दिनेश खटीक के आरोपों से सवालों के घेरे में स्वतंत्रदेव सिंह ?, जानिए आलाकमान ने क्यों तलब की रिपोर्ट
लखनऊ, 21 जुलाई: उत्तर प्रदेश में जलशक्ति राज्य मंत्री दिनेश खटीक के इस्तीफे के मामले को लेकर अब बीजेपी का आलाकमान भी एक्शन में आ गया है। बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व ने पूरे मामले को लेकर संगठन और सरकार से रिपोर्ट तलब है। रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में आगे बीजेपी कोई कदम उठा सकती है। हालांकि सूत्रों की माने तो बीजेपी पूरी तरह से इस मामले को दबाने में जुटी हुई है क्योंकि उसे पता है कि यदि मामला तूल पकड़ गया तो बीजेपी को काफी नुकसान हो सकता है। खासतौर से दिनेश खटीक के आरोपों की जद में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह आए हैं। आलाकमान इस बात की तह तक जाएगा कि क्या स्वतंत्रदेव सिंह अपनी मनमानी कर रहे हैं या दिनेश खटीक किसी के इशारे पर ये आरोप लगा रहे हैं।

खटीक के आरापों के बाद कटघरे में स्वतंत्रदेव सिंह
खटीक का दावा है कि दलित होने के कारण अधिकारियों द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा था, जिससे विपक्षी नेताओं ने भाजपा सरकार को निशाना बनाया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट किया: "एक पक्षपाती सरकार से इस्तीफा देना, जहां मंत्री होना कोई सम्मान नहीं है, लेकिन दलित होना एक गाली है।" राज्यमंत्री का दावा है कि उसे जल शक्ति विभाग में कोई काम आवंटित नहीं किया गया था। राज्यमंत्री के आरोपों ने प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को कटघरे में खड़ा कर दिया है। खटीक का पत्र वायरल होने के बाद सिंह ने कहा कि वह अपने कनिष्ठ मंत्री से रोज बात करते हैं और वह दुखी नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'अगर कुछ मुद्दे हैं, तो उनके साथ बैठक के बाद इसे सुलझा लिया जाएगा।'

खटीक ने अमित शाह को क्यों भेजा इस्तीफा
बीजेपी सूत्रों की माने तो दिनेश खटीक ने अपना इस्तीफा अमित शाह को क्यों भेजा ये चर्चा का विषय बना हुआ है। आमतौर पर यह माना जाता है कि जब किसी मंत्री को इस्तीफा देना होता है तो वह राज्यपाल को या मुख्यमंत्री को भेजता है। या फिर इससे ज्यादा वह पार्टी के अध्यक्ष को भेज सकता है। लेकिन खटीक ने अपना इस्तीफा सीधे देश के गृहमंत्री अमित शाह को भेजा जिसमें कई तरह के आरोप लगाए गए थे। हालांकि दिनेश खटीक अभी अपने इस्तीफे पर केवल इतना ही जवाब दे रहे हैं कि यह कोई बड़ा विषय नहीं है।

सीएम ने तबादलों की शिकायतों पर दिए थे निर्देश
सूत्रों की माने तो सीएम योगी आदित्यनाथ ने करीब एक हफ्ते पहले दो अलग-अलग दिनों में माध्यमिक शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों के मंत्रियों और अधिकारियों को बुलाकर विभाग में चल रहे मामलों पर चर्चा की थी और इसका तत्काल समाधान करने का निर्देश दिया था। योगी के हस्तक्षेप के कारण स्वास्थ्य विभाग में तबादलों की शिकायतों को देखने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। अभी इस समिति की रिपोर्ट भी आनी है जिसके बाद कदम उठाया जाएगा।

जितिन से नहीं मिले अमित शाह ?
पीडब्ल्यूडी विभाग के छह वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए एक समान पैनल का गठन किया गया था। सीएम ने उन सभी छह को निलंबित करने का आदेश दिया, जिनमें एक ओएसडी भी शामिल है, जो लंबे समय से पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद के साथ जुड़ा हुआ था। कार्रवाई से अटकलें लगाई जाने लगीं कि प्रसाद भी शीर्ष स्तर के हस्तक्षेप से नाखुश थे और उन्होंने बुधवार को शाह से समय मांगा था। हालांकि, उन्होंने शाह के साथ किसी भी मुलाकात से इनकार किया और कहा कि उनकी 'नाखुशी' का कोई सवाल ही नहीं है।

संगठन और सरकार का अंदरूनी घमासान दबाने की कोशिश
बीजेपी के सूत्रों की माने तो बीजेपी आलाकमान ने पूरे मामले को लेकर इसलिए रिपोर्ट तलब की है कि समय रहते इस मामले को दबाया जा सके। जिस तरह से दिनेश खटीक के अलावा स्वास्थ्य विभाग और पीडब्लूडी विभाग में तबादलों की वजह से अंदरखाने जो माहौल बन रहा है उसे दबाने की कोशिश की जा रही है। जितिन प्रसाद भी नाराजगी की वजह से ही दिल्ली आलाकमान के सामने अपनी सफाई पेश करने गए थे लेकिन अमित शाह ने स्थिति को भांपते हुए मिलने से इंकार कर दिया। जानकारों का कहना है कि यदि अमित शाह ने मुलाकात की होती तो इसका गलत संदेश जाता।












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