UP Election 2022: दबंग फैमिली के तीन किरदार: रूपाली, इकरा और शाइस्ता
लखनऊ, 22 जनवरी। 2022 के विधानसभा चुनाव में तीन महिला उम्मीदवार ऐसी हैं जिनको इसलिए टिकट मिला है क्योंकि वे दबंग परिवार से ताल्लुक रखती हैं। रुपाली दीक्षित आगरा के फतेहाबाद सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। उनके पिता अशोक दीक्षित हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।

इकरा हसन कैराना विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार हैं। पहले उन्हें सपा उम्मीदवार घोषित किया गया था। लेकिन आखिरी समय में उन्होंने निर्दलीय पर्चा दाखिल कर दिया। उनके भाई और मौजूदा सपा विधायक नाहिद हसन गुंडा एक्ट के तहत जेल में हैं। शाइस्ता परवीन को एआइएमआइएम ने प्रयागराज पश्चिम सीट से उम्मीदवार बनाया है। उनके पति अतीक अहमद पर हत्या समेत कुल 83 मामले दर्ज हैं। फिलहाल वे गुजरात के सावरमती जेल में बंद हैं। इनमें रुपाली दीक्षित और इकरा हसन विदेश में पढ़ी-लिखी हैं।

रूपाली दीक्षित: पिता पूर्व नेता, अब जेल में
रूपाली दीक्षित ने इंग्लैंड के कार्डिफ यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की है। कुछ साल तक उन्होंने कई मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी की। 2016 में वे दुबई में नौकरी कर रहीं थीं। उनका सालाना पैकेज 30 लाख रुपये था। राजनीति से इतर उनकी एक अलग दुनिया थी। लेकिन पिता के एक फोन ने सबकुछ बदल दिया। उनके पिता अशोक दीक्षित की गिनती इलाके के बाहुबलियों में होती थी। उन पर करीब 48 मुकदमे दर्ज थे। 2015 में हत्या के एक मामले में अशोक दीक्षित को उम्र कैद की सजा हो गयी। अशोक दीक्षित ने भी अन्य बहुबलियों की तरह राजनीति में इंट्री ली थी। 2002 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बसपा के टिकट पर फतेहाबाद सीट से चुनाव लड़ा था। लेकिन वे भाजपा के छोटे लाल वर्मा से हार गये थे। फिर 2007 के चुनाव में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा। इस बार तीसरे स्थान पर फिसल गये। दबंग होने के बाद भी अशोक दीक्षित विधायक नहीं बन पाये थे। अशोक दीक्षित ने 2015 में रूपाली को एक संदेश भेजा था, "तुम्हारा बाप बूढ़ा हो गया है। अब तुम्हारी जरूरत है।" रुपाली को नौकरी छोड़ने के लिए अनुबंध की कुछ शर्तें पूरी करनी थीं। आखिरकार 2016 में उनका इस्तीफा मंजूर हुआ। फिर वे अपने पिता का अधूरा सपना पूरा करने के लिए घर लौट आयीं। वे भाजपा में शामिल हुईं। इस पर विवाद भी हुआ था। नतीजतन भाजपा ने रूपाली को 2017 के चुनाव में टिकट नहीं दिया। 2022 में रुपाली की संयोग से किस्मत खुली। समाजवादी पार्टी ने शुरू में फतेहाबाद सीट से राजेश कुमार शर्मा को उम्मीदवार बनाया था। लेकिन तीन दिन बाद अचानक राजेश का टिकट काट कर रूपाली को सपा प्रत्याशी बना दिया गया।

इकरा हसन: विधायक भाई जेल में
इकरा हसन ने शुक्रवार को कैराना विधानसभा सीट से निर्दलीय पर्चा दाखिल किया। उन्होंने ये बात साफ की कि उनके भाई नाहिद हसन ही यहां से सपा के उम्मीदवार हैं। इकरा ने लंदन यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल लॉ की डिग्री हासिल की है। वे अभी 28 साल की हैं। वे कैराना के एक राजनीतिक परिवार से आती हैं। उनके भाई नाहिद हसन 2014 के उपचुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में विजयी रहे थे।। इकरा के पिता मुनव्वर हसन भी कैराना से विधायक रहे थे। वे सासंद भी चुने गये थे। इकरा की मां बेगम तब्बसुम हसन 2009 और 2018 (उपचुनाव) में सांसद चुनी गयीं थीं। उत्तर प्रदेश के शामली जिले का कैराना गांव राजनीतिक कारणों से पूरे देश में चर्चित है। इस लिहाज से कैरान विधानसभा सीट और कैराना लोकसभा सीट, भी चर्चित हैं। इकरा हसन जब लंदन में (2019) थीं तब उन्होंने सीएए के खिलाफ भारतीय उच्चायोग के सामने प्रदर्शन किया था। वे तभी चर्चा में आयीं थीं। उनके भाई नाहिद के जेल जाने की वजह से उन्हें चुनावी मैदान में उतरना पड़ा है। अगर नाहिद का पर्चा खारिज होता है तो कम से कम वे मुकाबले में बनी रहें। 2020 में नाहिद के किलाफ गुंडा एक्ट के तहत एफआइआर दर्ज की गयी थी। पुलिस के मुताबिक नाहिद हसन एक गैंग के लीडर हैं जिसका आंतक पूरे कैराना जिले में है। इस मुकदमे के तहत ही वे जेल में हैं। नाहिद को 2020 में भी जमीन धोखाधड़ी के एक मामले में जेल हुई थी। इकरा हसन ने आरोप लगाया है कि भाजपा के इशारे पर उनके भाई को जेल भेजा गया है।

शाइस्ता परवीन: पूर्व विधायक पति अब जेल में
शाइस्ता परवीन प्रयागराज के गैंगस्टर अतीक अहमद की पत्नी हैं। उन्हें एआइएमआइएम ने प्रयागराज पश्चिम सीट से प्रत्याशी बनाया है। अतीक अहमद पर हत्या समेत 83 मामले दर्ज हैं और वे सावरमती जेल में बंद हैं। अतीक पर 17 साल की उम्र में हत्या का पहला आरोप लगा था। उन्होंने 1989 में पहली बार इस सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। तब अतीक के आंतक से पूरा इलाका कांपता था। इसके बाद वे 2002 तक लगातार विधायक चुने जाते रहे। वे पांच बार विधायक बने थे। 2004 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने अतीक को फूलपुर से सपा उम्मीदवार बना दिया। वे सांसद बन गये। प्रयागराज पश्चिम सीट उस समय इलाहाबाद पश्चिम सीट कहलाती थी। अतीक के सांसद बन जाने के बाद 2004 में इस सीट पर उपचुनाव हुआ। अतीक ने अपने भाई खालिद अजीम को मैदान में उतारा। लेकिन बसपा के राजू पाल ने खालिद को हरा दिया। पहली बार किसी ने माफिया डॉन अतीक के वर्चस्व को ध्वस्त किया था।

ऐसे खत्म हुआ अतीक अहमद का वर्चस्व
इस बीच जनवरी 2005 में विधायक राजू पाल जब अपने गांव के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने जा रहे थे तब उनकी हत्या कर दी गयी। एक विधायक की हत्या से पूरे उत्तर प्रदेश में खलबली मच गयी थी। हत्या का आरोप अतीक अहमद और उनके भाई खालिद पर लगा था। 2005 में खालिद अजीम सपा के टिकट पर विधायक बने। लेकिन 2007 के चुनाव में राजू पाल की पत्नी पूजा पाल (बसपा) ने इस सीट पर अतिक परिवार का दबदबा हमेशा के लिए खत्म कर दिया। पूजा 2012 में भी विधायक बनीं। 2017 में भाजपा ने इस सीट पर लालबहादुर शास्त्री के नाती सिद्धार्थ नाथ सिंह खड़ा किया जो विजयी रहे। 2017 में अतीक अहमद के बेटे हसन अतीक ने भी निर्दलीय चुनाव लड़ा था। लेकिन उसे सिर्फ 4 हजार वोट ही मिले थे। जिस अतीक की कभी इलाहाबाद पश्चिम में तूती बोलती थी अब उसका कोई नामलेवा नहीं था। बाहुबलियों की राजनीति बहुत लंबी नहीं होती। लेकिन असदुद्दीन ओवैसी ने अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता को प्रत्याशी बना कर नया दांव खेला है।
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