UP: इस्तीफा देते ही PCS अधिकारी को शंकराचार्य ने फोन कर दिया बड़ा ऑफर, बातचीत का VIDEO VIRAL
उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक सेवा (PCS) से अचानक इस्तीफा देकर सनसनी फैलाने वाले अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री को अब धर्मगुरुओं का साथ मिलने लगा है। ब्राह्मण समाज की अस्मिता और सम्मान के सवाल पर पद त्यागने वाले पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट से ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने फोन पर लंबी बातचीत की है।
इस दौरान शंकराचार्य ने न केवल उनके इस साहसी कदम की सराहना की, बल्कि उन्हें एक बड़ा धार्मिक दायित्व संभालने का प्रस्ताव भी दिया है।

गणतंत्र दिवस पर इस्तीफे से मचा हड़कंप
बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी के मौके पर अपने पद से त्यागपत्र देकर सबको चौंका दिया था। अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया है कि माघ मेले में शंकराचार्य और उनके ब्राह्मण बटुकों के साथ अन्याय हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने यूजीसी के नए एक्ट और यूपी सरकार की नीतियों पर 'ब्राह्मण विरोधी' होने का गंभीर आरोप लगाया है। हालांकि, शासन ने इस कदम के बाद देर रात उन्हें निलंबित करते हुए जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं।
शंकराचार्य ने जताया दुख और गर्व
प्रयागराज में मौनी अमावस्या के अवसर पर शिविर में मौजूद शंकराचार्य ने फोन पर अलंकार से बात की। बातचीत की शुरुआत में अलंकार ने चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया। शंकराचार्य ने मिश्रित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आपके इस्तीफे की खबर सुनकर मन में दो तरह के भाव आ रहे हैं। एक ओर यह जानकर दुख है कि वर्षों की मेहनत और लगन से आपने जो पद हासिल किया था, वह एक झटके में चला गया। लेकिन दूसरी तरफ, सनातन धर्म और इसके प्रतीकों के प्रति आपकी अटूट निष्ठा को देखकर पूरा सनातनी समाज गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
सरकारी पद से बड़े 'धर्म पद' का ऑफर
बातचीत के दौरान शंकराचार्य ने अलंकार अग्निहोत्री के सामने एक बड़ा प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की सेवा के लिए आपके जैसे निष्ठावान लोगों की जरूरत है। शंकराचार्य ने प्रस्ताव देते हुए कहा कि जो पद सरकार ने आपको दिया, हम आपको धर्म के क्षेत्र में उससे भी ऊंचा और बड़ा पद देने की पेशकश करते हैं। फोन पर मिले इस स्नेह और आशीर्वाद के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने कृतज्ञता व्यक्त की और जल्द ही प्रयागराज पहुंचकर शंकराचार्य से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने की बात कही है।
शंकराचार्य और सरकार के बीच क्या है विवाद?
दरअसल, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच विवाद गहराया हुआ है, जिसका ताजा केंद्र प्रयागराज का माघ मेला 2026 बना है। विवाद की शुरुआत 18 जनवरी 2026 (मौनी अमावस्या) को हुई। शंकराचार्य अपने सैकड़ों अनुयायियों के साथ पालकी (चतुष्पद) में सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे।
- प्रशासन का तर्क: मेला प्रशासन का कहना है कि भारी भीड़ और सुरक्षा कारणों से संगम नोज तक वाहनों या पालकी ले जाने की अनुमति नहीं थी। उन्होंने शंकराचार्य से पैदल जाने का अनुरोध किया था।
- शंकराचार्य का आरोप: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप है कि पुलिस ने उनके 'बाल बटुकों' (शिष्यों) के साथ मारपीट की, उनकी शिखा (चोटी) खींची और उन्हें अपमानित किया। उन्होंने इसे सनातन परंपरा और ब्राह्मण अस्मिता पर हमला करार दिया है।
'शंकराचार्य' पद की वैधता पर कानूनी नोटिस
इस तनाव के बीच, माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया। प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के एक लंबित मामले का हवाला देते हुए पूछा कि वह अपने शिविर के बाहर बोर्ड पर 'शंकराचार्य' उपाधि का उपयोग कैसे कर रहे हैं, जबकि उनकी नियुक्ति का मामला अभी विचाराधीन है। उनके वकीलों का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल उनके 'पट्टाभिषेक' (राज्याभिषेक) पर रोक लगाई थी, लेकिन 'शंकराचार्य' उपाधि के उपयोग पर कोई प्रतिबंध नहीं है।












Click it and Unblock the Notifications