Acharya Satyendra Das: रामलला के मुख्य पुजारी की तबीयत कैसी? अनुष्ठान शुरू, मंत्रोच्चार के साथ दी रही आहुति

राम मंदिर (Ram Mandir) के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास (Acharya Satyendra Das) पिछले तीन दिनों से अस्वस्थ चल रहे हैं। लखनऊ के एसजीपीजीआई अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। मंगलवार अस्पताल ने आचार्य को लेकर एक हेल्थ अपडेट जारी किया। इस बीच अयोध्या के संत उनके स्वास्थ्य के बेहतर होने की रामलला से कामना कर रहे हैं। राम मंदिर के मुख्य पुजारी शीघ्र स्वस्थ होकर अयोध्या लौटें और रामलला के सेवा करें, इस कामना के साथ यहां अनुष्ठान भी शुरू किया गया है।

आचार्य सत्येंद्र दास वह मधुमेह और उच्च रक्तचाप से ग्रस्त हैं। वर्तमान में वे लखनऊ के पीजीआई अस्पताल के न्यूरोलॉजी वार्ड एचडीयू में भर्ती हैं। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

Acharya Satyendra Das health updates

पीजीआई ने जारी किया हेल्थ बुलेटिन
पीजीआई ने मंगलवार को जारी हेल्थ बुलेटिन में कहा कि आचार्य स्ट्रोक से पीड़ित हैं। उन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप की समस्या है। बता दें कि पिछले हफ्ते रविवार को उन्हें सांस लेने में कठिनाई महसूस होने पर श्री राम अस्पताल अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने के चलते उन्हें ट्रामा सेंटर और फिर लखनऊ पीजीआई रेफर किया गया।

आचार्य सत्येंद्र दास की तबीयत बिगड़ने से मंदिर प्रशासन और उनके भक्तों में चिंता का माहौल है। रामनगरी के कई साधु संतों ने आचार्य सत्येंद्र दास के बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

ब्रेन हैमरेज की पुष्टि
सीटी स्कैन में पता चला कि उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ है और यह कई सेगमेंट्स में है। रविवार को एक बयान में श्री राम चिकित्सालय के डॉक्टर अरुण कुमार सिंह ने कहा कि आचार्य को लखनऊ रेफर कर दिया है ताकि वहां पर उन्हें और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

84 वर्ष के आचार्य सत्येंद्र 33 साल से रामलला की सेवा में
वर्ष 1992 में बाबरी विध्वंस से करीब नौ महीने पहले से रामलला के पुजारी की भूमिका विधिवत निभा रहे आचार्य सत्येंद्र की उम्र करीब 84 वर्ष हो चुकी है। रामलला के साथ इन 33 वर्षों के सफर के दौरान आचार्य सत्येंद्र दास ने राम जन्मभूमि के लिए कई संघर्ष देखे।

संस्कृत विद्यालय से आचार्य की डिग्री हासिस करने वाले सत्येंद्र दास अयोध्या के संस्कृत महाविद्यालय में व्याकरण विभाग में सहायक अध्यापक भी रहे। लेकिन उनकी रामलला के प्रति आस्था इतनी प्रगाढ़ थी, कि उन्होंने नौकरी छोड़ दी और भगवान की सेवा में अपना पूरा जीवन लगा दिया।

टेंट से दिव्य भवन तक वे पिछले तीन दशकों से अधिक वक्त से रामलला का श्रंगार, आरती, भोग अपने हाथों से लगाते रहे हैं। आचार्य सत्येंद्र दास की रामलला के पुजारी के रूप में नियुक्ति विवादित ढांचा के विध्वंस के बाद 5 मार्च, 1992 को तत्कालीन रिसीवर ने की थी। शुरुआत में उन्हें अपने खर्चे के लिए केवल 100 रुपये मासिक पारिश्रमिक मिलता था, जिसके बाद धीरे- धीरे उनके मानदेय में वृद्धि हुई और 12 हजार मासिक मानदेय मिलने लगा।

राममंदिर ट्रस्ट गठित होने और रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के बाद राम मंदिर ट्रस्ट ने आचार्य सत्येंद्र दास के मानदेय में वृद्धि करते हुए 38500 प्रति माह कर दिया। ट्रस्ट ने इसकी साथ एक और अहम घोषणा की, जिसके तहत उन्हें आजीवन सैलरी देने का ऐलान किया गया।

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