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UGC नियमों पर रोक के बाद क्या बोले निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री? डिप्टी CM ने भी दिया बयान

Supreme Court Stays UGC Rules: देश के उच्च शिक्षण संस्थानों (Higher Education Institutions) में समानता लाने के नाम पर लागू किए गए UGC रेगुलेशन 2026 पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। इस मामले पर अब प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।

यूजीसी रेगुलेशन पर रोक लगाए जाने के बाद बरेली के निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने इन नियमों के संस्थागत दुरुपयोग को लेकर गंभीर चेतावनी दी है।

Alankar Agnihotri

'जातिगत भेदभाव को संस्थागत हथियार न बनाएं'

निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने एएनआई (ANI) से बात करते हुए कहा कि शिक्षा में जाति आधारित भेदभाव को संस्थागत उपकरण के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जातिगत भेदभाव से जुड़ी धाराओं का इस्तेमाल अब परिवारों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है, चाहे वे कितने भी मेधावी क्यों न हों। उनका कहना था कि यदि इसे सही तरीके से नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसके गंभीर सामाजिक परिणाम होंगे।

अग्निहोत्री ने इन नियमों के दुरुपयोग पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, 'अगर आपका बेटा पढ़ाई में अच्छा है, तो उस पर आरोप लगाए जाएंगे और उसके वेतन का शोषण किया जाएगा। इसी तरह अगर आपकी बेटी या बहू विश्वविद्यालय में पढ़ती है, तो उसे निशाना बनाया जाएगा। ऐसी स्थिति पैदा हो जाएगी कि बेटियों और बहुओं को आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।' उन्होंने चेतावनी दी कि इन प्रथाओं से पूरा समाज प्रभावित होगा।

देश में 'गृह युद्ध' जैसी स्थिति की चेतावनी

राष्ट्रीय एकता पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक समूहों के बीच लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष देश को नुकसान पहुंचाएंगे। अग्निहोत्री के अनुसार, 'अगर दो समूह आपस में लड़ेंगे, तो यह राष्ट्र की हानि है। इससे देश में गृह युद्ध जैसी स्थिति विकसित होती है, जो हमें बाहरी दुश्मनों से असुरक्षित बनाती है। आने वाले कुछ वर्षों में हमारा देश आंतरिक खतरों के कारण असुरक्षित हो जाएगा।'

सरकार और यूजीसी की भूमिका पर सवाल

जब उनसे यूजीसी और सरकार की भूमिका के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि पूरे तंत्र को वापस लेने (Rollback) की जरूरत नहीं है, बल्कि प्रशासन समिति इसे संभालने में सक्षम है। उन्होंने अधिकारियों की लापरवाही की आलोचना करते हुए कहा कि जो लोग इन नियमों को लागू कर रहे हैं, वे ही भविष्य की समस्याओं के लिए जिम्मेदार होंगे। उन्होंने कहा, 'इन लोगों को देखना चाहिए कि इनके फैसलों की वजह से समाज के बच्चे आत्महत्या की ओर बढ़ रहे हैं।'

SC-ST एक्ट और 'बदले' की भावना का जिक्र

अग्निहोत्री ने मौजूदा कानूनों, विशेष रूप से SC-ST एक्ट की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार 'फर्जी' तरीके से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के खिलाफ जाकर नियम सेट कर रही है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, 'अब जनरल और ओबीसी वर्ग इस आधार पर बदला लेगा। अब समाज बदला लेगा।" उन्होंने न्यायपालिका में विश्वास जताते हुए कहा कि पीड़ित अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए।

दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मोर्चा खोल दिया है। नोएडा में मीडिया से बात करते हुए अखिलेश ने साफ कहा कि शिक्षा के मंदिर में ऐसी नीतियां नहीं होनी चाहिए जो न्याय के बजाय अन्याय का मार्ग प्रशस्त करें। उन्होंने केंद्र को आईना दिखाते हुए पूछा कि आखिर पुरानी गलतियों से सरकार ने क्या सीखा?

गणतंत्र दिवस पर इस्तीफे से मचा था हड़कंप

दरअल, बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी के मौके पर अपने पद से त्यागपत्र देकर सबको चौंका दिया था। अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि माघ मेले में शंकराचार्य और उनके ब्राह्मण बटुकों के साथ अन्याय हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने यूजीसी के नए एक्ट और यूपी सरकार की नीतियों पर 'ब्राह्मण विरोधी' होने का गंभीर आरोप लगाए । हालांकि, शासन ने इस कदम के बाद उन्हें निलंबित करते हुए जांच के आदेश भी जारी कर दिए।

'निर्दोष लोगों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए'

यूजीसी के नए नियमों पर रोक के बाद अखिलेश यादव ने बैलेंस लेकिन कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि, 'देखिए, यूजीसी पर बहस अब सुप्रीम कोर्ट में हो रही है, तो बहुत सारे पक्ष सामने आ जाएंगे। हमें उम्मीद है कि जो बातें अब तक छिपी थीं, वे चर्चा के दौरान स्पष्ट होंगी। हमारा मानना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए, लेकिन किसी भी सूरत में निर्दोष लोगों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।'

उन्होंने कहा कि, '2012 में भी रेगुलेशन आए थे, उनमें जो कमियां रहीं, क्या हमने उनसे कुछ सीखा? नए रेगुलेशन लाने से पहले पिछले अनुभवों पर गौर करना चाहिए था।' उन्होंने चिंता जताई कि अस्पष्ट नियमों के कारण पहले भी लोगों के साथ अन्याय होता रहा है।

UGC पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने क्या कहा?

यूजीसी नियमों पर रोक को लेकर यूपी सरकार के मंत्रियों ने भी अपनी बात रखी। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि, 'सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया कोई भी फैसला खुशी का विषय होता है, हम उसका सम्मान करते हैं।'

UGC पर ओपी राजभर क्या बोले?

इसके अलावा कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने कहा कि, 'सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कोई उंगली नहीं उठा सकता। आज कोर्ट ने स्टे दिया है, सबको अपनी बात रखने का अधिकार है। राज्य और केंद्र सरकारें संविधान का पालन कर रही हैं।'

आखिर सुप्रीम कोर्ट ने रोक क्यों लगाई?

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की बेंच ने UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 को फिलहाल स्थगित (Abeyance) कर दिया है।

कोर्ट की कड़ी टिप्पणियां:

  • 1. समाज का बंटवारा: कोर्ट ने कहा कि इन नियमों के 'व्यापक और खतरनाक परिणाम' हो सकते हैं, जो समाज को विभाजित कर सकते हैं।
  • 2. 2012 के नियम रहेंगे लागू: अदालत ने अनुच्छेद 142 का प्रयोग करते हुए निर्देश दिया कि जब तक इस मामले पर अंतिम फैसला नहीं आता, 2012 के रेगुलेशन ही प्रभावी रहेंगे।
  • 3. हॉस्टल पर आपत्ति: कोर्ट ने 'अलग हॉस्टल' बनाने जैसे प्रावधानों पर सख्त नाराजगी जताई और कहा कि 'हमें जातिविहीन समाज (Casteless Society) की ओर बढ़ना चाहिए, न कि पीछे की ओर।'
  • 4. अस्पष्ट भाषा: जजों ने कहा कि नए नियमों की भाषा 'पूरी तरह से अस्पष्ट' है और इनका दुरुपयोग शरारती तत्वों द्वारा किया जा सकता है।
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