UP elections 2022: इस बार प्रतिमाओं पर लगा है बड़ा दांव, किस पार्टी के एजेंडे में क्या है ? जानिए
लखनऊ, 15 नवंबर: उत्तर प्रदेश के चुनावों में मंदिर-मस्जिद का मुद्दा दशकों पुराना है। लेकिन, इस बार लगभग सभी पार्टियां ऐतिहासिक नायकों से लेकर दस्यु सरदारों तक की मूर्तियों के जरिए वोट बटोरना चाहती हैं। स्मारकों और मूर्तियों के निर्माण में बीएसपी यूपी की राजनीति के लिए एक बेहतरीन मॉडल है और वास्तव में उसे इस गलती का अहसास भी हो चुका है। लेकिन, फिर भी नेताओं और पार्टियों को लगता है कि यह विशेष जातियों और समाजों का वोट लेने का बेहतर तरीका हो सकता है। सच में कोई भी पार्टी इस बार पीछे नहीं दिख रही है।

मायावती कर चुकी हैं प्रतिमा पॉलिटिक्स से तोबा!
2007 के चुनाव में जब बीएसपी का यूपी की सत्ता पर धमाकेदार कब्जा हुआ था तो मायावती की सरकार मूर्तियों, स्मारकों और पार्कों का पर्याय बन गई थी। 2012 के चुनाव आते-आते इन चीजों पर बेतहाशा हुए खर्चों को लेकर अदालतों को भी ऐक्टिव होना पड़ा था। बहरहाल, बसपा सुप्रीमो अब इस तरह की राजनीति से कान पकड़ चुकी हैं और सितंबर में ब्राह्मण प्रबुद्ध सम्मेलन में उन्होंने ऐलान कर दिया कि 'आगे सरकार बनने पर सरकारी ताकत स्मारकों, मूर्तियों पर ना लगाकर पूरी ताकत यूपी की तस्वीर बदलने के लिए लगाई जाएगी।' हालांकि, उन्होंने इसके बावजूद सियासी तौर पर जरूरी होने की स्थिति के लिए रास्ता जरूर खुला छोड़ा है कि अगर कुछ धर्म-जाति के लोग चाहेंगे कि संतों-गुरुओं का आदर सम्मान होना चाहिए तो ऐसा जरूर किया जाएगा।

फूलन देवी की प्रतिमाएं वितरित करेगी वीआईपी
उत्तर प्रदेश में इस बार प्रतिमा पॉलिटिक्स में नई एंट्री हुई है बिहार की सत्ता में सहयोगी विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) की। इसने 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले निषाद मतदातों के बीच डाकू से सांसद बनीं पूर्व एमपी फूलन देवी की 50,000 प्रतिमाएं बांटने का फैसला किया है। पार्टी के मुताबिक दस्यु सरदार रहीं फूलन देवी की प्रतिमाएं मुफ्त बाटी जाएगी। इसकी योजना उन सभी 169 विधानसभा क्षेत्रों में फूलन देवी की प्रतिमाएं वितरित करने की है, जहां निषाद वोटर प्रभावी माने जाते हैं। फूलन देवी मिर्जापुर की सांसद थीं और वीआईपी को लगता है कि उनके नाम पर वह निषाद वोट को अपने पाले में कर सकती है।

निषादराज की प्रतिमा लगाने पर बीजेपी सरकार कर रही है काम
उधर योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली यूपी की बीजेपी सरकार भगवान राम और निषादराज (निषाद समाज के प्राचीन राजा) के गले मिलने वाली प्रतिमा स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। हाल ही में प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि 51 फीट ऊंची यह प्रतिमा जल्द ही श्रृंगवेरपुर में स्थापित की जाएगी। धार्मिक आस्था के अनुसार त्रेता युग में जब भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण के साथ वन की ओर प्रस्थान कर चुके थे तो रास्ते में निषादराज ने ही उन्हें नदी पार करने में सहायता की थी। (रामायण सीरियल की तस्वीर-वीडियो से)

राजा सुहेलदेव की प्रतिमा
यूपी सरकार बहराइच में राजा सुहेलदेव का भी स्मारक बनवा रही है, जिसका शिलान्यास इसी साल फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से किया था। इससे पहले पीएम मोदी उनपर डाक टिकट भी जारी कर चुके हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि साल 1034 में उन्होंने महमूद गजनवी के सेनापति सैयद सालार मसूद गाजी को जंग में हरा दिया था और उसे मार डाला था। प्रदेश सरकार इतिहास के इस नायक को महाराजा सुहेलदेव राजभर कह रही है, जिनके अपने होने की दावेदारी कई जातियां करती हैं। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओपी राजभर तो उन्हीं के नाम पर राजनीति ही करते हैं।

सम्राट मिहिर भोज
इसी तरह यूपी में सम्राट मिहिर भोज का मुद्दा भी चुनावी बना हुआ है। जहां कुछ जगह उनकी प्रतिमा लगाई जा रही हैं, जैसे कि एक दिन पहले ही सहारनपुर के फदपुरी गांव में लगाई गई है, वहीं दादरी में उनको लेकर विवाद की स्थिति बनी ही हुई है। यहां गुर्जर समाज इसलिए नाराज है कि उसके मुताबिक यहां सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के अनावरण से पहले उनके आगे से गुर्जर शब्द हटा दिया गया। इस प्रतिमा का अनावरण सीएम योगी ने 22, सितंबर 2021 को किया था।

भगवान परशुराम की मूर्ति
यूपी के चुनाव में ब्राह्मण वोटों को लेकर हाल तक विपक्षी पार्टियां खूब लालायित थीं। इनकी प्रतिमा स्थापित करने की बात समाजवादी पार्टी की ओर से भी आ रही थी। इस कड़ी में भाजपा भी पीछे नही है और पार्टी के नेता श्याम प्रकाश द्विवेदी ने प्रयागराज में भगवान परशुराम की 16 फीट की भव्य प्रतिमा बनवाकर ब्राह्मण वोटों को सेट करने की कोशिश की है।












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