परिवारवाद Vs विकास: सपा का परिवारवाद यादवों के लिए 'लड्डू', BJP की सत्ता 'सबका साथ, सबका विकास'

Uttar Pradesh Politics: सियासत का सबसे जटिल धरातल 'उत्तर प्रदेश' ही माना जाता रहा है। इस प्रदेश ने 33 से ज्यादा मुख्यमंत्रियों की सत्ता देखी, लेकिन बीजेपी के नेतृत्व में योगी आदित्यनाथ की सत्ता सबसे ज्यादा कार्यकाल को पूरा करने वाली सरकार बनी। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने यूपी में भाजपा की प्रमुख नीति 'सबका साथ, सबका विकास' का भली-भांति नेतृत्व किया।

हालांकि, विपक्ष में बैठे नेता विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बार-बार योजनाओं में अनदेखी के आरोप लगाते आए हैं। लेकिन, उनका परिवारवाद हमेशा उन्हें कटघरे में लाकर खड़ा कर देता है। आइए जानते हैं अखिलेश का परिवारवाद कैसे विकास का दुश्मन?...

Uttar Pradesh Politics

अखिलेश यादव का परिवारवाद और यादवों की भूमिका
अखिलेश यादव को अक्सर 'परिवारवाद' का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि समाजवादी पार्टी की राजनीति में यादव परिवार का गहरा प्रभाव रहा है। इसके चलते उनकी सरकार में यादव समुदाय की भागीदारी पर सवाल उठते रहे हैं।

  • पुलिस और प्रशासन में नियुक्तियां: 2012-2017 की अखिलेश यादव सरकार के दौरान यह आरोप लगाए गए थे कि यादव जाति के लोगों को प्रशासन और पुलिस में बड़ी संख्या में नियुक्त किया गया।
  • आंकड़ा: 2013 के सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, यूपी पुलिस में 22% उच्च पदों पर यादव समुदाय के लोग थे, जो अन्य समुदायों की तुलना में काफी अधिक था।
  • सरकारी योजनाओं में यादवों की प्रमुखता: अखिलेश की सरकार पर आरोप था कि कई सरकारी योजनाओं और फंडिंग का लाभ यादव और मुसलमान समुदाय को प्रमुखता से दिया गया, जो समाजवादी पार्टी का कोर वोटबैंक रहा है।
  • विधानसभा में यादव प्रतिनिधित्व: 2012 में जब अखिलेश मुख्यमंत्री बने, तब उत्तर प्रदेश विधानसभा में 84 यादव विधायक चुने गए थे, जो कुल विधायकों का लगभग 20% थे।

योगी आदित्यनाथ की सरकार और 'सबका साथ, सबका विकास'

योगी आदित्यनाथ ने 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद विकास और समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की नीति को अपनाया। 'सबका साथ, सबका विकास' भाजपा की प्रमुख नीति रही है, जो बिना भेदभाव के विकास पर जोर देती है।

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास: योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में सड़क, बिजली, और पानी की सुविधाओं में व्यापक सुधार करने पर जोर दिया। इसमें प्रमुख हाईवे, मेट्रो, और जल प्रबंधन योजनाएं शामिल हैं।
  • आंकड़ा: योगी सरकार ने 2017-2022 के बीच 30,000 किलोमीटर सड़कों का चौड़ीकरण और मरम्मत किया, और करीब 5,000 किलोमीटर नए हाईवे और एक्सप्रेसवे बनाए गए।
  • गांवों में बिजली पहुंचाने का अभियान: योगी सरकार ने 'सौभाग्य योजना' के तहत लगभग 1.38 करोड़ घरों में बिजली पहुंचाई। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के 60% गांवों में नियमित बिजली नहीं थी, जबकि 2021 में यह आंकड़ा 95% तक पहुंच गया।
  • किसानों की कर्जमाफी और अनुदान: योगी सरकार ने किसानों की कर्जमाफी की योजना लागू की, जिससे 36,000 करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया गया और करीब 86 लाख किसानों को इसका लाभ मिला।

अखिलेश यादव की सरकार में यादवों का बेड़ा पार

अखिलेश सरकार पर आरोप थे कि उन्होंने यादव समुदाय के हितों को विशेष तरजीह दी।

  • यादव समुदाय का पुलिस और प्रशासन में प्रतिनिधित्व: पुलिस और प्रशासनिक सेवाओं में यादव अधिकारियों की नियुक्तियों की शिकायत विपक्ष ने कई बार उठाई।
  • योजना और लाभ: मनरेगा, समाजवादी पेंशन योजना, और छात्रों के लिए मुफ्त लैपटॉप जैसी योजनाओं में यादव और मुसलमान समुदाय को सबसे अधिक लाभ प्राप्त हुआ।

योगी आदित्यनाथ की सरकार में निचली सतह तक विकास:

योगी सरकार ने विकास को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और रोजगार के अवसरों पर ध्यान दिया गया।

  • प्रधानमंत्री आवास योजना: इस योजना के तहत 2017-2021 के बीच उत्तर प्रदेश में 22 लाख से अधिक गरीबों को घर दिए गए। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इस योजना ने गरीबों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • स्वास्थ्य सेवाएं: योगी सरकार ने मेडिकल कॉलेजों की संख्या में वृद्धि की और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया।
  • आंकड़ा: 2021 तक उत्तर प्रदेश में 16 नए मेडिकल कॉलेज शुरू किए गए, जबकि अखिलेश सरकार में यह संख्या काफी कम थी।
  • शौचालय निर्माण और स्वच्छता अभियान: स्वच्छ भारत अभियान के तहत यूपी में 2 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए, जिससे राज्य के 60% से अधिक ग्रामीण क्षेत्र ओपन डिफेकेशन फ्री (ODF) हो गए।

अखिलेश यादव की सरकार में यादव समुदाय को विशेष महत्व मिलने के आरोपों ने परिवारवाद और जातिवाद की राजनीति को सामने लाया, जबकि योगी आदित्यनाथ की सरकार ने विकास के अधिक समावेशी दृष्टिकोण पर जोर दिया। जहां अखिलेश सरकार को यादव और मुसलमान वोटबैंक पर निर्भर रहने की आलोचना झेलनी पड़ी, वहीं योगी सरकार ने 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे के साथ सामाजिक संतुलन की कोशिश की। विकास के आंकड़ों के अनुसार, योगी सरकार के तहत यूपी में बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण योजनाओं में काफी सुधार हुआ है।

(इनपुट मीडिया सोर्स)

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