30 साल से पुनर्वास का इंतजार कर रहे 63 बंगाली परिवारों का पूरा हुआ सपना, जानिए योगी ने क्या दिया तोहफा
लखनऊ, 19 अप्रैल: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 1970 में पूर्वी पाकिस्तान से कानपुर आए 63 हिंदू बंगाली परिवारों का पुनर्वास करने के लिए जमीन का पट्टा स्वीकृत किया है। मंगलवार को लोकभवन में आयोजित एक कार्यक्रम में योगी ने खुद खेती के लिए दो-दो एकड़ जमीन और 200 वर्ग मीटर जमीन का पट्टा दिया। इसे मुख्यमंत्री आवास योजना के फंड से पूरा किया जाएगा। इस कार्यक्रम में दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद थे।

63 पट्टे से 400 लोगों को मिलेगा लाभ
इस मौके पर योगी ने कहा कि हमने कार्ययोजना बनाकर इन परिवारों के हित में कार्य किया है। यह 63 पट्टे देकर हम सीधे-सीधे 400 लोगों तक लाभ पहुंचा रहे हैं। सीएम ने सभी परिवारों को कृषि योग्य भूमि और आवास के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने 130 हेक्टेयर जमीन में हर परिवार को कृषि के लिए दो-दो एकड़ और आवास के लिए 200 वर्ग मीटर जमीन देने की व्यवस्था की है। मकान बनाने के लिए मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 1.20 लाख रुपए दिए जाएंगे।
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30 सालों से लड़ रहे थे पूर्वी पाकिस्तान से आए परिवार
उत्तर प्रदेश में 1970 में पूर्वी पाकिस्तान से बंगाली परिवार आए थे। इन्हें रोजगार देकर मदन कपास मिल में पुनर्वास किया गया। पांच साल बाद यह मिल बंद हो गई। इसके चलते 63 हिंदू बंगाली परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। ऐसे परिवार पिछले 30 सालों से संघर्ष कर रहे थे। इन्हें पुनर्वासित करने के लिए साल-2021 में योगी सरकार ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। इनके लिए कानपुर देहात के रसूलाबाद में 300 एकड़ जमीन चिह्नित की गई। इन्हें भूमि विकास और सिंचाई की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही मनरेगा से यहां काम कराया जाएगा, जिससे इन्हें अच्छी सुविधाएं मिल सके।

हर परिवार को मिलेगी 200 वर्ग मीटर जमीन
उत्तर प्रदेश सरकार वर्ष 1970 में पूर्वी पाकिस्तान से यूपी आए 63 हिंदू बंगाली परिवारों का पुनर्वास करने की योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। उन्हें खेती के लिए दो एकड़ और कानपुर देहात में घर बनाने के लिए 200 वर्ग मीटर जमीन दी जाएगी। मकान बनाने के लिए मुख्यमंत्री आवास योजना से भी 1.20 लाख रुपये दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने बुधवार को इस प्रस्ताव को प्रचलन से मंजूरी दे दी।

30 साल से पुनर्वास के इंतजार में थे ये परिवार
साल 1970 में पूर्वी पाकिस्तान से 65 बंगाली परिवार उत्तर प्रदेश से आए थे। मदन कॉटन मिल, हस्तिनापुर, मेरठ में उन्हें रोजगार देकर उनका पुनर्वास किया गया। 8 अगस्त 1984 को मिल को बंद कर दिया गया था, जिसके बाद हिंदू बंगाली परिवारों को आजीविका संकट का सामना करना पड़ा था। हालांकि दो परिवारों के सदस्यों की मौत हो चुकी है, लेकिन 63 परिवार पिछले 30 साल से पुनर्वास का इंतजार कर रहे थे। सीएम ने बुधवार को इनके पुनर्वास के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। उनके लिए कानपुर देहात में 300 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है।












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