Sambhal News: संभल में नेजा मेला पर रोक, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, पुलिस सतर्क

Sambhal News: संभल में हर साल आयोजित होने वाले नेजा मेले को इस बार प्रशासन ने रोक दिया, जिससे विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस ने मेले में ढाल गाड़ने वाले स्थान को सीमेंट से ढक दिया और पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया है।

मंगलवार को नेजा मेला आयोजित करने की तैयारी चल रही थी, लेकिन प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी। स्थानीय लोग जब मेले की परंपरागत रस्म निभाने पहुंचे तो पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया और ढाल स्थल को सीमेंट से ढक दिया। इसके बाद भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विरोध देखने को मिल रहा है।

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प्रशासन ने दी सफाई, बताया क्यों रोका मेला

अपर पुलिस अधीक्षक श्रीश चंद्र ने कहा कि इस मेले को जारी रखना उचित नहीं था और प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को देखते हुए इसे रोकने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि सालार गाजी की याद में मनाए जाने वाले इस आयोजन पर कई लोगों ने आपत्ति जताई थी, इसलिए प्रशासन को यह कदम उठाना पड़ा।

पुलिस अधिकारी ने यह भी कहा कि इतिहास के अनुसार, सालार गाजी महमूद गजनवी का भांजा था और भारत में लूटपाट के लिए आया था। इसलिए, इस तरह के आयोजन को बढ़ावा देना सही नहीं माना जा सकता। प्रशासन की ओर से साफ किया गया कि शांति व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।

सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर

पुलिस ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर इस मामले से जुड़ी किसी भी भ्रामक खबर या अफवाह को फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की टीम लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नजर रख रही है, ताकि कोई भी गलत सूचना लोगों के बीच न पहुंचे।

इसके अलावा, पूरे इलाके में फ्लैग मार्च किया जा रहा है और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और कानून का पालन करें।

स्थानीय निवासियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

स्थानीय निवासी मतीन ने इस मामले पर कहा कि यह पूरी तरह से प्रशासनिक फैसला है और वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। वहीं, शहजाद आलम ने कहा कि पिछले 45 सालों से यह मेला आयोजित हो रहा था, लेकिन प्रशासन ने पहली बार इसे रोकने का निर्णय लिया है।

वहीं, एक अन्य स्थानीय निवासी संजय ने प्रशासन के फैसले का समर्थन किया और कहा कि यह कदम बहुत पहले ही उठाया जाना चाहिए था। उन्होंने सालार गाजी को लुटेरा बताते हुए कहा कि वह बहराइच और संभल में लूटपाट की घटनाओं के लिए जिम्मेदार था।

हिंदू संगठनों के नेताओं ने इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि प्रशासन ने एक ऐतिहासिक गलती को सही करने का काम किया है। अशोक कुमार नाम के व्यक्ति ने कहा कि सालार गाजी ने इतिहास में कई मंदिरों को नुकसान पहुंचाया था, इसलिए इस तरह के आयोजनों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।

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