शामली विधानसभा सीट: किसानों की कसौटी पर खरा उतरने की सभी दलों की कोशिश, जानिए ग्राउंड रिपोर्ट
लखनऊ, 1 फरवरी: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सारे दल अपनी-अपनी जोरआजमाइश में लगे हुए हैं आज हम आपको बताएंगे उत्तर प्रदेश के शामली सीट के बारे में जहां इस बार प्रमुख दलों ने जाट उम्मीदवारों पर दांव लगाया है। हालांकि शामली में इस बार किसान सभी प्रत्याशियों को चुनावी कसौटी पर कसने में जुटे हुए हैं। बीजेपी के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती इस सीट को बचाए रखना है। कैराना से सटी इस सीट पर ध्रुवीकरण की कोशिश भी हो रही है। लिहाजा बीजेपी इस सीट को बचा पाएगी यह देखना दिलचस्प होगा।

शामली में इस बार किसान आंदोलन का असर साफ नजर आ रहा है। किसानों के मुद्दे और उनकी नाराजगी इस बार चुनाव पर बड़ा असर डालेगी। किसान आंदोलन के दौरान गठवाला खाप के चौधरी राजेंद्र सिंह मलिक सरकार के पक्ष में थे। खाप के थामबेदार श्याम सिंह बहावड़ी अंत तक किसानों के साथ बने रहे। यहां बीजेपी समेत चार दलों ने जाट उम्मीदवार ही उतारे हैं। बीजेपी से तेजेंद्र निर्वाल, एसपी आरएलडी से प्रसन्न चौधरी, बीएसपी से बिजेंद्र मलिक कूड़ाना और कांग्रेस से अयूब जंग मैदान में हैं।
इन परिस्थितियों में खाप का रुख ही पूरे चुनाव पर असर डालेगा। 2012 में बनी इस सीट पर कांग्रेस के पंकज मलिक जीते थे। इसके बाद 2017 में बीजेपी के तेजेंद्र निर्वाल विधायक बने। हालाकि मतदाताओं का कहना है कि इलाके में विकास हुआ है। मुद्दों की बात करें तो शामली में गन्ने के बकाया का भुगतान समय पर न होना, निर्माणाधीन दिल्ली देहरादून हाइवे, अंबाला शामली इकोनोमिक कॉरिडोर से मिले वाला मुआवजे का मुद्दा काफी अहम है।
क्या कहते हैं जातीय समीकरण और पिछले आंकड़े
शामली विधानसभा सीट पर जातीय आंकड़े की बात करें तो यहां कुल 307484 मतदाता हैं जिसमे 68 हजार जाट, 70 हजार मुस्लिम, 38 हजार वैश्य, 35 हजार एससी, 23 हजार कश्यप, 22 हजार ब्राह्मण, 21 हजार गुर्जर और 28 हजार अन्य मतदाता हैं जो चुनावी किस्मत के फैसला करेंगे। पिछले चुनाव में बीजेपी के तेजेंद्र निर्वाल को 70,085 वोट मिले थे। कांग्रेस के पंकज मलिक 40,365 वोटो के साथ दूसरे स्थान पर थे। आरएलडी के बिजेंद्र मालिक को 33, 551 वोट मिले थे। बीएसपी के मोहमद इस्लाम को केवल17,114 वोट मिले थे।
क्या कहते हैं मतदाता
शामली सीट पर यूं तो इस बार किसान आंदोलन का असर दिखाई देगा लेकिन सभी दलों का जोर जाट समुदाय को साधने पर है। सीबी गुप्ता कालोनी के अजय शर्मा कहते हैं कि बीजेपी सरकार में काफी काम हुआ है। अपराधिक घटनाओं में कमी आई है। सभी को देखने के बाद ही वोट का फैसला करेंगे। वहीं दयानंद नगर के सतपाल मलिक कहते हैं कि इस बार किसान आंदोलन का असर हर सीट पर दिखाई पड़ेगा। महामारी से हुई मौतें भी असर डालेगी। हाइवे का जाल बिछ रहा है और लोगों में सुरक्षा की भावना बढ़ी है लेकिन लोग मंहगाई और बेरोजगारी से भी परेशान हैं।












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