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UP election 2022: 10 मार्च के बाद किसका समर्थन करेंगे कुंडा के राजा भैया ? जानिए

प्रतापगढ़, 21 फरवरी: यूपी में किसी भी पार्टी की सरकार हो प्रतापगढ़ जिले के कुंडा इलाके की जनता एक ही नाम को जानती है- स्थानीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया। राजा भैया का नाम एक जमाने में विवादों का दूसरा नाम बन चुका था। आज स्थिति उनकी ओर से और सरकार की ओर से, दोनों तरफ से बदली हुई नजर आती है। ना तो उनकी वजह से पहले की तरह अप्रिय खबरें ही आती हैं और ना ही उनका मौजूदा सरकार में किसी भी तरह का दबदबा ही नजर आता है। इसबार भी यूपी चुनाव शुरू होने से पहले फिर एकबार उनके समाजवादी पार्टी के साथ जाने की चर्चा शुरू हुई थी। लेकिन, इन अटकलों को खुद अखिलेश यादव ने ही खारिज कर दिया था। दूसरी तरफ, आज की तारीख में राजा भैया सिर्फ एक सीट पर अकेले निर्दलीय चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उनकी अपनी पार्टी है और वो 18 सीटों पर मैदान में है। उन्हें उम्मीद है कि चुनाव के बाद स्थिति ऐसी हो सकती है, जिसमें उनके सामने भी भूमिका निभाने वाली परिस्थितियां बन सकती हैं।

18 सीटों पर अकेले मैदान में है जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक)

18 सीटों पर अकेले मैदान में है जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक)

प्रतापगढ़ जिले के कुंडा इलाके में आज भी राजा भैया उर्फ रघुराज प्रताप सिंह का दबदबा है। वो लगभग 30 वर्षों से कुंडा विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं। लेकिन, पहली बार उनकी पार्टी जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) प्रदेश की 18 सीटों पर दांव आजमा रही है। इसलिए उनके सपने भी पहले से ज्यादा बड़े हुए हैं और इनकी उम्मीद इसी बात पर टिकी है कि अगर अंतिम समय में किसी भी दल के सामने बहुमत का गणित उलझ गया तो इनकी लॉटरी लग सकती है। वैसे चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिस तरह से उन्हें पहचानने तक से इनकार कर दिया था, उसको लेकर सवाल जरूर बने हुए हैं।

अपने क्षेत्र में आज भी दिखती है राजा भैया की लोकप्रियता

अपने क्षेत्र में आज भी दिखती है राजा भैया की लोकप्रियता

यह बात सही है कि प्रतापगढ़ के इलाके में राजा भैया को स्थानीय स्तर पर हमेशा से काफी समर्थन मिलता रहा है। न्यूज18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक खासकर युवाओं के बीच उनकी आज भी अच्छी लोकप्रियता देखने को मिल रही है। वह प्रचार के लिए निकलते हैं तो उनके साथ मोटरसाइकिल पर लड़कों का एक काफिला भी होता है, जो खुद को 'राजा भैया यूथ ब्रिग्रेड' कहकर बुलाता है। उनकी सभा में भीड़ भी काफी जुटती है। वैसे उनका कहना है कि, 'सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि महिलाएं और बुजुर्ग भी मेरे साथ हैं- युवाओं का जोश और बुजुर्गों का होश मेरे साथ है।'

यूपी चुनाव से पहले मुलायम से मिले थे

यूपी चुनाव से पहले मुलायम से मिले थे

रघुराज प्रताप सिंह समाजवादी पार्टी की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। लेकिन, जब 2019 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने मायावती की बसपा के साथ गठबंधन किया तो उन्हें साइकिल से उतर जाना पड़ गया। मायावती की सरकार ने उन्हें आतंकवाद निरोधी कानून (पोटा) के तहत गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया था। अब सपा-बसपा फिर से अलग राह चल रही है तो लगा था कि इस चुनाव में राजा भैया को फिर से साइकिल पर बैठने को मौका मिल जाएगा। पिछले साल नवंबर में जब वे सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव से लखनऊ में मिलने पहुंचे थे तो लगा था कि वह फिर से अखिलेश के साथ आ सकते हैं। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ।

अखिलेश पहचानने से भी कर चुके हैं इनकार

अखिलेश पहचानने से भी कर चुके हैं इनकार

हाल ही में जब अखिलेश यादव से कुंडा विधायक के साथ गठबंधन को लेकर सवाल किया गया था तो उन्होंने उन्हें पहचानने तक से इनकार करते हुए पूछा था- 'कौन राजा भैया?' सपा प्रमुख के इस रवैए के बारे में रघुराज प्रताप सिंह कहते हैं, 'मैं नहीं जानता कि अखिलेश की मेरे लिए बेरुखी क्यों है? आपको उनसे पूछना चाहिए, आप गलत आदमी से पूछ रहे हैं। वो क्या सोच रहे हैं या क्या कह रहे हैं, इसका जवाब मैं नहीं दे सकता।' हालांकि, उनका यह भी कहना है कि उन्होंने विधानसभा के अंदर या बाहर कभी भी बीजेपी का समर्थन नहीं किया है। कुंडा के नेता का कहना है कि अगर वो 1993 से विधायक हैं तो इसकी वजह है उनकी उपलब्धता। उनके मुताबिक चुनाव जीतने के लिए सिर्फ विकास काम नहीं आता। लोगों के बीच सहज उपलब्धता बहुत ही जरूरी है और उनका कहना है, 'मेरे लोग कभी भी मुझसे मिल सकते हैं।'

10 मार्च के बाद किसका समर्थन करेंगे राजा भैया ?

10 मार्च के बाद किसका समर्थन करेंगे राजा भैया ?

यानि आज की तारीख में वे खुद को बीजेपी से दूर बताते हैं तो समाजवादी पार्टी ने उनसे पहले ही मुंह मोड़ लिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर 10 मार्च के चुनाव नतीजों के बाद किसी भी पार्टी को उनकी जरूरत पड़ी तो वह किस ओर जाएंगे। इसका संकेत उनकी इस बातों में छिपा हुआ है, 'मेरी पार्टी जनसत्ता दल 2018 में बनी और हम 18 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। मेरी पार्टी अकेली ऐसी है, जिसने किसी के साथ भी चुनाव-पूर्व गठबंधन नहीं किया है। हम लोगों में विश्वास करते हैं और हम किसी भी पार्टी की बैसाखी नहीं लेना चाहते और ना ही हमें इसकी जरूरत है। चुनाव के बाद जो भी परिस्थिति पैदा होगी, हम अपने समर्थकों से बात करेंगे और उसके बारे में फैसला लेंगे।'

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