Champat Rai और अनिल मिश्र के इस्तीफे के बाद Ram Mandir Trust में कौन-कौन बचा? कैसे काम करती है कमेटी
Ram Mandir Trust Members List: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और अनियमितताओं के मामले के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक बार फिर चर्चा में है। इस विवाद के बीच ट्रस्ट के दो प्रमुख चेहरे महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
उनके इस्तीफे के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि अब ट्रस्ट में कौन-कौन सदस्य बचे हैं और आखिर यह ट्रस्ट काम कैसे करता है।

अब मंदिर की व्यवस्था कौन चलाएगा और यह ट्रस्ट असल में काम कैसे करता है? आइए, आसान भाषा में इस पूरे ट्रस्ट का गणित और इसके बचे हुए 12 सदस्यों की प्रोफाइल समझते हैं।
क्या है श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट?
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद केंद्र सरकार ने फरवरी 2020 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था। इस ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य राम मंदिर का निर्माण, रखरखाव और पूरे परिसर का संचालन करना है।मंदिर में आने वाले दान, श्रद्धालुओं की सुविधाएं, निर्माण कार्य, धार्मिक आयोजन और प्रशासनिक फैसले इसी ट्रस्ट के जरिए लिए जाते हैं।
अब ट्रस्ट में बचे हैं केवल 12 सदस्य:
मूल रूप से ट्रस्ट में सदस्यों की संख्या ज्यादा थी, लेकिन कुछ सदस्यों के निधन और हालिया दो इस्तीफों के बाद अब एक्टिव सदस्यों की संख्या घटकर 12 रह गई है। (राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र का 2025 में निधन होने के बाद उनका पद अभी भी खाली है)।
आइए जानते हैं कि इस समय ट्रस्ट में कौन-कौन शामिल हैं:
1. महंत नृत्य गोपाल दास (अध्यक्ष)
ये राम मंदिर ट्रस्ट के सर्वोच्च अध्यक्ष (President) हैं। धार्मिक मामलों में मार्गदर्शन देना, देश भर के संतों से जुड़े फैसले लेना और ट्रस्ट की नीतियों का नेतृत्व करना इन्हीं के हाथ में है। 1938 में जन्मे महंत जी अयोध्या के सबसे बड़े संतों में गिने जाते हैं और मणिराम दास छावनी के पीठाधीश्वर हैं।
2. स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज (कोषाध्यक्ष)
ये ट्रस्ट के सबसे महत्वपूर्ण पदों में से एक यानी कोषाध्यक्ष (Treasurer) हैं। मंदिर को देश-विदेश से मिलने वाले दान, चढ़ावे का पूरा हिसाब-किताब रखना और ट्रस्ट के बैंक खातों की निगरानी करना इन्हीं की मुख्य जिम्मेदारी है। इन्होंने वाराणसी से वेदों और प्राचीन ग्रंथों की गहरी शिक्षा ली है।
3. के. परासरन (सीनियर ट्रस्टी और कानूनी सलाहकार)
92 साल के के. परासरन सुप्रीम कोर्ट के सबसे सीनियर और दिग्गज वकीलों में से एक हैं। इन्होंने ही अदालत में 'रामलला विराजमान' का पक्ष मजबूती से रखा था और 500 साल पुरानी कानूनी लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाया। ट्रस्ट के सभी कानूनी और संवैधानिक मामलों में इनका फैसला अंतिम और महत्वपूर्ण होता है।
4. कृष्णमोहन (ट्रस्टी)
हरदोई (UP) के रहने वाले कृष्णमोहन महाराष्ट्र कैडर के रिटायर्ड इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFoS) ऑफिसर हैं। वे नागपुर में पोस्टिंग के दौरान आरएसएस (RSS) से जुड़े थे। सितंबर 2025 में दलित प्रतिनिधि कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद इन्हें ट्रस्ट में शामिल किया गया था। खास बात यह है कि वर्तमान दान चोरी विवाद में इन्होंने ही पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई है।
5. नृपेन्द्र मिश्रा (भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव और 1967 बैच के सीनियर रिटायर्ड आईएएस (IAS) अधिकारी नृपेन्द्र मिश्रा के पास राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष की कमान है। मंदिर का डिजाइन कैसा होगा, तकनीकी पहलू क्या होंगे और निर्माण की गति क्या होगी यह सब नृपेन्द्र मिश्रा ही देखते हैं। इन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है।
6. जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज
ये बद्रीनाथ की ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं। पहले इनका नाम सोमनाथ द्विवेदी था और ये इलाहाबाद के संस्कृत कॉलेज में वेदांत विभाग के प्रमुख रह चुके हैं। ये धार्मिक और आध्यात्मिक मामलों में अपनी गहरी पैठ रखते हैं।
7. जगद्गुरु मध्वाचार्य स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ जी महाराज
ये कर्नाटक के उडुपी में स्थित प्रसिद्ध 'पेजावर मठ' के मौजूदा प्रमुख (मठाधीश) हैं। वे काफी पढ़े-लिखे संत हैं और उडुपी के पूर्णा प्रज्ञा कॉलेज से ग्रेजुएट हैं।
8. युगपुरुष परमानंद गिरी जी महाराज
हरिद्वार के रहने वाले परमानंद गिरी जी एक महान आध्यात्मिक गुरु हैं। इन्होंने 150 से ज्यादा धार्मिक किताबें लिखी हैं और साल 2000 में संयुक्त राष्ट्र (UN) के वर्ल्ड मिलेनियम पीस समिट को भी संबोधित कर चुके हैं।
9. महंत दिनेन्द्र दास जी महाराज
ये अयोध्या के मशहूर 'निर्मोही अखाड़े' का प्रतिनिधित्व करते हैं। निर्मोही अखाड़ा राम मंदिर मामले में शुरुआत से ही एक प्रमुख पक्षकार रहा है, इसलिए ट्रस्ट में इनका होना बेहद अहम माना जाता है।
ट्रस्ट में सरकार और प्रशासन के 3 बड़े अधिकारी (पदेन सदस्य)
मंदिर के कामकाज में पारदर्शिता और सुरक्षा बनी रहे, इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार के 3 बड़े आईएएस (IAS) अधिकारी भी इस ट्रस्ट का हिस्सा हैं:
10. प्रशांत लोखंडे (केंद्र सरकार के प्रतिनिधि): ये 2001 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में सीबीएसई (CBSE) के नए चेयरपर्सन हैं। वे ट्रस्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखते हैं।
11. संजय प्रसाद (यूपी सरकार के प्रतिनिधि): ये 1995 बैच के सीनियर आईएएस अधिकारी हैं और इस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) के पद पर तैनात हैं।
12. शंशाक त्रिपाठी (स्थानीय प्रशासन प्रतिनिधि): IIT कानपुर से पढ़े 2016 बैच के तेजतर्रार आईएएस अधिकारी शंशाक त्रिपाठी वर्तमान में अयोध्या के जिलाधिकारी (DM/कलेक्टर) हैं। पद के नियम के अनुसार अयोध्या के डीएम इस ट्रस्ट के पदेन सदस्य होते हैं।
ट्रस्ट काम कैसे करता है? किसके पास है वोटिंग पावर?
'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के कामकाज का नियम बेहद स्पष्ट और कड़ा है:
वोटिंग का अधिकार (Voting Rights): ट्रस्ट के कुल सदस्यों में से केवल 11 सदस्यों के पास ही वोट देने (वोटिंग) का अधिकार होता है। ट्रस्ट में शामिल तीनों सरकारी अधिकारी (आईएएस प्रशांत लोखंडे, संजय प्रसाद और शंशाक त्रिपाठी) इसके पदेन सदस्य हैं, इसलिए इन्हें किसी फैसले पर वोट देने का अधिकार नहीं होता। वे केवल व्यवस्था और तालमेल का काम देखते हैं।
अब खाली पदों का क्या होगा? कौन चुनेगा नए सदस्य?
चंपत राय और अनिल मिश्र के इस्तीफे और पुराने खाली पदों को लेकर जब विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अध्यक्ष आलोक कुमार से पूछा गया, तो उन्होंने साफ किया कि नए सदस्यों को चुनने का पूरा अधिकार खुद ट्रस्ट के पास है। ट्रस्ट की 'डीप डीड' के अनुसार, जो भी पद खाली हुए हैं, उन्हें भरने का फैसला बचे हुए ट्रस्टी मिलकर करेंगे। इसमें सरकार या किसी बाहरी संस्था का कोई दखल नहीं होगा।














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