आनंद महिंद्रा को क्यों बुलाया गया योगी के शपथ ग्रहण समारोह में ?
लखनऊ, 24 मार्च। देश के चर्चित उद्योगपति आनंद महिन्द्रा को योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में क्यों आमंत्रित किया गया है ? बेधड़क बोलने वाले आनंद महिन्द्रा योगी आदित्यनाथ के बारे में क्या सोचते हैं ?

क्या इस बार योगी आदित्यनाथ बुलडोजर नीति के साथ-साथ उद्योग नीति को भी नया रूप देंगे ? क्या वे उत्तर प्रदेश को उद्यम प्रदेश बनाने की तैयारी में हैं ?

जिस ट्वीट से बढ़ा था सरकार का हौसला
आम तौर पर आनंद महिन्द्रा किसी देल विशेष में कोई रुचि नहीं रखते। लेकिन सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों पर वे अपनी बात जरूर रखते हैं। कई बार उनकी टिप्पणी नीति निर्माण में बहुत सहायक होती है। 2020 में जब कोरोना महामारी चीन में शुरू हुई थी तब उसका आर्थिक ढांचा तहसनहस हो गया था। कई कंपनियां चीन छोड़ कर दूसरे देशों में जाने लगीं थीं। तब योगी आदित्यनाथ ने केन्द्र सरकार के सहयोग से इन कंपनियों को उत्तर प्रदेश में उद्योग लगाने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव पर जर्मनी की जूता कंपनी 'वॉन वेलेक्स' ने आगरा में अपनी फैक्ट्री स्थापित की। जब चीन से आयी इस कंपनी की आगरा यूनिट ने काम करना शुरू किया तो आनंद महिन्द्रा ने नवम्बर 2020 में ट्विट किया था, ये पानी की छोटी-छोटी बूंदे हैं। फिर यह धीरे धीरे पतली धार का रूप लेंगी। इसके बाद ये तेज धार बनेंगी और अंत में बाढ़ के रूप में तब्दील हो जाएंगी। आनंद महिन्द्र ने इस ट्वीट से उत्तर प्रदेश के भावी औद्योगिक विकास की तस्वीर खींची थी। चीन से किसी कंपनी का उत्तर प्रदेश आना, बहुत बड़ी बात थी। उन्होंने अपने शब्दों में इसकी व्याक्या की थी। इस सकारात्मक ट्वीट की उत्तर प्रदेश सरकार ने सराहना की थी।

पारदर्शी नीति का संकेत
जब जर्मन जूता कंपनी वॉन वेलेक्स ने आगरा में अपनी यूनिट शुरू की तो करीब दो हजार लोगों को यहां रोजगार मिला। कोरोना संकट के दौरान ही योगी आदित्यनाथ ने निवेश के प्रोत्साहन के लिए बड़ी पहल की। राज्य सरकार की उद्योग नीति को लचीला और सुगम बनाया गया। इसका असर हुआ। व्यापार के लिए सबसे अनुकूल राज्यों की सूची में उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर पहुंच गया। पहले वह दसवें स्थान पर था। दोबारा जीत ने योगी आदित्यनाथ को मौका दिया है कि वे अपनी अधूरी नीतियों को पूरा करें। मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी जैसे उद्योगपतियों को भी शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया है। लेकिन आनंद महिन्द्रा को भेजा गया निमंत्रण थोड़ा खास है। अंबानी और अडाणी पर भाजपा समर्थक होने का आरोप लगता रहा है। लेकिन आनंद महिन्द्रा की छवि इनसे अलग है। उन्हें तटस्थ माना जाता है। इसके जरिये योगी ने पारदर्शी नीति अपनाये जाने का संकेत दिया है।

प्रकृति और विकास एक साथ संभव
पद्मविभूषण आनंद महिन्द्रा, महिन्द्रा उद्योग समूह के अध्यक्ष हैं। हार्वर्ड बिजनेस स्कूलस, बोस्टन से एमबीए की डिग्री ली है। बड़े उद्योगपति हैं। फिर भी ट्वीटर पर बहुत सक्रिय रहते हैं। समकलीन राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं पर ट्वीट करने में देर नहीं लगाते। उनकी हाजिरजवाबी का हर कोई कायल है। उनकी भाषा बेहद चुस्त होती है और शब्द शानदार होते हैं। राजनीतिक पूर्वाग्रह से मुक्त हो कर अपनी बात रखते हैं। वे खरी बात को भी इतनी शालीनता से कहते हैं के सामने वाले को बुरा नहीं लगता। इसके संबंध में नितिन गडकरी का एक वाकया काबिले जिक्र है। अगस्त 2020 में नॉर्वे के राजनयिक एरिक सोल्हेम ने एक तस्वीर के साथ ट्वीट किया था, विकास और प्रकृति का सहअस्तित्व संभव है। एरिक ने नीदरलैंड के एक पुल की तस्वीर शेयर की थी जिसके नीचे से गाड़ियां गुजर रहीं थीं और ऊपर घास और पेड़ों का एक कृत्रिम जंगल बना दिया गया था। यह पुल जंगल के दो हिस्सों को जोड़ता था। वन्यजीव पुल के ऊपर से बिना किसी बाधा के इस जंगल से उस जंगल में जाते थे। नीचे से गाड़ियां भी गुजरती थीं। यानी इस सड़क पुल से विकास भी हो गया और प्राकृतिक संतुलन भी कायम रहा।

आनंद महिन्द्रा ने नितिन गडकरी से क्या कहा था ?
आनंद महिन्द्रा ने इस ट्वीट को रीट्वीट कर लिखा, मंत्री नितिन गडकरी जी से भी गुजारिश है कि जब भारत में कोई हाईवे बने तो इसी तरह प्रकृति का ख्याल रखा जाए। अगर गडकरी जी ऐसा करते हैं तो मैं उनके सम्मान में उठ कर ताली बजाऊंगा। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने तुरंत इस ट्वीट पर जवाब दिया। उन्होंने लिखा, आनंद महिन्द्रा जी, आपके सुझाव के लिए बहुत बहुत शुक्रिया। ऐसे इनोवेशन को ध्यान में रखने की जरूरत है। इकोलॉजिकल बैलेंस को बनाये रखना जरूरी है। जवाब में गड़करी ने अपने प्रयास की भी कुछ तस्वीरें शेयर की थीं। यानी आनंद महिन्द्रा हमेशा देश और सामाजिक सरोकार की बात करते हैं। शायद इन्ही खूबियों की वजह से उन्हें योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया है।
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