यूपी में 62 से 33 सीटों पर क्यों सिमटी बीजेपी? एक-एक कर सामने आ रहे हैं अंदर के गहरे राज!
UP Lok Sabha Chunav: उत्तर प्रदेश में भाजपा की सीटें घटकर लगभग आधी रह गई हैं। पिछली बार भी इसकी सीटें कम हुईं थीं, लेकिन तब सपा-बसपा गठबंधन के बाद भी पार्टी ने अपने गढ़ को काफी हद तक सुरक्षित रखा था। अब यूपी में बीजेपी की हार की वजहों का खुलासा पार्टी के अंदर से ही होने लगा है।
2019 में बीजेपी को उत्तर प्रदेश में 62 सीटें मिली थी और उसे कुल 4,28,58,171 (49.98%) वोट मिले थे। 2024 के चुनावों में उसका प्रदर्शन पिछली बार के मुकाबले बहुत ही खराब रहा है। पार्टी सिर्फ 33 सीटें जीती है और इसे कुल 3,62,67,072 (41.37% ) वोट मिले हैं।

सीएम योगी पर ठाकुरों को तरजीह देने का आरोप
बहरहाल, भाजपा के कुछ विधायकों ने ही अंदर के कुछ गहरे राज उगलने शुरू किए हैं। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा के एक एमएलए ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 'अपनी जाति को तरजीह दी और दूसरों को नजरअंदाज किया'। कुछ चुनाव अभियान के दौरान पीएम की ओर से इस्तेमाल किए गए कुछ 'शब्दों' की ओर भी इशारा कर रहे हैं।
सांसदों के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी को भी मान रहे वजह
कई बीजेपी विधायकों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि आवारा पशुओं की समस्या का हल नहीं हो पाया, जिसके बारे में प्रधानमंत्री मोदी खुद 2022 में वादा करके गए थे। अमेठी समेत कुछ हाई प्रोफाइल सीटों पर एंटी-इंकंबेंसी की शिकायतें भी मिल रही हैं।
बीजेपी के जिस विधायक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर ठाकुरों को ज्यादा तबज्जों देने का आरोप लगाया है, उनका यहां तक आरोप है कि दूसरे दलों के भी ठाकुर विधायकों पर भी वे ज्यादा ध्यान देते हैं। जबकि, दूसरी जातियों के स्थानीय विधायकों और सांसदों के सुझावों को भी वह ज्यादा भाव नहीं देते।
हालांकि, कुछ रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि इस बार ठाकुर या राजपूत मतदाताओं के एक वर्ग ने यूपी से लेकर राजस्थान और गुजरात तक में भाजपा का बेड़ा गर्क किया है।
स्थानीय मुद्दों को भी मान रहे हैं खराब प्रदर्शन की वजह
एक विधायक को लगता है कि अग्निपथ योजना को जारी रखने पर भी विचार होना चाहिए और पुरानी पेंशन योजना को भी वापस लाना चाहिए। रोहिलखंड क्षेत्र के एक एमएलए ने कहा कि जब भी कार्यकर्ता चुनाव अभियान के लिए पहुंचे तो उनके सामने लाभार्थी योजनाओं पर स्थानीय मुद्दे, आवारा पशुओं से परेशानी, बढ़ती कीमतें और पेपर लीक जैसे मुद्दे हावी पड़ गए।
संविधान बदलने और आरक्षण खत्म करने वाले विपक्ष के 'प्रचार' ने खेल बिगाड़ा
यूपी के चुनाव परिणामों के आकलन के बाद जिस नतीजे पर काफी चर्चा हो रही है, वही बातें भाजपा के कुछ विधायक भी कर रहे हैं। जैसे पार्टी के एक दलित एमएलए ने बताया कि किस तरह से संविधान बदलने और आरक्षण खत्म करने के सपा और कांग्रेस के दावों ने दलितों और ओबीसी वोटरों को इसबार प्रभावित किया है।
इसके अलावा यूपी में बीजेपी की बड़ी हार की एक वजह जो सार्वजनिक होती हुई लगी है, वह है हर महिलाओं के खाते में एक लाख रुपए डालने वाला कांग्रेस का गारंटी कार्ड। जिस तरह से कर्नाटक में पोस्ट ऑफिस में नया अकाउंट खोलने से शुरू हुई ये कहानी, लखनऊ में कांग्रेस के दफ्तर में मुस्लिम महिलाओं की भीड़ की तरह उमड़ी है, वह भी प्रदेश में भाजपा के लिए दिल्ली की रफ्तार कम होने का बहुत बड़ा फैक्टर माना जा रहा है।












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