नूरजहां: लेखपाल से लेकर टॉपर तक का सफर, आंखें नम कर देगी संघर्ष की कहानी

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इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की लोअर सबार्डिनेट परीक्षा 2015 की टॉपर बन कर पूरे यूपी में छा चुकी इलाहाबाद की बेटी नूरजहां अब एक चर्चित नाम बन चुकी हैं। लेकिन, गुमनामी के अंधेरे में रही इनकी जिंदगी और सुविधाओं से वंचित रहने के साथ-साथ परिस्थितियों से लड़कर यह इस मुकाम तक कैसे पहुंची ? यह कहानी नई पीढ़ी और खासकर बेटियों के लिए नजीर है। मौजूदा समय में लेखपाल के पद पर कार्यरत नूरजहां का सफर बेहद ही संघर्ष भरा रहा और अपनी मेहनत के दम पर ही नूरजहां आज न सिर्फ अधिकारी बन गई बल्कि लोवर सबार्डिनेट परीक्षा को टॉप करने में सफल रही हैं।

success story of noorjahan lower sub ordinate exam topper 2015

नूरजहां का बैकग्राउंड
नूरजहां इलाहाबाद के तेलियरगंज की रहने वाली हैं। जब नूरजहां की उम्र महज 15 दिन की थी, तब पिता इमरान व्यवसाय के लिए मुंबई गए थे और फिर आज तक वापस लौट कर नहीं आए। पिता के जाने के बादनूरजहां की सारी जिम्मेदारी जुबैदा पर आ गई और जुबैदा ने ससुराल में विपरीत परिस्थितियां देखकर मायके का सहारा लिया। जुबैदा बेटी को लेकर पिता के घर में ही रहने लगी। लेकिन, नूरजहां के नाना सुलेमान अली भी साधारण कामगार थे, ऐसे में परिवार की बढ़ी जिम्मेदारी में बेटे के साथ काम धंधे से बस दो वक्त की रोटी का इंतजाम हो जाता था और परिवार चलने के साथ भांजी नूरजहां का भी लालन-पालन होने लगा।

नाना ने देखा अधिकारी बनाने का सपना
सुलेमान का परिवार पैसे और संसाधनों के भारी अभाव में भले ही जी रहा था, लेकिन अपनी नातिन नूरजहां के लिए उन्होंने बड़ा सपना देखा और हमेशा उसे सरकारी अधिकारी बनने को प्रेरित करते। विपरीत परिस्थियों से लड़ती हुई नूरजहां ने अपनी प्रारंभिक परीक्षा मोहल्ले के कालेज से की और फिर स्नातक व परास्नातक इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से कर प्रतियोगी परीक्षा में बैठने लगी। घर के काम धाम को खत्म कर जितना भी वक्त नूरजहां को मिलता वह पढ़ाई में जुट जाती, नूरजहां ने अपने मौजूदा हालात को बदलने की ठान ली थी और नूरजहां की मेहनत का नतीजा ही था कि वह पहले लेखपाल बनी और अब लोअर सबार्डिनेट परीक्षा में टॉप कर अधिशासी अधिकारी बन गई है।

मैथ से डर नहीं, प्यार था
शुरू से ही रही तेज-तर्रार नूरजहां ने तेलियरगंज स्थित नाना के घर से ही पढ़ाई शुरू की और मसुरिया दीन इंटर कॉलेज से शुरूआती शिक्षा के साथ इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की। 2005 में हाईस्कूल व 2007 में इंटर करने के दौरान नूरजहां को मैथ सब्जेक्ट बहुत पसंद था और आम लडकियों की तरह मैथ से डरने के बजाय नूरजहां मैथ से प्यार करती थी। इंटर के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय में नूरजहां ने एडमिशन लिया और फिर मैथ्स के साथ बीएससी और एमएससी पास किया । ग्रेजुएशन के बाद से ही नूरजहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी और 13 मई 2016 को उनका चयन लेखपाल के पद पर हो गया। मौजूदा समय में इलाहाबाद की सदर तहसील में नूरजहां की तैनाती है और अब उन्हें बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है।

इकलौती बेटी कर गई नाम
आज भले ही लोग बेटियों को उपेक्षित रखते हैं उन्हे कमजोर समझते हैं, लेकिन नूरजहां ने बेटी होने के गर्व का बोध अपने परिजनों को कराया। नूरजहां अपने माता-पिता की इकलौती संतान है और नाम मात्र की सुविधाओं के साथ अपनी मेहनत व बेहतर शिक्षा के दम पर नूरजहां आगे बढ़ती रही और अब अधिशासी अधिकारी बन गई है। इस बारे में नूरजहां कहती हैं कि 2015 की भर्ती में सफलता की उम्मीद हर किसी को थी। सबसे ज्यादा उम्मीद उनके नाना ने पाल कर रखी थी, लेकिन ईश्वर को यह मंजूर नहीं था और 25 मार्च को ही नाना का इंतकाल हो गया। नूरजहां कहती हैं कि काश नाना कुछ दिन और जिंदा रहते तो सबसे ज्यादा वही खुशी होते और मेरी मेहनत को सही तोहफा मिल गया होता।

पीसीएस में लगातार तीन बार दे चुकी हैं मेंस
नूरजहां उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की सबसे चर्चित पीसीएस परीक्षा को लगातार तीन बार से क्वालीफाई कर रही है और लगातार तीन बार से मेंस परीक्षा दे चुकी है। 2014 में पांच नंबर से उनका सिलेक्शन नहीं हुआ था। जबकि 2015 में सात नंबर कम होने से वह इंटरव्यू में शामिल नहीं हो सकी थी। इस बार 2016 का भी उन्होंने मेंस दिया है और अभी रिजल्ट नहीं जारी हुआ है। मुख्य परिणाम का रिजल्ट घोषित होने के बाद नूरजहां को भरोसा है कि इस बार वह इंटरव्यू में शामिल हो जाएंगी ।

क्या कहती हैं नूरजहां
नूरजहां कहती हैं कि मुझे कभी उम्मीद नहीं थी कि मैं परीक्षा टॉप कर जाऊंगी। मैंने तो कभी ऐसा सोचा भी नहीं था, हां इस परीक्षा में मैंने लिखित परीक्षा बहुत अच्छे से दी थी, लेकिन इंटरव्यू अच्छा नहीं हुआ था पर अब जब परिणाम आया और मुझे टॉप करने की जानकारी मिली तो कुछ देर भरोसा ही नहीं हुआ। नूरजहां बताती हैं कि 23 फरवरी 2018 को इंटरव्यू समाप्त होने के बाद उनके नाना रोज पूछते थे कि रिजल्ट कब आएगा और अब जब रिजल्ट आया तो नाना उनके बीच नहीं रहे ? । नूरजहां ने युवा पीढ़ी को लक्ष्य बनाने का संदेश देते हुये कहा कि मंजिलें और भी हैं.....!

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English summary
success story of noorjahan lower sub ordinate exam topper 2015

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