मायावती के खिलाफ बगावत शुरू, नेताओं ने लगाए बड़े आरोप
मायावती की बसपा के भीतर भी शुरु हो गया है विवाद, पहली बार मायावती के खिलाफ उठने लगी है आवाज
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी जिस तरह से पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में शून्य पर सिमटी और इसके बाद विधानसभा चुनाव में पार्टी को सिर्फ 19 सीटें हासिल हुई है उसके बाद पार्टी के भीतर पहली बार बगावत शुरु हो गई है। पहली बार मायावती के खिलाफ पार्टी में विरोध की आवाज उठने लगी है। जिस तरह से यूपी चुनाव में पार्टी को बुरी हार का सामना करना पड़ा और मायावती ने इसके लिए वोटिंग मशीन को जिम्मेदार ठहराया है उसके बाद पार्टी के भीतर कई नेता यह कह रहे हैं कि क्यों हार के बाद किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई और अभी तक पार्टी की संरचना में कोई बदलाव नहीं किया गया।


सिद्धांतों से हटी पार्टी
मायावती को उत्तर प्रदेश में लगातार तीन बार 2012, 2014 और 2017 में हार का सामना करना पड़ा है। बसपा के कई दिग्गज नेताओं ने मायावती पर पार्टी के मूलभूत संरचना के साथ छेड़छाड़ करने का सवाल खड़ा किया है कि आखिर क्यों मायावती दलितों, ओबीसी, और मुसलमानों के साथ ब्राह्मणों को अपनी ओर खींचने वाली टैगलाइन सर्वजन हिताय सर्व जिन सुखाय के फॉर्मूले से पीछे हटीं। कई नेताओं ने मायावती पर ओबीसी वर्ग को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है।

मायावती के करीबी हुए खिलाफ
मायावती जब काशीराम के जन्मदिन के मौके पर 15 मार्च को उनके मेमोरियल पहुंची तो उनके साथ महज कुछ ही लोग मौजूद थे, पार्टी के अंदरूनी नेताओं नेताओं का कहना है कि इस कार्यक्रम में अब तक की सबसे कम भीड़ आई है जबसे पार्टी का गठन हुआ और मायावती पार्टी की अध्यक्ष बनी। पार्टी के पूर्व नेता और मंत्री कमलकांत गौतम ने 13 अप्रैल को बाबा साहब के जन्मदिन के मौके पर जनसभा बुलाई है और उन्होंने बहुजन समाज के लोगों के लिए एक नए दल के गठन की बात कही है, उन्होंने आरोप लगाया है कि मायावती ने स्रवजन को दरकिनार कर दिया है। इसके बाद पार्टी के कई नेताओं ने इलाहाबाद, कानपुर और लखनऊ में पार्टी से अपना इस्तीफा दे दिया।
गौतम का कहना है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं में काफी असंतोष है, वह सवाल पूछ रहे हैं कि क्यों ओबीसी नेताओं को किनारे किया गया, काशीराम की बहुजन समाज की नीति को दरकिनार किया गया है। मायावती को यह बर्दाश्त नहीं होता है कि किसी नेता का अपने दम पर जनसमर्थन हो। मुझे उम्मीद है कि बसपा के तकरीबन 10 हजार कार्यकर्ता 13 अप्रैल को जनसभा में आएंगे

100 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देना गलत
मायावती के खिलाफ अभियान चलाने वाले पूर्व बसपा नेता मनोज कुरील का कहना है कि मायावती ने कई दलित और उप जातियों को नजरअंदाज किया जिन्होंने बाद में भाजपा को अपना समर्थन दिया। पार्टी के कई नेताओं ने मायावती के 100 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देने का भी विरोध किया, उनका कहना है कि यह गलत फैसला था और सिर्फ 5 मुस्लिम उम्मीदवार ही चुनाव जीत सके हैं। पार्टी के एक अन्य नेता का कहना है कि इस बार सिर्फ 19 विधायक जीते हैं और इनका भी पता नहीं है कि यह पांच साल तक बसपा के साथ रहेंगे, मायावती ने टिकटों के बंटवारा सही तरीके से नहीं किया।

गलत टिकट बंटवारा किया गया
कमलकांत गौतम का कहना है कि जब 15 मार्च के कार्यक्रम में मैं गया तो वहां सिर्फ 80 लोग आए थे जोकि आजतक सबसे कम लोग थे, मुझे उम्मीद है कि मायावती अपनी हार को स्वीकार करेंगी और इसपर मंथन करेंगी। जिस ईवीएम मशीन ने उन्हें 2007 में 206 सीट दी वह आखिर में कैसे गलत साबित हो सकती है। मायावती ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी, राम अचल राजभर, रामवीर उपाध्याय को टिकट दिया जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप हैं, जब योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी तो सबसे पहले मुख्यमंत्री के पास जाने वाले बसपा विधायक रामवीर ही थे।












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