अदाणी और MSC की बड़ी डील: विझिंजम पोर्ट बनेगा दुनिया का नया शिपिंग हब, जानिए क्या है खास?
अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) और मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी (MSC) ग्रुप ने एक बड़ी रणनीतिक साझेदारी का ऐलान किया है। इस डील के तहत MSC की टर्मिनल ऑपरेटिंग यूनिट, टर्मिनल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (TiL), अदाणी विझिंजम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (AVPPL) में 49% हिस्सेदारी खरीदेगी। यह पूरा सौदा 2.85 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है।

समझौते के मुताबिक, TiL इस प्रोजेक्ट में अपने हिस्से के तौर पर 1.397 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करेगी। हालांकि, इस डील को अभी रेगुलेटरी मंजूरियां मिलना बाकी है। कंपनियों का मानना है कि इस साझेदारी से हिंद महासागर में विझिंजम पोर्ट एक प्रमुख ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में और मजबूत होगा, जिससे कार्गो ग्रोथ और ऑपरेशंस में तेजी आएगी। मुंद्रा कंटेनर टर्मिनल नंबर 3 और एन्नोर पोर्ट के बाद APSEZ और MSC ग्रुप के बीच यह तीसरा बड़ा कोलैबोरेशन है।
दिसंबर 2024 में शुरू हुआ विझिंजम भारत का पहला डीप-ड्राफ्ट मेगा ट्रांसशिपमेंट पोर्ट है। फिलहाल इसकी क्षमता 1.6 मिलियन TEUs (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट्स) है। पोर्ट का विस्तार कार्य जारी है और दिसंबर 2028 तक इसकी क्षमता 3.5 गुना बढ़कर 5.7 मिलियन TEUs होने की उम्मीद है।
यूरोप, फारस की खाड़ी और सुदूर पूर्व को जोड़ने वाले व्यस्त पूर्व-पश्चिम अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से यह पोर्ट महज 10 समुद्री मील की दूरी पर है। इसे बड़े कंटेनर जहाजों को आकर्षित करने के लिए डिजाइन किया गया है। यहां 18-20 मीटर का नेचुरल ड्राफ्ट, 800 मीटर का बर्थ, 2.9 किलोमीटर का ब्रेकवाटर, ऑटोमेटेड कार्गो हैंडलिंग सिस्टम और एआई-इनेबल्ड वेसल ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (VTMS) जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं।
पोर्ट ने हासिल किए अहम मुकाम
APSEZ के अनुसार, विझिंजम पोर्ट ने वित्त वर्ष 2026 के दौरान 1.3 मिलियन TEUs का कार्गो हैंडल किया और यह एक मिलियन TEU का आंकड़ा पार करने वाला सबसे तेज भारतीय पोर्ट बन गया। कामकाज शुरू होने के महज 18 महीनों के भीतर पोर्ट ने 2 मिलियन TEUs का आंकड़ा पार कर लिया और 950 से अधिक जहाजों की आवाजाही दर्ज की। जून 2026 में यहां 1,000वां जहाज पहुंचा।
कंपनी ने बताया कि इस पोर्ट ने अब तक 70 से ज्यादा अल्ट्रा लार्ज कंटेनर वेसल्स (ULCVs) को हैंडल किया है, जो किसी भी भारतीय पोर्ट के लिए सबसे ज्यादा है। इसके अलावा, यहां 300 मीटर से अधिक लंबाई वाले 283 जहाज भी आ चुके हैं।
कार्गो वॉल्यूम बढ़ने की उम्मीद
APSEZ का कहना है कि MSC के साथ इस पार्टनरशिप से कार्गो विजिबिलिटी बेहतर होगी और रिले कार्गो वॉल्यूम में इजाफा होगा। इससे पूर्वी अफ्रीकी व्यापार मार्गों के साथ कनेक्टिविटी मजबूत होगी। साथ ही, बांग्लादेश जाने वाले उस कार्गो को भी आकर्षित करने में मदद मिलेगी जो फिलहाल दक्षिण-पूर्वी एशियाई ट्रांसशिपमेंट हब पर निर्भर है।
इस उपलब्धि पर APSEZ के होल-टाइम डायरेक्टर और सीईओ अश्वनी गुप्ता ने कहा कि यह समझौता दोनों कंपनियों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों को और मजबूती देगा।
गुप्ता ने कहा, "विझिंजम पोर्ट एक प्रीमियम ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में उभरा है और इसने रिकॉर्ड रफ्तार से ग्रोथ की है। यह ऑपरेशन के 18 महीनों के भीतर 2 मिलियन TEUs पार करने वाला पहला भारतीय पोर्ट बन गया है। मुझे खुशी है कि हम विझिंजम में अदाणी पोर्ट्स और MSC की पुरानी साझेदारी को और विस्तार दे रहे हैं।"
भारतीय पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश
दोनों कंपनियों ने इस समझौते को भारतीय पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में सबसे बड़े विदेशी निजी निवेशों में से एक बताया है। MSC ग्रुप की सहायक कंपनी TiL, पांच महाद्वीपों में 100 से अधिक कंटेनर टर्मिनलों का ग्लोबल पोर्टफोलियो संभालती है, जिसकी सालाना क्षमता 70 मिलियन TEUs से अधिक है।
वहीं, APSEZ वर्तमान में भारत में 15 पोर्ट और टर्मिनल और चार अंतरराष्ट्रीय पोर्ट्स का संचालन कर रही है। कंपनी की कार्गो हैंडलिंग क्षमता 653 मिलियन टन सालाना है और इसका लक्ष्य 2030 तक 1 बिलियन टन के आंकड़े को छूना है।












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