चुनाव से पहले फिर गरमाया पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा, जानिए क्यों बढ़ी योगी सरकार की टेंशन
लखनऊ, 01 दिसंबर: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूल के शिक्षकों, सफाई कर्मचारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं सहित हजारों सरकारी कर्मचारी नई पेंशन योजना के विरोध में लामबंद हो रहे हैं। उनकी मांग है कि केंद्र सरकार की नई पेंशन योजना को वापस लिया जाए और पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए। कर्मचारियों की यह मांग काफी पुरानी है। यूपी के सभी कर्मचारी संगठन एक बैनर के तले अब पुरानी पेंशन बहाली को लेकर आंदोलन चलाएंगे। इसकी चेतावनी सरकार को दे दी गई है। संगठन की चेतावनी है कि यदि सरकार ने चुनाव से पहले इसको अमली जामा नहीं पहनाया तो इस बार पुरानी पेंशन बहाली मंच सरकार को चुनाव में सबक सिखाएगा।

एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि, "यदि पुरानी पेंशन योजना वाला कोई कर्मचारी आज सेवानिवृत्त होता है, तो उसे मासिक पेंशन के रूप में पचास हजार रुपए तक मिलेगा, जबकि नई पेंशन योजना के कर्मचारी केवल सात से आठ सौ रुपए प्रति माह सेवानिवृत्त हो रहे हैं।" राज्य स्तरीय शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ ने बताया कि उत्तर प्रदेश में एक लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ उठाने से रोक दिया गया है।
वह कहते हैं कि,
"नई योजना में, एक कर्मचारी के सकल वेतन का दस प्रतिशत काटा जा रहा है। इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी को देने में किया जा रहा है। इस बात की गारंटी कौन देगा कि सेवानिवृत्ति के समय इन कर्मचारियों को निश्चित पेंशन मिलेगी? शर्मा से नई पेंशन योजना के मुद्दों पर प्रकाश डालते हुए पूछा। राज्य सरकार इस पर कोई वादा नहीं कर रही है। हम पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग करते हैं।''

नगर निगम में भी करीब 25 फीसदी कर्मचारी पुरानी पेंशन के समर्थन में ईको गार्डन पहुंचे थे. समाज कल्याण विभाग में सिर्फ कंप्यूटर आपरेटर ही बचे थे। चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ मुख्यालय समाज कल्याण विभाग के प्रांतीय महासचिव शेख निसार अहमद ने बताया कि उनके विभाग के सभी लोग आंदोलन के समर्थन में गए हैं. बताया कि यह करो या मरो की लड़ाई है। पुरानी पेंशन बहाल नहीं हुई तो कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद खाने के लिए ललचाएगा। ऐसे में हम भी एक दिन का काम रोकने को तैयार हैं। पूरे प्रदेश में मंगलवार को भी सफाई कर्मचारियों ने काम नहीं किया। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में सफाई का काम भी प्रभावित रहा।
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लखनऊ समेत कई जिलों में सरकारी स्कूलों का यही हाल रहा। बेसिक शिक्षा विभाग के तहत आने वाले अधिकांश स्कूल शिक्षक हड़ताल में शामिल हो गए हैं। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी हैं। ऐसे में स्कूल में पढ़ाई नहीं हो पा रही थी। दरअसल, नए शिक्षकों को पेंशन का लाभ नहीं मिलना है। नई पेंशन नीति में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें अधिकतम 800 से 12000 रुपये वेतन मिल सकेगा। कर्मचारियों और शिक्षकों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में इस पेशे से घर का खर्च चलाना मुश्किल होगा।

नई पेंशन योजना क्या है?
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) को पीएफआरडीए अधिनियम, 2013 के तहत स्थापित पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा प्रशासित और विनियमित किया जा रहा है।एनपीएस एक बाजार से जुड़ा, परिभाषित योगदान उत्पाद है। यह नई योजना 1 जनवरी 2004 को या उसके बाद भर्ती हुए केंद्र सरकार के कर्मचारियों (सशस्त्र बलों को छोड़कर) पर अनिवार्य रूप से लागू है। पश्चिम बंगाल को छोड़कर सभी राज्य सरकारों ने अपने कर्मचारियों के लिए एनपीएस को अपनाया है।
वित्तीय सेवा विभाग के अनुसार, सरकारी कर्मचारी अपने वेतन के 10 प्रतिशत की दर से मासिक योगदान करते हैं और एक समान योगदान का भुगतान सरकार द्वारा किया जाता है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए, 1 अप्रैल, 2019 से नियोक्ता की योगदान दर को बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया गया है। कन्नौज, मिर्जापुर, गाजियाबाद, लखीमपुर खीरी से हजारों कर्मचारी राज्य की राजधानी पहुंचे थे।












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