यूपी चुनाव: इस बार संवेदनशील सीटों की संख्या 38 से 73 हुई , जानिए उनके बारे में सबकुछ
लखनऊ, 14 जनवरी: उत्तर प्रदेश में इस बार के चुनाव में पिछले चुनाव की तुलना में 35 ज्यादा विधानसभा सीटों को पुलिस ने संवेदनशील घोषित किया है। पुलिस संवेदनशील घोषित करने से पहले उस सीट से संबंधित कई पहलुओं पर गौर करती है और उसके बाद ही स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संपन्न करवाने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती को देखते हुए इसका ऐलान करती है। इस बार सिर्फ 6 विधानसभा सीट ही ऐसे हैं, जिन्हें संवेदनशील की लिस्ट से हटाया गया है। लेकिन, पिछले पांच वर्षों में हुई कुछ घटनाओं की गंभीरता और संबंधित क्षेत्रों की कानून और व्यवस्था के इतिहास को देखते हुए इसबार इतनी ज्यादा सीटों को संवेदनशील बनाया गया है।

यूपी में 38 से 73 हुई संवेदनशील सीटों की संख्या
आखिरकार यह तय हो गया है कि इस साल यूपी विधानसभा चुनावों में संवेदनशील सीटों की संख्या 2017 के चुनावों के मुकाबले लगभग दोगुनी होंगी। पिछली बार राज्य की 403 में से 38 विधानसभा सीट संवेदनशील घोषित किए गए थे, लेकिन इस बार कानून और व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए 73 विधानसभा क्षेत्र संवेदनशील घोषित किए गए हैं। अब चुनाव आयोग इसी के आधार पर सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर फैसला करेगा। इन सीटों में कन्नौज विधानसभा क्षेत्र भी शामिल है, जहां तीन इत्र कारोबारियों के घरों पर छापे के दौरान निकले करोड़ों रुपये के कैश ने पूरे देश में सनसनी मचा दी थी।

6 सीटें संवेदनशील की लिस्ट से हटीं
भदोही जिले की मऊ सदर और ज्ञानपुर सीटों को भी संवेदनशील घोषित किया गया है। यहां से अभी क्रमश: मुख्तार अंसारी और विजय मिश्रा जैसे विवादित नेता विधायक हैं। ये दोनों ही एमएलए अभी जेल में हैं। इनके अलावा यूपी पुलिस ने इलाहाबाद (पश्चिम) को भी संवेदनशील घोषित किया है, जो कि जेल में कैद पूर्व विवादित विधायक अतीक अहमद का गढ़ माना जाता है। पुलिस की संवेदनशील सीटों की लिस्ट में 32 पिछले चुनाव वाले ही हैं और उनमें से 6 नाम हटा दिए गए हैं। जिन्हें संवेदनशील सीट की लिस्ट से हटाया गया है वे हैं, जौनपुर जिले कि मड़ियाहूं और शाहगंज, गाजियाबाद की लोनी, प्रयागराज में इलाहाबाद उत्तर, संभल में गुन्नौर और औरैया जिले की दिबियापुर।
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कैसे घोषित होती है संवेदनशील सीट?
यूपी पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने इसके बारे में कहा कि, 'संवेदनशील सीटें तय करने के अलग-अलग मानदंड हैं। इसमें जातिगत स्थिति, कानून एवं व्यवस्था का पुराना इतिहास और चुनाव में लड़ने वाले कौन हैं। इन सीटों पर सुरक्षा बलों की भारी तैनाती सुनिश्चित की जाती है ताकि चुनाव सुचारू रूप से संपन्न हो।'

किन जिलों में कितने संवेदनशील सीट ?
मौजूदा सीटों की लिस्ट में प्रयागराज जिला सबसे ऊपर है, जिसकी 12 में से 8 सीटों को संवेदनशील घोषित किया गया है। इसके बाद बलिया का नंबर है, जिसकी 5 विधानसभा सीटें संवेदनशील मानी गई हैं। प्रतापगढ़, मैनपुरी,गाजीपुर और आगरा जिलों में ऐसी सीटों की संख्या चार-चार हैं। वहीं, बिजनौर, बागपत, सहारनपुर, सिद्धार्थ नगर, बहराइच, जौनपुर, अंबेडकर नगर और आजमगढ़ जिले में तीन-तीन सीटों को संवेदनशील घोषित किया गया है। ललितपुर,संभल, फतेहपुर, बाराबंकी, मथुरा, फिरोजाबाद, मेरठ और चंदौली जिलों में दो-दो सीटें संवेदनशील घोषित की गई हैं। इसी तरह कन्नौज,एटा,हाथरस, शामली,जौनपुर, मऊ और भदोही में एक-एक सीट संवेदनशील रहेंगे।

यूपी में संवेदनशील सीटों की संख्या बढ़ने का कारण
रामपुर मनिहारान और सहारनपुर जिलों में 2017 में कुछ जातिगत विवादों की वजह से हिंसा की घटनाएं देखने को मिली थीं। इन्हीं घटनाओं के बाद भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आजाद को सुर्खियां मिली थीं। इसी तरह मोहम्मदाबाद और गाजीपुर जिलों में 2018 में जातिगत विवादों में हिंसक झड़पें सामने आई थीं। जबकि, मेरठ और फिरोजाबाद जिलों में 2019 के आखिर में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में बड़े पैमाने पर हिंसक वारदातों को अंजाम दिया गया था। इस तरह की हिंसा लखनऊ, वाराणसी, रामपुर, मुजफ्फरनगर, संभल, बिजनौर, कानपुर, मऊ, गोरखपुर और अलीगढ़ में भी हुई थी। (पहली तस्वीर के अलावा बाकी फाइल)












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