रामचरितमानस पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने PM से पूछा सवाल, बोले- 'आपत्तिजनक टिप्पड़ी को हटाने की पहल क्यों नहीं?'
Swami Prasad Maurya asks PM Modi: एमएलसी स्वामी प्रसाच मौर्य ने रामचरितमानस को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी से सवाल पूछा है। मौर्य ने पूछा, ' रामचरित्र मानस की आपत्तिजनक टिप्पड़ीयों को हटाने हेतु पहल क्यों नहीं।'

Swami Prasad Maurya asks PM Modi: अपने बयानों के कारण समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) बीते कुछ दिनों से मीडिया की सुर्खियों में बने हुए हैं। तो वहीं, अब स्वामी प्रसाद मौर्य ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) से रामचरितमानस (Ramcharitmanas) को लेकर सवाल पूछा है।
स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) ने यह सवाल मंगलवार 7 फरवरी को अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से ट्वीट करके पूछा। स्वामी प्रसाद मौर्य ने लिखा,
प्रधानमंत्री जी आप चुनाव के समय इन्हीं महिलाओं, आदिवासियों, दलितों, पिछड़ो को हिंदू कहते हैं। आरएसएस प्रमुख कहते हैं कि जाति पंडितों ने बनाई। तो आखिर इन्हें नीच, अधम, प्रताड़ित, अपमानित करने वाली रामचरित्र मानस की आपत्तिजनक टिप्पड़ीयों को हटाने हेतु पहल क्यों नहीं।
इतना ही नहीं, स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि, 'संघ प्रमुख मोहन भागवत कहते हैं कि जातियां पंडितों ने बनाई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आप पिछड़ी जाति में ही पैदा होने से नीचे होने का दंश झेल चुके हैं। जाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव न हो भारतीय संविधान भी कहता है तो क्या अब यह सुनिश्चित करेंगे कि देश की समस्त महिलाओं, आदिवासियों, दलितों व पिछड़ों को मानस की आपत्तिजनक टिप्पणी से नित्य प्रति अपमानित न होना पड़े, अस्तु उसे संशोधित या प्रतिबंधित कर इन्हें सम्मान दिलवायेंगे।
सपा के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने पीएम मोदी को सुझाव देते हुए कहा कि हिंदू महाकाव्य रामचरितमानस के उन हिस्सों को बदलने पर विचार करना चाहिए जो कथित रूप से पिछड़ों, दलितों और महिलाओं का अपमान करते हैं। दरअसल, पिछले महीने रामचरितमानस पर सवाल खड़े करते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा था कि इसमें धर्म के नाम पर जाति विशेष, वर्ग विशेष को अपमानित करने का काम किया गया है। हम उस पर आपत्ति दर्ज कराते है।'
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मौर्य ने कहा था कि तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस का संज्ञान लेते हुए सरकार को इसमें से जो आपत्तिजनक अंश है, उसे बाहर करना चाहिए या इस पूरी पुस्तक को ही बैन कर देना चाहिए। कहा कि तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमान में कुछ अंश ऐसे हैं, जिनपर हमें आपत्ति हैं। क्योंकि किसी भी धर्म में किसी को भी गाली देने का अधिकार नहीं हैं। दरअसल, तुलसीदास की रामायण में एक चौपाई है, जिसमें शुद्रों को अधम जाति का कहा है।
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