Ritu Jaiswal: तेजस्वी यादव की कभी बेहद करीबी रहीं रितु जायसवाल ने बदला पाला, 'मुखिया दीदी' हुईं BJP में शामिल
Ritu Jaiswal Joines BJP: बिहार की राजनीति में मंगलवार को बड़ा सियासी बदलाव देखने को मिला। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की चर्चित नेता और 'मुखिया दीदी' के नाम से पहचान बनाने वाली रितु जायसवाल अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ आ गई हैं। पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। लंबे समय तक राजद का अहम चेहरा रहीं रितु पिछले कुछ महीनों से पार्टी नेतृत्व से नाराज बताई जा रही थीं।
2025 विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने खुलकर विरोध किया था और निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गई थीं। अब भाजपा में शामिल होने के साथ ही बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। खासकर मिथिलांचल और महिला वोट बैंक को लेकर इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है।

भाजपा कार्यालय में हुई सदस्यता
भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह में प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने रितु जायसवाल को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस दौरान मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल समेत कई नेता मौजूद रहे। भाजपा में शामिल होने के बाद रितु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और पार्टी की कार्यशैली की तारीफ की।
उन्होंने कहा कि भाजपा "नेशन फर्स्ट" की सोच के साथ काम करती है और यही विचार उन्हें पार्टी के करीब लेकर आया। रितु ने कहा कि वह अब पूरी ताकत के साथ भाजपा की विचारधारा को लोगों तक पहुंचाने का काम करेंगी।
टिकट कटने के बाद बढ़ी नाराजगी
रितु जायसवाल लंबे समय से राजद से जुड़ी हुई थीं। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्हें परिहार सीट से टिकट नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने नाराजगी जाहिर की थी। बाद में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया।
हालांकि चुनाव में उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन करीब 64 से 65 हजार वोट हासिल कर उन्होंने अपने मजबूत जनाधार का संकेत दिया। चुनाव के बाद राजद ने उन पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया था।
'मुझे बागी कहा गया'-रितु
भाजपा में शामिल होने के बाद रितु जायसवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया था, तब उन्हें "बागी" कहा गया। लेकिन उनके मुताबिक असल में परिहार की जनता व्यवस्था से नाराज थी और लोग उन्हें ही अपना प्रतिनिधि बनाना चाहते थे।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उनके पुराने वीडियो और बयान वायरल कर उन्हें ट्रोल करने की कोशिश होगी, लेकिन वह इससे डरने वाली नहीं हैं। रितु ने साफ कहा कि वह पूरी तरह निडर होकर राजनीति करेंगी।
पंचायत से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
सीतामढ़ी जिले की सिंहवाहिनी पंचायत से रितु जायसवाल ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। वर्ष 2016 में वह पंचायत की मुखिया चुनी गईं और गांव स्तर पर किए गए कामों की वजह से तेजी से चर्चाओं में आईं।
उनके काम को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। वर्ष 2017 में उन्हें 'आदर्श युवा सरपंच सम्मान' दिया गया। इसके बाद 2018 में उपराष्ट्रपति के हाथों उन्हें 'चैंपियंस ऑफ चेंज' पुरस्कार मिला। 2019 में उनकी पंचायत को दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण सम्मान से सम्मानित किया गया।
राजद में तेजी से बढ़ा कद
राष्ट्रीय जनता दल ने 2020 विधानसभा चुनाव में उन्हें परिहार सीट से उम्मीदवार बनाया था। इसके बाद पार्टी ने उन्हें प्रदेश प्रवक्ता और महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी।
2024 लोकसभा चुनाव में राजद ने उन्हें शिवहर सीट से मैदान में उतारा। उन्होंने करीब 4.74 लाख वोट हासिल किए, लेकिन लगभग 29 हजार वोटों से चुनाव हार गईं। इसके बावजूद उनकी सक्रियता और जमीनी पकड़ लगातार चर्चा में बनी रही।
'मुखिया दीदी' का राजनीतिक सफर
- 2016 : सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया बनीं
- 2017 : आदर्श युवा सरपंच सम्मान मिला
- 2018 : चैंपियंस ऑफ चेंज पुरस्कार से सम्मानित
- 2019 : पंचायत को राष्ट्रीय स्तर का सम्मान
- 2020 : राजद के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा
- 2021 : राजद की प्रदेश प्रवक्ता और महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष बनीं
- 2024 : शिवहर लोकसभा चुनाव लड़ा
- 2025 : निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़ा और अब भाजपा में शामिल हुईं
भाजपा के लिए क्यों अहम मानी जा रहीं रितु
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत स्तर पर मजबूत पकड़, महिला नेताओं में लोकप्रिय पहचान और मिथिलांचल क्षेत्र में सक्रियता की वजह से भाजपा के लिए रितु जायसवाल का शामिल होना फायदेमंद साबित हो सकता है।
ग्रामीण इलाकों में उनकी अलग पहचान है और 'मुखिया दीदी' के नाम से उन्हें काफी लोग जानते हैं। ऐसे में भाजपा उन्हें आने वाले चुनावों में बड़े चेहरे के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है।












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