CM योगी के खिलाफ पहले भी उठ चुके हैं बगावत के सुर, खटीक के इस्तीफे की 5 बड़ी वजहें
लखनऊ, 20 जुलाई: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक तरफ जहां सरकार में जीरो टॉलरेंस की बात कर रहे हैं वहीं अब उनकी सरकार के भीतर से भी उनके खिलाफ आवाज उठने लगी है। यूपी के जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटीक के इस्तीफे के पीछे की कई वजहें हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि दिनेश खटीक ने यूपी के राज्यपाल को अपना इस्तीफा भेजने की बजाय अमित शाह को पत्र क्यों भेजा। क्या इसके पीछे की मंशा कुछ और थी। क्या ये योगी सरकार के खिलाफ एक महौल बनाने की कोशिश की गई थी।

योगी की जीरो टॉलरेंस की नीति पड़ रही भारी
उत्तर प्रदेश में पहली सरकार के दौरान भी योगी ने कहा था कि जीरो टॉलरेंस के तहत ही सरकार चलाई जाएगी। योगी ने पहली सरकार में भी मंत्रियों और विधायकों की नकेल कसी थी। हालांकि पहली सरकार में भी उस समय योगी सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई थी जब विधानसभा के भीतर ही 200 विधायक धरने पर बैठ गए थे। सरकार के खिलाफ हुई इस बगावत की गूंज भी दिल्ली तक सुनाई दी थी। हालांकि तब दिल्ली आलाकमान के हस्तक्षेप से मामला शांत हो गया था। दूसरी बार सीएम बने योगी अबकी बार पूरे तेवर में काम कर रहे हैं और लगातार मंत्रियों के कामकाज की निगरानी और कामकाज की समीक्षा कर रहे हैं।

योगी सरकार में नहीं है मंत्रियों की सुनवाई ?
उत्तर प्रदेश में मंगलवार को ही योगी ने पूरे मंत्रिपरिषद की बैठक ली थी। बैठक बीच में ही छोड़कर दिनेश खटीक दिल्ली चले गए थे। दरअसल ये पूरा मामला तब गरमाया जब पीडब्ल्यूडी विभाग में तबादलों के खेल में 5 अफसरों के खिलाफ कारवाई हुई थी। योगी की तरफ से की गई इस कारवाई से पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद इस कदर आहत हुए की वो सीएम से मिलने के बाद दिल्ली अमित शाह से मिलने चले गए। हालाकि बताया जा रहा है कि वहां भी इनकी अमित शाह से मुलाकात नहीं हो पाई। अब इसको लेकर जितिन प्रसाद ने सफाई पेश की है। जितिन का कहना है कि PM मोदी और CM योगी की जीरो टॉलरेंस की नीति है। अगर विभाग में कोई अनियमितताएं हैं तो सरकार ठोस कदम उठाएगी। एक निष्पक्ष जांच होगी और जहां गड़बड़ी है, वहां कार्रवाई होगी और बदलाव भी होगा। नाराजगी की कोई बात नही है,जहां तक केंद्रीय नेताओं से मिलने की बात है जब भी हमें समय मिलता है हम उनसे मिल सकते हैं। लेकिन अभी उनसे मिलने का मेरा कोई विचार नहीं है।

खटीक ने अमित शाह को इस्तीफा क्यों भेजा
उत्तर प्रदेश के जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने कथित तौर पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के बाद अब सवाल ये उठ रहा है की खटीक की नाराजगी थी और वो इस्तीफा देना चाहते थे तो उन्होंने राज्याल आनंदी बेन पटेल को भेजने की बजाय अमित शाह के नाम का पत्र क्यों लिखा। क्या दिनेश खटीक किसी और के इशारे पर ये काम कर रहे थे। बीजेपी के सूत्रों की माने तो संगठन और सरकार में भी सही नहीं चल रहा है। मनोनित एमएलसी की सीटों को लेकर पहले ही संगठन और सरकार के बीच ठनी हुई है। दिनेश खटीक के मामले ने भी कहीं न कहीं इस बात के संकेत दिए हैं की संगठन और सरकार के बीच सबकुछ सही नहीं चल रहा है।

खटीक और स्वतंत्रदेव के बीच सबकुछ ठीक नहीं
दिनेश खटीक ने अपने इस्तीफे में कई आरोप लगाए हैं। खटीक ने कहा है कि सरकार में दलितों की सुनवाई नहीं हो रही है। दलित समाज से आने वाले खटीक की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि एक तरफ सरकार 100 दिन का जश्न मना रही है वहीं दूसरी ओर राजमंत्री के पास कोई काम नहीं है। विभाग के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह की तरफ से कम का बटवारा नहीं किया गया है। हालाकि इस मामले को लेकर प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने कहा है कि दिनेश खटीक से सुबह शाम मुलाकात होती है। कहीं कोई दिक्कत और परेशानी नहीं है। अखिलेश यादव जानबूझकर मामले को तूल दे रहे हैं।

200 विधायकों ने दिया सरकार के खिलाफ धरना
उत्तर प्रदेश में योगी की पहली सरकार में उस समय भी बवाल मचा था जब विधानसभा सत्र के दौरान बीजेपी के 200 विधायक सदन के भीतर ही धरने पर बैठ गए थे। तब इस माले ने काफी तूल पकड़ा था। हालाकि उस समय भी योगी आदित्यनाथ ने साफतौर पर कहा था की सरकार जीरो टोलरेंस की नीति पर चल रही है। विधायकों ने भी यही शिकायत की थी की अधिकारी उनकी बातों को नहीं सुन रहे हैं। कोई भी काम लेकर जाओ तो अधिकारी माना कर देते हैं। हालाकि इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तब बीजेपी ने इस मामले को दबा दिया था।












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