यूपीकोका बिल की 7 खास बातें, सीएम योगी ने विधानसभा में किया पेश
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नई दिल्ली। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज विधानसभा में उत्तर प्रदेश ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट, यानी यूपीकोका बिल पेश किया। महाराष्ट्र के मकोका कानून की तर्ज पर पेश किए गए इस बिल का मकसद यूपी में अपराध, माफियाराज पर नकेल कसना है। इस बिल अपराधियों के सजा के लिए कड़े प्रावधान हैं। अब इस कानून को विधानसभा से पारित होने की देरी है। आइए जानते हैं यूपीकोका बिल की 5 खास बातें ..

1. महाराष्ट्र सरकार ने 1999 में मुंबई में अंडरवर्ल्ड के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए मकोका बिल बनाया था। मकोका कानून के बाद अंडरवर्ल्ड के संगठित अपराध पर काफी हद तक लगाम लगी थी। अब इसी तर्ज पर यूपीकोका कानून लाया गया है।
2. यूपीकोका कानून के तहत जिन अपराधियों को गिरफ्तार किया जाएगा उनके खिलाफ 180 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होगी। मौजूदा कानून के अनुसार जो अपराधी गिरफ्तार किए जाते हैं उनके खिलाफ 60 से 90 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल करने होती है। ऐसे में यूपीकोका कानून के तहत गिरफ्तार किए गए अपराधी के लिए मुश्किल काफी बढ़ जाएगी और उसे छह महीने से पहले जमानत नहीं मिल सकती है।
3. यूपीकोका कानून के तहत पुलिस अपपराधी को 30 दिन तक रिमांड में ले सकती है, जबकि मौजूदा कानून के तहत पुलिस अपराधी को सिर्फ 15 दिनों तक के लिए ही रिमांड में ले सकती है।
4. योगी सरकार के प्रस्तावित कानून के पास होने के बाद इस कानून के तहत अपराधी को कम से कम पांच साल की सजा मिलेगी, जबकि अधिकतम सजा का प्रावधान फांसी की सजा होगी।
5. इस कानून के तहत मामलों की निगरानी खुद प्रदेश के गृह सचिव करेंगे, साथ ही मंडल स्तर के आईजी रैंक के अधिकारी की संस्तुति के बाद ही आरोपी पर इस कानून के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। यही नहीं जिला स्तर पर अगर कोई संगठित अपराध को अंजाम देने वाला अपराधी है तो उसकी रिपोर्ट कमिश्नर को डीएम देंगे।
6. प्रस्तावित बिल में गैरकानूनी तरीके से कमाई गई संपत्ति को भी शामिल किया गया है। साथ ही इस बिल में यूपीकोका से जुड़े तमाम मामलों की सुनवाई के लिए अलग से विशेष अदालत बनाए जाने का प्रावधान किया गया है।
7. बता दें कि इससे पहले वर्ष 2007 में मायावती भी यह कानून लाना चाहती थीं लेकिन केंद्र सरकार ने उन्हें इसकी मंजूरी नहीं दी थी।












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