मनोनीत सीटों को लेकर BJP संगठन और सरकार के बीच ठनी ?, जानिए किसने लगाया 'वीटो'

लखनऊ, 14 जुलाई : उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव और एमएलसी की सीटों पर जीत हासिल करने के बाद बीजेपी के सामने अब मनोनीत सीटों के चयन को लेकर संगठन और सरकार के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। बीजेपी के सूत्रों की माने तो एमएलसी की मनोनीत 6 सीटों को लेकर अब बीजेपी के अंदरखाने संगठन और सरकार के बीच खींचतान चल रही है। संगठन के स्तर पर जो लिस्ट तैयार की गई थी उसको सीएम योगी आदित्यनाथ ने नकार दिया है। बताया जा रहा है कि योगी इस लिस्ट में बदलाव चाहते हैं और इसको लेकर पिछले डेढ़ महीने से संगठन और सरकार के बीच चूहे बिल्ली का खेल चल रहा है।

मनोनित सीटों को लेकर संगठन की लिस्ट को योग की ना

मनोनित सीटों को लेकर संगठन की लिस्ट को योग की ना

यूपी में मनोनीत एमएलसी की 6 सीटें खाली हुईं हैं। इन सीटों पर हालांकि कई दावेदारों की तरफ से जोर आजमाइश हो रही है लेकिन संगठन ने जो लिस्ट सरकार को भेजी थी उस पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपना वीटो लगा दिया है। योगी की सहमति न मिलने की वजह से इन सीटों पर नाम नहीं घोषित हो पा रहे हैं। दरअसल संगठन में भी इसी महीने फेरबदल होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में बीजेपी के संगठन मंत्री सुनील बंसल और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह को कभी भी हटाया जा सकता है। बीजेपी के सूत्रों की माने तो स्वतंत्रदेव सिंह को पता है कि अब उनको इस पद पर नहीं रहना है इसलिए इस लिस्ट को लेकर उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है। दूसरे वह योगी के खेमे के नेता माने जाते हैं और योगी ने इस लिस्ट पर पहले ही वीटो लगा दिया है। इसलिए स्वतंत्रदेव ने भी इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी साध ली है।

विदाई से पहले अपने लोगों को सेट करना चाहते हैं बंसल

विदाई से पहले अपने लोगों को सेट करना चाहते हैं बंसल

दरअसल ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि राष्ट्रपति का चुनाव समाप्त होने के बाद यूपी में संगठन स्तर पर बड़े फेरबदल हो सकते हैं। बीजेपी के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राष्ट्रपति चुनाव में पूरा संगठन और सरकार लगी हुई है। इसलिए फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा लेकिन जैसे ही चुनाव बीतेगा यानी 20 जुलाई के बाद अध्यक्ष, संगठन मंत्री और अन्य कई पदों पर लोगों को हटाकर नए लोगों को बनाया जा सकता है। सूत्रों की माने तो बंसल चाहते हैं कि विदाई से पहले मनोनीत सीटों पर अपने मनमुताबिक लोगों को एडजस्ट किया जाए लेकिन उन्होंने जो लिस्ट भेजी थी उस पर योगी ने अपनी सहमति नहीं दी है।

क्षेत्रिय अध्यक्षों को मनोनीत सीटों से भेजन चाहता है संगठन

क्षेत्रिय अध्यक्षों को मनोनीत सीटों से भेजन चाहता है संगठन

बीजेपी के सूत्रों की माने तो दरअसल संगठन मंत्री सुनील बंसल के स्तर पर मनोनीत सीटों को लेकर एक लिस्ट तैयार की गई है। संगठन का एक धड़ा चाहता है कि संगठन के लिहाज से क्षेत्रिय अध्यक्षों को एमएलसी की सीटों पर मौका मिलना चाहिए। इसी के लिहाज से लिस्ट तैयार की गई थी लेकिन संगठन का दूसरा धड़ा यह चाहता है कि मनोनीत सीटों पर उन नामों को तरजीह दी जाए जिनसे आने वाले चुनाव में संगठन और सरकार को लाभ मिल सके। संगठन स्तर पर लिस्ट तैयार भी की गई है लेकिन इस लिस्ट पर सभी की आम सहमति नहीं बन पा रही है।

नए प्रदेश अध्यक्ष और नए संगठन मंत्री का सबको इंतजार

नए प्रदेश अध्यक्ष और नए संगठन मंत्री का सबको इंतजार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत मिलने के बाद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह को कैबिनेट मंत्री बना दिया गया था। हालांकि अटकलें तो उन्हें डिप्टी सीएम बनाए जाने को लेकर थी लेकिन अंत दाव में वह पिछड़ गए थे और ब्रजेश पाठक और केशव मौर्या ने बाजी मार ली थी। सरकार में पद पाने के बाद ऐसी उम्मीद थी कि बीजेपी जल्द ही नया प्रदेश अध्यक्ष घोषित करेगी लेकिन चुनाव के तीन महीने के बाद भी अब यूपी बीजेपी को उसका नया बॉस नहीं मिल पाया है। सरकार को बने हुए 100 दिन हो गए लेकिन संगठन अब भी स्वतंत्रदेव सिंह के पास ही है। लेकिन ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि जल्द ही बीजेपी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल सकता है।

सुनील बंसल की जगह धर्मपाल सिंह के आने की अटकलें

सुनील बंसल की जगह धर्मपाल सिंह के आने की अटकलें

उत्तर प्रदेश में यूपी बीजेपी में सुनील बंसल की एंट्री 2012 के चुनाव के बाद हुई थी। वह लगातार लगभग दस सालों से बीजेपी के संगठन को धार दे रहे हैं। इस दौरान बीजेपी ने यूपी में जीत का चौका भी लगाया। इसमें दो लोकसभा चुनाव और दो विधानसभा चुनाव शामिल हैं। बीजेपी की इस सफलता में संगठन मंत्री सुनील बंसल के योगदान को कम करके नहीं आंका जा सकता है। लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि संघ ने बंसल को दिल्ली भेजने का मन बना लिया है। उनको दिल्ली में किसी बड़े अभियान की जिम्मेदारी दी जा सकती है। वहीं दूसी तरफ यूपी में उनकी जगह धर्मपाल सिंह का नाम सामने आ रहा है। धर्मपाल सिंह यूपी में एबीवीपी के लिए काम भी कर चुके हैं और वर्तमान में वह झारखंड में संगठन के महासचिव हैं।

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