मथुरा के शिव मंदिर में वैदिक जपों के साथ हुआ रावण पूजन, पुतला दहन को रोकने की CJI से मांग करेगा मंडल
मथुरा, अक्टूबर 15। दशहरा का दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन भगवान राम ने रावण वध कर धरती को अत्याचार से मुक्त किया था। सदियों से हमारे देश में दशहरे को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाते हैं और इसीलिए रावण वध के तौर पर रावण का पुतला दहन किया जाता है, लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि कृष्ण की नगरी मथुरा में आज रावण की पूजा की गई है। दरअसल, मथुरा स्थित शिव मंदिर में वैदिक जपों और शंख की आवाज के बीच रावण की पूजा की गई। कार्यक्रम का आयोजन लंकेश मित्र मंडल की ओर से यमुदा नदी के किनारे किया गया। यहां हर साल रावण की पूजा की जाती है।

रावण दहन को रोकने की मांग CJI से करेंगे
आपको बता दें कि लंकेश मित्र मंडल की ओर से ही रावण दहन की प्रथा को खत्म करने की मांग की गई है। मंडल के अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत एडवोकेट ने कहा कि त्रिकालदर्शी विद्वान का हर साल पुतला दहन करना एक कुरीति है। हिंदू धर्म में एक बार ही व्यक्ति के अंतिम संस्कार करने की व्यवस्था है, लेकिन हमारे समाज में पुतला दहन की कुरीति प्राचीन समय से गलत आधारों पर अपनाई जा रही है, इसलिए हम इस कुरीति का विरोध करते हैं। ओमवीर सारस्वत ने कहा कि हम इस मामले को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के समक्ष उठाने का अनुरोध करेंगे।
रावण की पूजा से पहले होता है शिव का पूजन
लंकेश मित्र मंडल का दावा है कि रावण की जो भूल थी, वो क्षमा योग्य है क्योंकि रावण ने लक्ष्मण के अपमानजनक कृत्य का बदला लेने के लिए देवी सीता का हरम किया था, जिन्होंने उनकी बहन सूर्पनखा का अपमान किया था। सारस्वत ने दावा किया कि रावण ने न केवल राम के पुजारी के रूप में काम किया बल्कि उसे जीत का आशीर्वाद भी दिया। उन्होंने कहा कि मंदिर में रावण की पूजा से पहले भगवान शिव को दही, दूध, शहद, घी और खांडसारी से स्नान कराया जाता है। वहीं इलाके के डीएम का कहना है कि इस मौके पर कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है।












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