UP Board Exam 2026: गाजियाबाद से बांदा तक, उत्तर प्रदेश के 254 बंदी इस साल दे रहे बोर्ड एग्जाम
UP Board Exams 2026: उत्तर प्रदेश की जेलों से इस बार एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो समाज के लिए उम्मीद की नई किरण पेश करती है। अपराध की दुनिया को पीछे छोड़, सुधार की राह पर चलते हुए इस साल राज्य की विभिन्न जेलों में बंद 254 कैदी यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में शामिल होने जा रहे हैं।
जेल प्रशासन की इस अनूठी पहल ने उन कैदियों को दोबारा किताबों से जुड़ने का मौका दिया है, जिन्होंने सालों पहले अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। जेल की चहारदीवारी के भीतर अब केवल सजा नहीं, बल्कि शिक्षा का भी संचार हो रहा है। प्रशासन इसे "सुधार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम" मान रहा है, जो कैदियों के मानसिक परिवर्तन और उनके पुनर्वास में मील का पत्थर साबित होगा।

परीक्षा के आंकड़े, कहां से कितने परीक्षार्थी?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस शैक्षणिक सत्र में हाई स्कूल (कक्षा 10) के लिए 96 कैदी और इंटरमीडिएट (कक्षा 12) के लिए 158 कैदी पंजीकृत हुए हैं।
विभिन्न जिलों की भागीदारी इस प्रकार है-
| जेल का नाम | 10वीं के परीक्षार्थी | 12वीं के परीक्षार्थी | कुल | |
|---|---|---|---|---|
| 1 | गाजियाबाद | 20 | 43 | 63 |
| 2 | बरेली | 23 | 29 | 52 |
| 3 | लखनऊ | 21 | 18 | 39 |
| 4 | वाराणसी | 12 | 11 | 23 |
| 5 | गोरखपुर | 2 | 19 | 21 |
| 6 | फिरोजाबाद | 10 | 18 | 28 |
| 7 | बांदा | - | 3 | 3 |
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बैरकों में बदला माहौल, जेल अब बनीं अध्ययन केंद्र
जेल अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में जेलों के भीतर शैक्षणिक वातावरण को प्राथमिकता दी गई है। अब जेलों में केवल बैरक नहीं, बल्कि विशेष अध्ययन केंद्र संचालित हो रहे हैं। शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए ये व्यवस्थाएं की गई हैं-
कोचिंग और मुफ्त सामग्री: कैदियों को विषयवार कोचिंग दी जा रही है। साथ ही, किताबें और स्टेशनरी मुफ्त उपलब्ध कराई जाती है।
पीयर लर्निंग: जेल में बंद उच्च शिक्षित कैदी अपने सह-कैदियों को पढ़ाने में शिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं।
आधुनिक क्लासरूम: कई जेलों में समर्पित क्लासरूम और लाइब्रेरी बनाई गई हैं।
काउंसलिंग: नियमित प्रेरक सत्र (Motivational Sessions) आयोजित किए जाते हैं ताकि कैदियों का नजरिया सकारात्मक हो सके।
अपराध से मुक्ति और हुनर का साथ
वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि शिक्षा कैदियों में आत्मविश्वास भरती है। रिहाई के बाद शिक्षित व्यक्ति के पास रोजगार के बेहतर अवसर होते हैं, जिससे उनके दोबारा अपराध की ओर मुड़ने की संभावना नगण्य हो जाती है।
पढ़ाई के साथ-साथ जेलों में व्यावसायिक प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है-
- बढ़ईगीरी और सिलाई
- हस्तशिल्प और कलाकृतियां
- फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स
पिछला ट्रैक रिकॉर्ड, 2025 में कितनों को मिली सफलता
कैदियों का पिछला प्रदर्शन यह साबित करता है कि वे पढ़ाई को लेकर गंभीर हैं। साल 2025 के आंकड़ों पर नजर डालें-
- कुल 199 कैदियों ने परीक्षा दी थी।
- 182 कैदी सफल हुए, जिसमें कुल पास प्रतिशत 91% रहा।
- 10वीं का परिणाम 96.81% और 12वीं का 86.67% रहा था।
इस साल परीक्षार्थियों की संख्या में भारी वृद्धि यह दर्शाती है कि जेल अब केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार का केंद्र बन चुकी हैं।
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