मांग बनी रहने से सप्लाई भी जारी है।

यह समस्या सिर्फ मानवीय नहीं, पर्यावरणीय भी है। सिंथेटिक धागा नष्ट नहीं होता और जानवरों के लिए घातक साबित होता है।

सरकार और प्रशासन की भूमिका समझें...

उत्तर प्रदेश सरकार ने चीनी मांझे पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। NGT के दिशानिर्देशों का पालन अनिवार्य है। मंत्री के भतीजे की घटना ने स्थानीय स्तर पर कार्रवाई को तेज कर दिया है, लेकिन experts कहते हैं कि यह राज्यव्यापी और निरंतर प्रयास की मांग करता है।

कानूनी प्रावधान क्या है?

  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम।
  • BNS की धाराएं (हत्या का प्रयास आदि)।
  • स्थानीय पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त जिम्मेदारी।

उपभोक्ता और नागरिक क्या करें?

  • 1. पतंग उड़ाने के लिए केवल सूती धागा खरीदें। चमकदार, मजबूत दिखने वाले मांझे से बचें।
  • 2. खरीदारी करते समय विक्रेता से पूछें और बिल लें।
  • 3. संदेह होने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें (100 या स्थानीय थाना)।
  • 4. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी रिपोर्ट करें।
  • 5. फ्लाईओवर या सड़कों पर डोर लटकती दिखे तो तुरंत शिकायत करें।

माता-पिता बच्चों को समझाएं कि पतंगबाजी का मजा सुरक्षित तरीके से लें।

बरेली की यह घटना दुखद है, लेकिन यह एक नींद से उठाने वाला मामला है। DIG अजय कुमार साहनी का अभियान सराहनीय है, मगर सफलता तब मिलेगी जब हर नागरिक, विक्रेता और प्रशासन मिलकर चीनी मांझे को समाज से पूरी तरह जड़ से उखाड़ फेंके। पतंगबाजी का त्योहार आनंद का होना चाहिए, मौत का नहीं।

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