Sambhal News: आखिर क्यों विस्थापित की गई साईं बाबा की प्रतिमा? पुजारी और श्रद्धालुओं ने बताई बड़ी बात
Sambhal News: यूपी संभल जिले के मोहल्ला ठेर स्थित शिव मंदिर में बड़ा धार्मिक बदलाव देखने को मिला। यहां वर्षों से स्थापित साईं बाबा की प्रतिमा को हटाकर गंगा में विसर्जित कर दिया गया। मंदिर समिति ने अब 27 अगस्त को गणेश प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया है।
स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि धीरे-धीरे लोगों का साईं बाबा की पूजा से मोहभंग होने लगा था। मंदिर पुजारी सहित भक्तों ने सामूहिक बैठक कर सहमति बनाई और प्रतिमा विस्थापन की प्रक्रिया शुरू की। विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

मंदिर का निर्माण वर्ष 1992 में हुआ था और तभी से शिवलिंग की नियमित पूजा होती आ रही है। वर्ष 2011 में एक परिवार ने अपनी माताजी की स्मृति में यहां साईं बाबा की प्रतिमा लगवाई थी। लेकिन बीते कुछ वर्षों में उनकी पूजा में आस्था कम हो गई थी।
गंगा में किया गया विधिवत विसर्जन
प्रतिमा हटाने का काम रविवार से शुरू कर दिया गया था। पहले प्रतिमा के चारों ओर लगी सुरक्षा रेलिंग और प्लाई हटा दी गई। इसके बाद मंगलवार सुबह साईं बाबा की प्रतिमा को उठाकर अनूपशहर गंगा ले जाया गया और विधि-विधान से विसर्जन किया गया।
श्रद्धालुओं का कहना है कि यह निर्णय विवाद टालने और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप लिया गया। सभी भक्त गंगा तट पर इकट्ठा हुए और सामूहिक मंत्रोच्चार के बीच प्रतिमा का जल समर्पण किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल शांतिपूर्ण रहा।
गणेश प्रतिमा स्थापना की तैयारियां
मंदिर के पुजारी आचार्य अवनीश शास्त्री ने बताया कि अब 27 अगस्त को गणेश प्रतिमा की स्थापना की जाएगी। इस अवसर पर विशेष पूजन, हवन और आरती का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं का मानना है कि इससे मंदिर का धार्मिक वातावरण और भी पवित्र होगा।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि गणेश प्रतिमा की स्थापना गणेश चतुर्थी से पहले होना शुभ संयोग है। समिति ने तैयारी शुरू कर दी है और भक्त बड़ी संख्या में इस आयोजन में भाग लेने की उम्मीद जता रहे हैं।
मामले पर आई श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया
मोहल्ले के निवासी कमलकांत तिवारी ने बताया कि साईं बाबा की प्रतिमा का विसर्जन सर्वसम्मति से किया गया है। किसी ने इसका विरोध नहीं किया। सभी ने माना कि जब श्रद्धा नहीं रही तो प्रतिमा को विस्थापित कर गंगा में प्रवाहित करना उचित था।
अमित कुमार गुप्ता ने कहा कि इस फैसले से किसी की भावनाएं आहत नहीं हुईं। सभी ने शांतिपूर्वक कार्यक्रम संपन्न कराया। श्रद्धालु अब नई गणेश प्रतिमा के स्वागत को लेकर उत्साहित हैं और मंदिर में सकारात्मक माहौल बना हुआ है।
पंडित अवनीश शास्त्री ने बताया कि वेदों और पुराणों में साईं बाबा की पूजा का कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए सनातन परंपरा के अनुरूप उन्हें मंदिर से हटाया गया। यह निर्णय शास्त्रसम्मत मान्यताओं को ध्यान में रखकर लिया गया है।












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