यूपी चुनाव-2017- अखिलेश और कांग्रेस की करीबी ने बदला यूपी का समीकरण
यूपी चुनाव में जिस तरह से अखिलेश यादव और कांग्रेस एक साथ आते दिख रहे हैं उसने तमाम दलों को अपनी रणनीति के बारे में फिर से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले सपा में कलह के बीच एक बार फिर से जिस तरह से अखिलेश यादव कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर आगे बढ़ते दिख रहे हैं उसने बसपा सुप्रीमो मायावती को एक बार फिर से अपनी रणनीति के बारे में सोचने को मजबूर कर दिया है। इलाहाबाद सहित कई जगहों पर डिंपल यादव और प्रियंका गांधी के पोस्टर एक साथ लगाए गए है उसने ना सिर्फ बसपा बल्कि भाजपा को भी अपनी रणनीति के बारे में फेरबदल करने को मजबूर किया है।

अखिलेश के कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर हो रही कोशिशों के बीच भाजपा ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए अब बसपा के साथ करीबी बढ़ांने व सपा और कांग्रेस के साथ होने वाले गठबंधन पर जमकर हमला बोलने का फैसला लिया है। हालांकि कांग्रेस ने अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है कि वह अखिलेश यादव के साथ गठबंधन करने जा रही लेकिन जिस तरह से जमीनी स्तर पर दोनों पार्टियों का गठजोड़ दिख रहा है उससे साफ है कि दोनों पार्टियां इस चुनाव में साथ मैदान में उतरेंगी।
भाजपा के रणनीतिकार ने वनइंडिया को बताया कि सपा और कांग्रेस के गठबंधन का हल्के में नहीं लिया जा सकता है। इस गठबंधन को कमजोर करने के लिए हमें अपनी पूरी ताकत झोंकनी होगी और अपनी रणनीति को उसी लिहाज से आगे करना होगा। भाजपा नेता ने यह भी बात कही है कि पर्दे के पीछे बसपा के साथ भी बातचीत की जा रही है। वहीं कांग्रेस के एक नेता का कहना है कि वह अभी भी सपा के साथ बात कर रही है, इस बात की भी संभावना है कि सपा-कांग्रेस और लोकदल का गठबंधन हो जाए। समाजवादी पार्टी कांग्रेस और लोकदल को 135 सीटें देने के लिए तैयार है। वहीं कांग्रेस के नेता का यह भी कहना है कि वह अखिलेश खेमे से साइकिल छिन जाने के बाद भी कोई खास परेशान नहीं होंगे और यह चिंता का विषय नहीं है। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग 17 जनवरी को सपा के चुनाव चिन्ह पर अपना फैसला दे सकती है।












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