संगठन और सरकार ने दी कल्याण सिंह को अंतिम विदाई, रामभक्तों और पिछड़े वर्ग को एक साथ साधने की कोशिश

लखनऊ, 23 अगस्त: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के नेता कल्याण सिंह आज पंचतत्व में विलीन हो गए। सोमवार को अलीगढ़ के नरौरा घाट पर गंगा किनारे उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। कल्याण की बीमारी से लेकर अंतिम समय तक संगठन और सरकार दोनों ने काफी अहम भूमिका निभाई। इसमें भी सीएम योगी जिस तरह से आगे बढ़कर कल्याण सिंह और उनके परिवार के साथ खड़े रहे और परिवार की हर जरूरत को पूरी करते रहे, उससे इस बात के संकेत मिले की बीजेपी के लिए कल्याण की अहमियत क्या थी। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो बीजेपी ने कल्याण सिंह के बहाने रामभक्तों और पिछड़ा वर्ग को एक साथ साधने की कोशिश की है।

योगी आदित्यनाथ

कल्याण की रामभक्त की छवि बीजेपी के लिए अहम

दरअसल , बीजेपी के लिए आगामी विधानसभा चुनाव काफी मायने रखता हैं। इसको देखते हुए कल्याण सिंह की रामभक्त और पिछड़े नेता वाली छवि को एक साथ भुनाने की कोशिश की है। कल्याण सिंह चुकी राम मंदिर के नायक रहे और करोड़ों हिंदुओं के भीतर उनकी इमेज एक सच्चे रामभक्त की ही रही थी। राम के लिए तो कल्याण सिंह ने सत्ता को भी ठोकर मार दिया था, ऐसा बीजेपी बहुत पहले से प्रचारित करती आई है। अब बीजेपी ने कल्याण सिंह के साथ मजबूती से खड़े होकर हिंदुओं और करोड़ों राम भक्तों के3 बीच एक मैसेज देने का प्रयास किया है।

कल्याण के बहाने पिछड़ों को साधने की कवायद
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश में एक बड़े पिछड़े नेता के तौर पर जाने जाते थे। पिछड़ों के साथ ही हिंदुत्व से उनका जुड़ाव बीजेपी के लिया हमेशा फायदेमंद रहा। यूपी और खासतौर से पश्चिमी यूपी में कल्याण को इग्नोर करने का खतरा बीजेपी कभी मोल नही ले सकती बीजेपी को पता है की कल्याण सिंह न केवल लोध नेता थे बल्कि उनकी छवि एक पिछड़े नेता के तौर पर थी। उनके समर्थक उन्हें बाबूजी कहकर बुलाते थे। हालाकि बीजेपी से अलग होकर जब उन्होंने पार्टी बनाई तब कल्याण को पिछड़े नेता के तौर पर उतना समर्थन नहीं मिला जितना बीजेपी में मिला। कल्याण को उचित सम्मान देकर पार्टी पिछड़ों और अति पिछड़ों में एक सकारात्मक संदेश देना चाहती थी।

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6 बार कल्याण को देखने पहुंचे योगी
कल्याण सिंह की बीमारी काफी दिनों तक चली। पहली बार तबियत खराब होने पर उन्हें लखनऊ के राम मनोहर लोहिया संस्थान में उन्हें भर्ती कराया गया था। पहली बार योगी वहीं पर कल्याण सिंह को देखने पहुंचे थे। उसके बाद योगी के निर्देश पर ही उन्हें लोहिया से संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया था। यहां भींच योगी पांच बार उनको देखने पहुंचे थे। उनके अलावा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, बिहार सरकार के मंत्री सहनवाज हुसैन, स्मृति ईरानी, अमित शाह और राजनाथ सिंह कल्याण को देखने पहुंचे थे।

पार्टी के नेताओं ने कहा कि वो राम मंदिर आंदोलन के अगुवा थे। पार्टी के लिए उनका योगदान भुलाया नही जा सकता है। लिहाजा पार्टी की भी यह जिम्मेदारी थी कि संकट के समय में पूरी पार्टी उनके परिवार के साथ खड़ी दिखे। इसीलिए पीएम मोदी से लेकर नड्डा तक सब लोग उनकी तबियत का अपडेट ले रहे थे।

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कैबिनेट की बैठक बुलाकर शोक प्रस्ताव पास किया
सीएम योगी आदित्यनाथ हर साल रक्षा बंधन पर गोरखपुर जाते हैं। हर बार की तरह इस बार भी वो 21 तारीख की शाम को वो गोरखपुर निकलने वाले थे लेकिन जैसे ही उन्हें कल्याण की तबियत बिगड़ने की जानकारी मिली वो अपना दौरा रद्द कर पीजीआई पहुंच गए। कुछ देर के बाद ही डॉक्टरों ने कल्याण सिंह को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद कल्याण सिंह के पार्थिव शहरी को उनके आवास पर लाया गया। इस बीच आनन फानन में देर रात 11 बजे कैबिने बैठक बुलाकर शोक प्रस्ताव पारित किया गया और पूरी कैबिनेट ने उनको श्रद्धांजलि दी।

कल्याण के अंतिम संस्कार की कमान सीएम ने अपने हाथ में ली
21 अगस्त की रात को कैबिनेट के बैठक के बाद योगी सीधे कल्याण सिंह के 2 मॉल एवेन्यू स्थित कल्याण के आवास पहुंचे। फिर उन्होंने परिवार के साथ बैठकर 22 अगस्त का पूरा खाका खींचा। इधर, देर रात को ही इस बात की जानकारी सीएम को मिल गई थी कि 22 अगस्त को पीएम मोदी भी कल्याण सिंह के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचेंगे। फिर पीएम के कार्यक्रम को लेकर अधिकारियों को निर्देश देते रहे। इसी दौरान योगी ने तय किया कि वो कल्याण सिंह के पार्थिव शरीर के साथ उनके पैतृक आवास अलीगढ़ भी जायेंगे और वहां भी अंतिम संस्कार के कार्यक्रम में शामिल होंगे। वहां जाकर योगी पश्चिमी में एक साथ कई संदेश देना चाहते थे।

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