UP BJP President: कौन होगा यूपी भाजपा का नया अध्यक्ष? नाम लगभग फाइनल! इसी हफ्ते होगा ऐलान, जाति रहेगा फैक्टर
UP BJP President Update News: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) करीब एक साल से खाली पड़ा प्रदेश अध्यक्ष का पद आखिरकार भरने की तैयारी में है। पार्टी हाईकमान ने दिल्ली और लखनऊ के बीच हुई अहम बैठकों में नए अध्यक्ष के नाम पर लगभग सहमति बना ली है। संकेत साफ हैं कि इस हफ्ते ही यूपी BJP को नया अध्यक्ष मिल सकता है।
संगठन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने अपने पसंदीदा नाम पर मुहर लगा दी है और अब सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी है। 01 दिसंबर को लखनऊ में भाजपा और आरएसएस की संयुक्त बैठक के दौरान केंद्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और आरएसएस सह सरकार्यवाह अरुण कुमार ने प्रदेश नेतृत्व के सामने संभावित अध्यक्ष का नाम साझा किया। इस मीटिंग में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक, मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह मौजूद थे।

🟡 ब्राह्मण, ओबीसी और दलित के 9 नामों पर हुई चर्चा
🔹 इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक दिल्ली में हुई हालिया बैठक में भाजपा नेतृत्व ने ब्राह्मण, ओबीसी और दलित-इन तीनों सामाजिक वर्गों से कुल 9 उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा की थी। इसी पैनल में से एक नाम को अब फाइनल किया गया है।
🔹 संभावित उम्मीदवारों की लिस्ट भले लंबी हो, लेकिन छह नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। ब्राह्मण वर्ग से पूर्व डिप्टी सीएम और राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। संगठन और सरकार दोनों जगह उनके लंबे अनुभव को बड़ी पूंजी के रूप में देखा जा रहा है। इनके अलावा हरीश द्विवेदी भी ब्राह्मण चेहरे के रूप में रेस में हैं, जिनकी पहचान संगठनात्मक समझ और अनुशासित कार्यशैली के लिए है।
🔹 ओबीसी फॉर्मूले की बात करें तो धर्मपाल सिंह और बीएल वर्मा का नाम सबसे ऊपर है। दोनों लोध समुदाय से आते हैं और गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक पर अच्छी पकड़ रखते हैं, इसलिए हाईकमान इन्हें भी गंभीरता से तौल रहा है।
🔹 दलित नेताओं में रामशंकर कठेरिया और एमएलसी विद्या सागर सोनकर के नाम चर्चा में हैं। दोनों अपने क्षेत्रों में मजबूत जनाधार रखते हैं और पार्टी की कोर राजनीतिक रणनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
🔹 अगर ब्राह्मण और ओबीसी फॉर्मूला किसी कारण पर सहमति तक नहीं पहुंचता है, तो पार्टी दलित अध्यक्ष का "सरप्राइज विकल्प" भी चुन सकती है। यह फैसला समाजवादी पार्टी के PDA नैरेटिव को राजनीतिक जवाब देने की रणनीति के तौर पर देखा जा सकता है।
🟡 इस हफ्ते नया अध्यक्ष, साथ में निगम-बोर्ड नियुक्तियां भी
बीजेपी ने प्रदेश में अपने संगठनात्मक ढांचे को 98 इकाइयों में बांटा है। इनमें से 84 जिला अध्यक्ष पहले ही नियुक्त किए जा चुके हैं। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया भी लगभग पूरी मानी जा रही है। यही वजह है कि समन्वय बैठक में बीएल संतोष ने संभावित नाम साझा कर दिया। संकेत साफ हैं कि बीजेपी का संगठनात्मक बदलाव अब तेज गति से आगे बढ़ेगा।
संगठन से जुड़े सूत्र बताते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा होते ही निगम और बोर्डों में भी नई नियुक्तियां शुरू होंगी। प्रदेश संगठन का पूरा ढांचा मजबूत करने के उद्देश्य से यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के लिए जिस नाम पर हाईकमान ने हरी झंडी दी है, उसकी घोषणा सिर्फ समय की बात है। राजनीतिक हलकों में उत्सुकता है कि आखिर वह कौन नेता है जिसे बीजेपी अपने सबसे बड़े राज्य का कमान सौंपने जा रही है। ऐलान इस हफ्ते किसी भी दिन हो सकता है और इसके बाद संगठन में बड़े बदलावों का सिलसिला शुरू होना तय है।
🟡 SIR मामले पर संघ क्यों हुआ नाराज
लखनऊ में हुई "विचार परिवार बैठक" में SIR सबसे बड़ा मुद्दा बना रहा। संघ नेताओं ने साफ कहा कि बीजेपी के सांसद और विधायक SIR प्रक्रिया में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा रहे। यह वह प्रक्रिया है जिसमें वोटर लिस्ट की गड़बड़ियों को ठीक किया जाता है। संघ ने निर्देश दिया कि जनप्रतिनिधि जमीनी स्तर पर जाकर लोगों को जागरूक करें और SIR को सफल बनाने में सहायता दें।
यह नाराजगी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि SIR को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है और भाजपा नेतृत्व इसे लेकर किसी भी तरह की चूक नहीं चाहता।
🟡 राम मंदिर पूरा होने के बाद बड़ा अभियान बनेगा
बैठक में राम मंदिर निर्माण पर भी लंबी चर्चा हुई। शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि अयोध्या में राम मंदिर का मुख्य ढांचा पूरा होना सरकार और संगठन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। इसलिए निर्णय हुआ कि आने वाले महीनों में मंदिर को लेकर बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान चलाया जाएगा।
बीजेपी को यह भी समझना है कि पिछले साल अयोध्या लोकसभा सीट (फैजाबाद) में हार ने पार्टी को चौंकाया था। ऐसे में मंदिर पूरा होने के बाद इसका संदेश व्यापक रूप से जनता तक पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है।
🟡 संगठन-सरकार तालमेल पर फोकस
समन्वय बैठक में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल पर भी जोर दिया गया। कई मुद्दों पर संघ ने अपने सुझाव साझा किए, खासकर उन विभागों के कामकाज पर जहां जनता सीधे प्रभावित होती है। प्रदेश के मंत्रियों के साथ संघ की पिछले महीने हुई समीक्षा बैठकों की रिपोर्ट भी मुख्यमंत्री योगी और बीजेपी नेतृत्व के साथ साझा की गई।
बीजेपी जल्द ही प्रदेश में बूथ सशक्तिकरण अभियान, सामाजिक समरसता कार्यक्रम, और सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने पर नया रोडमैप जारी कर सकती है।












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