डेढ़ रुपये की कर्जमाफी पर बोले किसान, हमारा मजाक बना दिया गया है

शाहजहांपुर। न रोते बनता है ना हंसते बनता है, बनता है तो बस मजाक। ऐसा ही कुछ हुआ यूपी के शाहजहांपुर में गरीब किसानों के साथ। यहां बीते रविवार को जब किसानों को कर्जमाफी के लिए बुलाया गया तो गरीब किसानों के घर मानो जैसे जश्न का माहौल बन गया था। लेकिन जब उनको कर्जमाफी के प्रमाण पत्र दिए गए तो बस उनसे न तो रोया जा रहा था और न हंसा जा रहा है। क्योंकि किसी का डेढ़ रूपये, तो किसी का 6 रुपये कर्ज ही माफ किया गया है। इतना कर्ज माफ होने पर किसानों ने कहा कि सरकार को क्या जरूरत थी कर्ज माफ करने की। कर्जमाफी को किसानों ने भद्दा मजाक बताया। वहीं सरकार कर्जमाफी योजना को बड़ी सफलता मान कर खुद पीठ थपथपा रही है।

डेढ़ रुपये की कर्जमाफी

डेढ़ रुपये की कर्जमाफी

जलालाबाद तहसील के गांव केवलरामपुर निवासी किसान रामप्रसाद का खाता बैंक ऑफ बड़ौदा में है। लघु सीमांत किसान होने के कारण रामप्रसाद का नाम कर्जमाफी लिस्ट में नाम आया। लेखपाल ने उनका सत्यापन किया, रिपोर्ट दे दी। बीते सोमवार को रामप्रसाद को कर्जमुक्ति प्रमाण पत्र मिला। प्रमाण पत्र देख कर रामप्रसाद भौचक्के रह गए। रामप्रसाद को न तो रुलाई आ रही थी और न ही वह हंस पा रहे थे। क्योंकि बैंक ने जो प्रमाण पत्र रामप्रसाद को दिया, उसमें लिखा था कि उनका डेढ़ रुपये का लोन माफ कर दिया गया है। राम प्रसाद ने डेढ़ रूपये का लोन माफी पर कहा कि सरकार को क्या जरूरत थी हम जैसे गरीब किसानों का मजाक बनाने का। सरकार हमें इतना गिरा हुआ समझती है कि क्या डेढ़ रूपए कर्ज नही जमा कर सकते है। उनका कहना है कि जब वह प्रमाण पत्र लेने शहर आ रहा था तब हमने आगे तक के सपने देख लिए थे कि अब आज के बाद उन्हें कर्ज नहीं देना पड़ेगा। हम मेहनत की कमाई से अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा देंगे क्योंकि जितना पैसा आता था वो कर्जे मे चला जाता था। लेकिन लगता है कि सरकार ने मेरा डेढ़ रूपये का कर्जा माफ करके हम गरीबों पर बड़ा अहसान किया है। उनका कहना है कि सरकार ने मेरा सिर्फ मजाक बनाया है।

लाखों के लोन पर 6 रुपये माफ

लाखों के लोन पर 6 रुपये माफ

ऐसा ही मामला तिलहर तहसील का है। जहां लाखों रुपए का कृषि लोन होने के बावजूद क्षेत्र के दो किसानों का 6 रुपए तथा 4748 रुपए ही लोन माफ हुआ। किसानों को कर्ज मुक्ति प्रमाणपत्र जब मिला तो वह भौचक्के रह गए। अगले दिन बैंक मैनेजर के पास गए तो बैंक मैनेजर ने भी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया, जिससे किसान परेशान हैं। क्षेत्र के लखौहा गांव निवासी वीरपाल ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2015 में 1 लाख 40 हजार रूपये का कृषि ऋण लिया था। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2016 में कृषि ऋण को रिन्यूवल कराते हुए 1 लाख 55 हजार रूपए का कृषि ऋण लिया। उन्होंने बताया कि जब उन्हें शाहजहांपुर में बीते रविवार को कर्ज मुक्ति प्रमाण पत्र लेने का बुलावा आया तो उनके परिवार में खुशी का माहौल था। वह शाहजहांपुर प्रमाण पत्र लेने के लिए गए। लेकिन जब उन्हें मात्र छह रुपए लोन माफी का प्रमाण पत्र मिला तो उनके पैरों के नीचे से जमीन ही खिसक गई।

बैंक के चक्कर लगा रहे किसान

बैंक के चक्कर लगा रहे किसान

उधर इसी गांव के झाझन लाल का केसीसी खाता संख्या 50279893561 भी इलाहाबाद बैंक में है। झाझन ने बताया कि उन पर 1लाख 32 हजार रुपए कृषि लोन था। उन्होंने बताया कि सरकार ने उनका मात्र 4748 रुपए ही माफ करते हुए कर्ज मुक्ति प्रमाण पत्र दिया है। दोनों किसान वीरपाल और झाझन ने बताया कि बीते सोमवार को बैंक में जाकर मैनेजर से मिले और जानकारी करनी चाही, लेकिन उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। वही तहसील के कर्मचारियों ने बताया कि उनके द्वारा जो फील्डिंग कार्य किया था, उसकी फीडिंग करके शासन को भेज दी गई थी जो लोन माफ हुआ है वह शासन स्तर से माफ हुआ है इतना कम लोन माफ कैसे हुआ है इसकी जानकारी उच्चाधिकारी ही दे सकते हैं। फिलहाल कम लोन माफ होने से किसान सरकार को कोसते नजर आए। वहीं लीड बैंक मैनेजर चंद्रशेखर जोशी ने बताया कि 31 मार्च 2016 को किसानों के खातों में जितना बैलेंस होगा, उतना ही लोन माना जाएगा और वही रुपया माफ किया गया है।

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