एक्शन में यूपी के CM, अधिकारी अब भी नींद में! प्रमुख सचिव के आदेश की अवहेलना
यूपी चुनाव के बाद नई सरकार के बनते ही जनता में विश्वास और बेहतर व्यवस्था की उम्मीदें उफान पर हैं। यहां तक की सीएम योगी भी एक्शन मोड में हैं तो वहीं अधिकारियों का ढीला रवैया जारी है।
वाराणसी। यूपी के नए सीएम फुल एक्शन मोड में हैं लेकिन लगता है की अधिकारी अब भी नींद में ही हैं! यूपी में नई सरकार के गठन के बाद ही प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे कि अधिकारी समय से अपने दफ्तर पहुंचे और अपनी जिम्मेदारियों का बेहतर तरीके से निर्वहन करें। लेकिन प्रधानमंत्री के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में अधिकारियों पर प्रमुख सचिव के इस दिशा निर्देश का कोई खास असर नहीं पड़ता दिखाई दे रहा है।

नगर निगम के आयुक्त नदारद
यूपी चुनाव के बाद नई सरकार के बनते ही जनता में विश्वास और बेहतर व्यवस्था की उम्मीदें उफान पर हैं। नए सीएम योगी आदित्यनाथ के तेज-तर्रार रवैए ने जनता को ये मानने पर मजबूर कर दिया कि अब यूपी का विकास हो कर ही रहेगा। इतना ही नहीं सुस्त प्रशासन को भी चुस्त और दुरुस्त कर जनता की समस्याओं का बेहतर तरीके से निबटारा किया जाएगा। इसके लिए उत्तरप्रदेश सरकार ने अधिकारियों को अपने कामकाज और रवैए में परिवर्तन लाने का निर्देश दिया मगर लगता है सीएम के एक्शन मोड का अधिकारियों पर कोई असर नहीं है।

मामला है पीएम के अतिसंवेदनशील क्षेत्र काशी का जहां साढ़े दस बजे तक भी अधिकारी अपने दफ्तर के दरवाजे तक नहीं पहुंचे। हमने रियलिटी चेक के माध्यम से नगर निगम के अधिकारियों की पड़ताल की और पाया की अधिकारी अब भी गहरी नींद में ही सोए हैं। ये दफ्तर है नगर आयुक्त एसपी शाही का और यहां मिलने का समय सुबह 10 से 12 लिखा है लेकिन जनाब अब तक अपने दफ्तर नहीं पहुंचे। जब हमने इस बाबत कार्यालय के चपरासी से बात की तो जवाब मिला की साहब गंगा अभियान से जुड़े विशेष कार्य में व्यस्त हैं और तो और चपरासी के मुताबिक ये जरूरी नहीं कि नगर आयुक्त साहब अपने दफ्तर पर ही आकर काम करें। साहब तो अपने आवास पर भी रहकर काम कर सकते हैं।

नगर स्वास्थ्य अधिकारी भी रहे गायब
ऐसा नहीं था की वाराणसी नगर निगम में सिर्फ नगर आयुक्त साहब ही अपने दफ्तर से गायब थे बल्कि नगर स्वस्थ्य अधिकारी भी अपने दफ्तर से नदारद मिले और कार्यालय से ही जुड़े एक व्यक्ति घनश्याम ने बताया कि नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एके दुबे आसपास ही हैं और जल्द अपने दफ्तर पहुंच जाएंगे।


बिजली विभाग में भी दिखी सुस्ती
अव्यवस्था यहीं तक नजर आती तो भी ठीक था बिजली और स्वास्थ्य से जुड़े अधिकारी भी लापरवाह रवैया अख्तियार किए हुए थे और चिकित्सा अपर निदेशक, विद्युत वितरण के अधिशासी अभियंता दफ्तर पर भी अधिकारियों की गैर मौजूदगी ढेरों सवाल खड़े कर रही थी। घड़ी की सुई साढ़े दस के पर थी मगर अधिकारी अपने कुर्सियों पर तशरीफ तक नहीं रख पाए थे। विद्युत वितरण निगम के अधिशाषी अभियंता का तो दफ्तर पहुंचने का समय ही 11 बजे के बाद होता है। कार्यालय में मिली महिला कर्मचारी ने बताया की साहब 11 बजे तक आते हैं।
ऐसे कैसे होगा विकास?
स्वच्छता, चिकित्सा और बिजली से जुड़े अधिकारियों के कामकाज का आलम हैरान करने वाला है और वो भी तब जब खुद सीएम आदित्यनाथ योगी अधिकारियों को जिम्मेदारी से अपने काम करने का निर्देश दे रहे हों। ऐसे में क्या नई सरकार के कामकाज में सकारात्मक परिवर्तन आ पाएगा! कहना जल्दबाजी होगी।












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