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अखिलेश से फिर मोर्चा लेंगे शिवपाल! इस गुप्त जगह हो रही गतिविधियां दे रही हैं संकेत

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    लखनऊ। चाचा शिवपाल और भतीजे अखिलेश का मिलन लोकसभा चुनाव के पहले नहीं होने जा रहा है। बीच में ऐसे संकेत आए थे कि इन दोनों में आपसी सहमित बन सकती है और आने वाले लोकसभा चुनाव में दोनों साथ दिखें। अब इस कयास पर विराम लगने जा रहा है। खबरें आ रही हैं कि नाराज शिवपाल दीवाली तक अपनी नई पार्टी का ऐलान कर सकते हैं।

    shivpal yadav may announce his new party after dipawali

    कभी समाजवादी पार्टी के मुख्यधारा में रहे और पार्टी में उपेक्षित चल रहे शिवपाल यादव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शिवपाल यादव दीवाली के बाद नई पार्टी के गठन से जुड़ा कोई फैसला ले सकते हैं। यही वजह है की शिवपाल खेमा एक बार फिर से सक्रिय हो गया है।

    अघोषित वनवास झेल रहे शिवपाल यादव फिर से सक्रिय हो गए हैं। उनका नया ठिकाना बन है विक्रमादित्य मार्ग पर समाजवादी पार्टी कार्यलय से कुछ दूरी पर स्थित लोहिया ट्रस्ट। अपने करीबियों के साथ शिवपाल ने यहां ढेरा जमा लिया है और यहीं पर वो अपने क्षेत्र के लोगों से मिलते है तथा उनकी समस्यायों को सुनते हैं।

    अभी तक शिवपाल अपने घर पर ही लोगों से मिलते थे। पूर्व पार्टी अध्यक्ष की ये सक्रियता राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल शिवपाल के इस कदम को नए सिरे से जानसमर्थन जुटाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    यहीं नहीं शिवपाल के करीबी और कभी सपा में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अमर सिंह भी भाजपा से गलबहियां करते नजर आ रहे हैं। अमर सिंह कई बार खुले मंच से पीएम मोदी की तारीफ कर चुके हैं। अमर सिंह आज कल लगातार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में दिख रहे हैं। ऐसे में कयास तेज हो गए हैं कि शिवपाल सपा से अलग अपनी पार्टी बना सकते हैं। या फिर महागठबंधन होने की स्थिति में तीसरे मोर्चे के तौर पर यूपी में सामने आ सकते हैं।

    शिवपाल यादव कई बार कह चुके हैं कि हमसे जुड़े कार्यकर्ता उपेक्षित महसूस कर रहे हैं और उन कार्यकर्ताओं का मुझ पर काफी दबाव है। इस पर विचार किया जा रहा है। लेकिन अलग राह चुनने की बात को वो हमेशा टालते रहे हैं।

    अभी कुछ दिन पहले पार्टी के अंदर अपने धुर विरोधी माने जाने वाले रामगोपाल यादव के जन्मदिन पार्टी में भी शिवपाल यादव पंहुचे थे और उनको केक खिलाया था। तब लगा था कि शायद रिश्तों पर जमी बर्फ की परतें पिघल रही हैं। पर दीवाली पर नई पार्टी की घोषणा की खबर ने एक बार फिर ये साबित कर दिया है कि अंदरखाने सबकुछ ठीक नहीं है।

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    English summary
    shivpal yadav may announce his new party after diwali

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